दिहाड़ी मजदूर की बेटी ने NEET-UGC में हासिल की सफलता, अब डॉक्टर बनने की पढ़ाई का पूरा खर्च उठायेंगे डिप्टी कमीश्नर
Udaipur Times, Dhanbad Poonam kumari NEET : झारखंड के धनबाद की रहने वाली पूनम कुमारी ने युवाओं के लिए मिसाल कायम की है कि कैसे अटूट संकल्प के साथ सबसे मुश्किल चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है। सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई करते हुए, उन्होंने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में शानदार सफलता हासिल की।
पिता दिहाड़ी मजदूर, आर्थिक तंगी के बावजूद जारी रखी पढ़ाई
SSLNT CM स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस फ़ॉर गर्ल्स की छात्रा पूनम ने NEET UGC में 582 अंक (99.1375 परसेंटाइल) और 16,972 की ऑल इंडिया रैंक हासिल करके न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया। पूनम के पिता धर्मु गोराई दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि उनकी मां पीपू देवी गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद पूनम ने अपनी पढ़ाई जारी रखी।
12वीं में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल कर बनीं थी जिला टॉपर
इससे पहले उन्होंने CBSE कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल करके धनबाद जिले में टॉप किया था।
डिप्टी कमिश्नर आदित्य रंजन ने अपने कार्यालय में पूनम को सम्मानित किया
NEET परीक्षा में उनकी सफलता के बाद, डिप्टी कमिश्नर आदित्य रंजन ने अपने कार्यालय में पूनम को सम्मानित किया। रंजन ने कहा कि किसी भी प्रतिभाशाली छात्र की राह में आर्थिक तंगी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
डिप्टी कमिश्नर आदित्य रंजन पूनम की सारी पढ़ाई का उठायेंगे खर्च
डिप्टी कमिश्नर आदित्य रंजन ने घोषणा की कि जिला प्रशासन पूनम की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगा मेडिकल कॉलेज में दाखिले से लेकर डॉक्टर बनने तक ताकि सरकारी स्कूलों के होनहार छात्रों को संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।
सम्मान समारोह के दौरान, डिप्टी कमिश्नर ने पूनम के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि प्रतिभा को सही अवसरों और समर्थन की आवश्यकता होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन ऐसे छात्रों की प्रगति में मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों को दिया
वहीं, पूनम का सपना कार्डियोलॉजिस्ट बनने और जरूरतमंद मरीजों की सेवा करने का है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल से मिले मार्गदर्शन को दिया।
अपनी मां की बीमारी देखकर डॉक्टर बनने का फ़ैसला किया
पूनम कुमारी ने बताया कि जब भी उनकी मां बीमार पड़ती थीं, तो डॉक्टर के पास जाने पर ठीक हो जाती थीं। इसी वजह से, कम उम्र से ही वे डॉक्टरों के काम से प्रेरित थीं। उन्होंने 10वीं कक्षा पूरी करने के तुरंत बाद डॉक्टर बनने का फ़ैसला किया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी बधाई
पूनम को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा, "पूनम, आपको बहुत-बहुत बधाई। 'स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस' और दूसरे सरकारी स्कूलों के छात्र लगातार तरक्की कर रहे हैं और अपने सपने पूरे कर रहे हैं। हुनर ही इंसान की असली पहचान है, गरीबी नहीं।" सोरेन के मुताबिक, यह एक दिहाड़ी मज़दूर की बेटी के डॉक्टर बनने की दिशा में एक ऐतिहासिक सफ़र है।
उन्होंने कहा, "पूनम की कामयाबी न सिर्फ उसके परिवार के लिए गर्व का पल है, बल्कि राज्य भर के हजीरों जरूरतमंद लेकिन होनहार छात्रों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा जरिया भी है।"