
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संस्थान भोपाल द्वारा उदयपुर के लोक कला मण्डल में आयोजित पांच दिवसीय बहुरंग उत्सव के आज तीसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत में शहरवासियों ने मैले में लगी स्टॉल पर देश के विभिन्न राज्यों से आये कलाकारों द्वारा निर्मित कलात्मक वस्तुओं को देखने के साथ ही जमकर खरीददारी की। बहुरंग उत्सव में शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत दीप प्रज्जवलन के साथ हुई। कार्यक्रमों में सबसे पहले मध्यप्रदेश के बून्देल खण्ड से आये कलाकारों ने मंच पर पहली प्रस्तुति के रूप में राई नृत्य की प्रस्तुत किया।

राजस्थान के सहरिया समुदाय द्वारा चकरी, स्वांग नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुति से दर्शकों का खुब मनोंरंजन हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के इसी क्रम में मणिपुर के कोम जनजाति का प्राचीन नृत्य किया गया। मंच पर झारखण्ड से आये कलाकारों ने छाऊ नृत्य की प्रस्तुति दी एवं निशुंभ राक्षस का मां दुर्गा द्वारा किया गया वध का चित्रण किया गया।

कार्यक्रम के सबसे आखिर में असम के कलाकारों द्वारा विशेष रूप से किया जाने वाला बिहु नृत्य का प्रदर्शन किया गया । सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सफल संचालन श्याम माली द्वारा किया गया संचालन के दौरान श्याम माली ने दर्शको को हर नृत्य के बारे में जुडी हुई पौराणिक घटनाओं एवं उनके प्रचलन को बखुबी समझाया। पांच दिवसीय मैले के तीसरे दिन विभिन्न राज्यों से आये कलाकारों द्वारा निर्मित कलात्मक वस्तुओं की काफी खरीददारी हुई। मैले के प्रांगण के बीचों-बीच बने मंच पर चल रही चित्रकारों की कार्यशाला में जहां चित्रकारों ने एक ही मंच पर बैठ कर अपनी चित्रकारी बनाते हुए एक दुसरे से चित्रकारी के गुण बांटे, वहीँ कार्यशाला को देखने के लिए स्कूल- कॉलेज एवं कला क्षैत्र से जुडें लोगों का जमावडा दिन भर लगा रहा।

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