ट्यूशन पढ़ाने वाले पिता की बेटी UPSC क्रैक कर बनीं डिप्टी कमीश्नर, पिता के अधूरे सपने को किया पूरा

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ट्यूशन पढ़ाने वाले पिता की बेटी UPSC क्रैक कर बनीं डिप्टी कमीश्नर, पिता के अधूरे सपने को किया पूरा 

Bhagalpur Chaitali UPSC Success Story : जब बेटियां अपने सपनों को लक्ष्य बना लेती हैं और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाती हैं, तो कठिनाइयों और अभावों के पहाड़ जैसी बड़ी बाधाएं भी उनके रास्ते को नहीं रोक पातीं। भागलपुर जिले के सनहौला ब्लॉक के बनियाडीह गांव की चैताली ने अपनी असाधारण मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति से इसे सच कर दिखाया है। शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा और पूनम कुमारी की लाडली बेटी, 22 वर्षीय चैताली ने अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 565वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले का मान बढ़ाया है। इसके साथ ही, वह अमडिहा ग्राम पंचायत से UPSC परीक्षा पास करने वाली पहली व्यक्ति बन गई हैं।

पिता ने ट्यूशन पढ़ाकर परिवार चलाया

चैताली का सफर एक साधारण परिवार से जुड़ी एक असाधारण और प्रेरणादायक कहानी है। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी; उनके पिता घर का खर्च चलाने के लिए प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाते थे। इस काम से होने वाली सीमित आय के बावजूद, उन्होंने अपनी दोनों बेटियों चैताली और ईशा की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।

उनके पिता, शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा का कभी सपना था कि वे सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करें, लेकिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। उन्होंने अपना यह अधूरा सपना अपनी बेटी चैताली को सौंपा। चैताली ने बचपन से ही ठान लिया था कि वह अपनी कड़ी मेहनत से अपने माता-पिता के अधूरे सपने को हकीकत में बदल देगी।

22 साल की उम्र में हासिल की 565वीं रैंक

चैताली ने अपनी शुरुआती पढ़ाई भागलपुर के प्रतिष्ठित 'होली फैमिली स्कूल' से की। उन्होंने CBSE बोर्ड से 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी (फर्स्ट डिवीजन) में पास की, जिसमें उन्हें 90 प्रतिशत अंक मिले। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और फिर आर्ट्स स्ट्रीम में स्नातक (बैचलर डिग्री) की डिग्री हासिल की, जिसमें भी उन्होंने प्रथम श्रेणी प्राप्त की। कॉलेज के दिनों से ही उनका पूरा ध्यान UPSC परीक्षा की तैयारी पर केंद्रित था। कई चुनौतियों और ध्यान भटकाने वाली संभावित बाधाओं के बावजूद, वह बिना डगमगाए अपने प्रयासों में जुटी रहीं। अपने पहले ही प्रयास में, उन्होंने 565वीं रैंक हासिल की और अपनी वर्षों की लगन को एक ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।

वर्तमान में इंदौर में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं।

उनकी इस सफलता को देखकर उनके माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उनके पिता के लिए, यह केवल एक परीक्षा पास करना नहीं था; बल्कि यह जीवन भर के त्याग, संघर्ष और अटूट विश्वास का सुखद परिणाम था। उनके माता-पिता उनकी सफलता का श्रेय उनकी अपनी कड़ी मेहनत के साथ-साथ माँ मंगलचंडी और बाबा तिवारी जी के आशीर्वाद को देते हैं।

UPSC में अंतिम रूप से चुने जाने के बाद, चैताली ने अपनी अनिवार्य प्रशासनिक ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी की। वर्तमान में वह मध्य प्रदेश के इंदौर में आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) में डिप्टी कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं। बनियाडीह की इस होनहार बेटी ने साबित कर दिया है कि सफलता पाने के लिए किसी बड़े शहर या संपन्न परिवार से होना ज़रूरी नहीं है; इसके लिए बस बड़े सपने देखने का साहस और उन सपनों को हकीकत में बदलने का अटूट जज़्बा होना चाहिए।

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