हरियाणा में 408 एकड़ में यहां बनेगा देश का सबसे आधुनिक लॉजिस्टिक हब, युवाओं को मिलेगा रोजगार

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हरियाणा में 408 एकड़ में यहां बनेगा देश का सबसे आधुनिक लॉजिस्टिक हब, युवाओं को मिलेगा रोजगार 

Udaipur Times, Modern logistics hub built in Mahendragarh : हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी क्षेत्र में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब (आईएमएलएच) परियोजना अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। करीब 765.27 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जारी ग्लोबल टेंडर की तकनीकी बोलियां एक जुलाई को चंडीगढ़ में खोली जाएंगी। इसके साथ ही प्रदेश की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक परियोजनाओं में शामिल इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है।

पीपीपी मॉडल पर विकसित होगा प्रोजेक्ट

इस परियोजना को Haryana Multi Modal Logistics Hub Project Limited की ओर से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत विकसित किया जा रहा है। इसके लिए डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और रखरखाव (डीबीएफओटी) मॉडल अपनाया गया है। अगस्त 2025 में ग्लोबल टेंडर जारी किया गया था। इच्छुक कंपनियां 30 जून की शाम पांच बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं, जबकि एक जुलाई को तकनीकी बोलियां खोली जाएंगी। इसके बाद योग्य कंपनियों के चयन और वित्तीय बोलियों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

408 एकड़ में विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं

परियोजना के पहले चरण में करीब 408 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां माल के भंडारण, परिवहन और वितरण के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इस हब के शुरू होने से माल ढुलाई की लागत कम होगी, परिवहन अधिक तेज और व्यवस्थित होगा, उद्योगों को बेहतर सप्लाई चेन सुविधा मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

पहले ही तैयार हो चुका है बड़ा आधारभूत ढांचा

इस परियोजना के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का अधिकांश हिस्सा पहले ही तैयार किया जा चुका है। इसमेंन्यू डाबला रेलवे स्टेशन से रेल कनेक्टिविटी। इनमें 220 केवी की विशेष बिजली लाइन, नारनौल से नहरी पानी की पाइपलाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग से सीधा सड़क संपर्क शामिल हैं।

इसके अलावा आंतरिक रेल लाइन और रेलवे प्लेटफॉर्म का निर्माण भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्रथम चरण में ही करीब 200 करोड़ रुपये खर्च कर रेल लाइन और प्लेटफॉर्म विकसित किए जा चुके हैं।

औद्योगिक निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

लॉजिस्टिक हब के संचालन में आने के बाद क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है। आधुनिक वेयरहाउसिंग और माल परिवहन सुविधाओं से उद्योगों की लागत कम होगी और निवेश बढ़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर भारत के उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा और क्षेत्र एक नए औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर सकता है।

कानूनी चुनौती भी बनी हुई

परियोजना के सामने कानूनी अड़चन भी है। हाल ही में Supreme Court of India ने 91 किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए 129 एकड़ भूमि पर निर्माण कार्य पर सात सितंबर तक रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत अपनी वैधानिक प्रक्रिया अपनाने से नहीं रोकता। मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर को निर्धारित की गई है।

2018 से चल रही है परियोजना

इस मेगा परियोजना की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। इसके लिए करीब एक हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। अब तक भूमि अधिग्रहण पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आधारभूत ढांचे के विकास पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अब 765.27 करोड़ रुपये के ग्लोबल टेंडर के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद इस परियोजना के जल्द आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।

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