परिवार का सपना था बेटी बने डॉक्टर, UPSC के साथ BPSC परीक्षा पास कर आस्था बनी बड़ी अधिकारी

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परिवार का सपना था बेटी बने डॉक्टर, UPSC के साथ BPSC परीक्षा पास कर आस्था बनी बड़ी अधिकारी  

Udaipur Times, Success Story of Aastha Singh : जो कड़ी मेहनत करता है और हिम्मत नहीं हारता है सफलता उसके कदम चूमती है। ऐसी ही एक प्ररेणात्मक कहानी है बिहार के सिवान की बेटी की जिनका सफ़र दृढ़ संकल्प, खुद पर विश्वास और लगातार कड़ी मेहनत की मिसाल है। आस्था का परिवार चाहता था कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन उन्होंने सिविल सेवा में करियर बनाने का फ़ैसला किया। उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की और साथ ही BPSC की पढ़ाई भी शुरू कर दी। UPSC में कुछ रुकावटों का सामना करने के बाद, उन्होंने BPSC परीक्षा दी। आखिरकार आस्था ने अपने सपने को सच करके दिखाया।

परिवार का सपना था बेटी बने डॉक्टर

दिल्ली यूनिवर्सिटी के गार्गी कॉलेज से पढ़ाई की

बिहार के सीवान जिले की रहने वाली आस्था ने 7वीं क्लास में दिल्ली-NCR क्षेत्र में आने से पहले उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सिवान में पूरी की। उन्होंने 10वीं कक्षा में 98% और 12वीं कक्षा में 93% अंक हासिल किए। बाद में, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के गार्गी कॉलेज से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। कोविड महामारी के दौरान, वह एक साल के लिए बिहार लौट गईं और फिर अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए दिल्ली वापस आ गईं।

अफसर बनने के सपने को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास किया

आस्था का कहना है कि उनका परिवार चाहता था कि वह डॉक्टर बनें, वहीं उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया में अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी। उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए अफ़सर बनने के सपने को पूरा करने की कोशिश की। सिविल सेवा की तैयारी करने का उनका फ़ैसला उनके स्कूल के प्रिंसिपल और इकोनॉमिक्स व हिस्ट्री के शिक्षकों के प्रोत्साहन से प्रेरित था।

परिवार का सपना था बेटी बने डॉक्टर

UPSC के साथ BPSC था 'प्लान B'

आस्था ने बताया कि उन्होंने 2022 में उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। उन्होंने बिना किसी कोचिंग क्लास में ज्वाइन किए UPSC और BPSC दोनों परीक्षाओं की तैयारी की। लगभग दो साल तक, उन्होंने अनुशासन और निरंतरता के साथ UPSC का पूरा सिलेबस कवर किया। हालांकि उन्होंने 2023 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा के लिए गंभीरता से कोशिश की, लेकिन वह शुरुआती चरण (प्रीलिम्स) पास नहीं कर पाईं।

इसके बाद, उन्होंने 4-5 महीनों तक BPSC सिलेबस पर ध्यान दिया और अपने पहले ही प्रयास में BPSC परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली। उन्होंने प्रैक्टिस के लिए केवल एक टेस्ट सीरीज़ जॉइन की और दोनों परीक्षाओं की तैयारी के बीच संतुलन बनाए रखा।

परिवार का सपना था बेटी बने डॉक्टर

बैकअप प्लान के तौर पर B.Ed. की डिग्री भी हासिल की

आस्था ने बच्चों को पढ़ाने और 8-9 घंटे की सेल्फ-स्टडी (खुद से पढ़ाई) के बीच संतुलन बनाए रखा। तैयारी जारी रखते हुए, उन्होंने बैकअप प्लान के तौर पर B.Ed. की डिग्री भी हासिल की। ​​उनका कहना है कि सिर्फ़ किताबों के अलावा, पढ़ाई के लिए 8-9 घंटे देना, टेस्ट सीरीज़ देना और अख़बार पढ़ना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कोचिंग के बजाय सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया और UPSC सिविल सेवा के उम्मीदवारों को यह सलाह देती हैं:

अपना बेस और सिलेबस की जानकारी मज़बूत करने में 1.5 साल लगाएं, और खास तौर पर मेन्स की तैयारी पर ध्यान दें। हमेशा स्टैंडर्ड किताबों को प्राथमिकता दें और अख़बारों से अपडेट रहें। मौजूदा हालात को देखते हुए, 'प्लान B' का होना बहुत ज़रूरी है। कोई हॉबी (शौक) होना भी ज़रूरी है।

BPSC की परीक्षा पास करके रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर बनीं 

आस्था ने BPSC परीक्षा पास की और रूरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में 259वीं रैंक हासिल की। ​​उन्होंने सिलेक्शन प्रोसेस के तीनों चरणों प्रीलिमिनरी परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू को सफलतापूर्वक पास किया। पटना में BPSC ऑफिस में हुए इंटरव्यू के दौरान, वह उस दिन की पहली उम्मीदवार थीं। 17-18 मिनट के इंटरव्यू में उनके ऑप्शनल सब्जेक्ट और बिहार में ज़िला-स्तरीय शिक्षा नीतियों पर फोकस किया गया।

उन्हें बिहार रूरल डेवलपमेंट सर्विस (BRDS) के लिए चुना गया है। शुरुआत में, वह रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर (RDO) के तौर पर काम करेंगी। 1-2 साल की डिपार्टमेंटल ट्रेनिंग और सर्विस पूरी करने के बाद, उन्हें ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के पद पर प्रमोट किया जा सकता है। आज उनके पूरे परिवार को आस्था पर गर्व है, उनके दादाजी और पिताजी ने इस सफ़र में हमेशा उन्हें मोटिवेट किया।

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