दिल्ली-NCR के 50 गावों की बदलेगी किस्मत, यहां तैयार होगा मेगा अर्बन सेंटर, लोगों को मिलेगा रोजगार
Udaipur Times, Yamuna Expressway Master Plan 2041 : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के एक और जिले को हाइटेक बनाने की तैयारी मे जुटी हुई है। यमुना एक्सप्रेसवे के फेज-2 विकास के 'महायोजना/मास्टर प्लान 2041' के तहत 'हाथरस अर्बन सेंटर' को एक हाई-टेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन के रूप में डिजाइन किया जा रहा है।
बहुत ही जल्द यह इंडस्ट्रियल हब बनकर विकसित होगा जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। यीडा (YEDA) की ओर से विकसित की ओर से तैयार किए जा रहे चार प्रमुख अर्बन नोड्स (अलीगढ़, मथुरा, आगरा और हाथरस) में से हाथरस को प्रमुख इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में चुना गया है।
4 हजार हेक्टेयर में बसेगा नया हाथरस
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की ओर से इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए 50 गावों को अधिसूचित कर दिया गया है। इसका कुल क्षेत्रफल 4 हजार हेक्टेयर (10 एकड़) तक होगा। इस अत्याधुनिक शहर के नियोजन के लिए कंसल्टेंट कंपनी 'आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड' को नियुक्त किया गया है। जो जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक पर आधारित नक्शे से इसका सुनियोजित विकास सुनिश्चित कर रही है।
नए शहर के लिए तैयार हुआ मास्टर प्लान
RV इंजीनियरिंग कंसल्टेंट लिमिटेड को 9 महीनों के अंदर एक विस्तृत योजना तैयार करनी होगी। यह मास्टर प्लान साल 2041 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा और इसमें अगले 20 सालों के विकास का खाका तैयार किया जाएगा।
दिल्ली के नज़दीकी शहरों के मुकाबले हाथरस को क्यों चुना गया?
अधिकारियों का कहना है कि हाथरस में पहले से ही 10,000 से अधिक पंजीकृत MSME इकाइयां मौजूद हैं, हींग और गुलाल जैसे यहां के उत्पाद ODOP (ओल्ड टू ऑप) के लिए प्रसिद्ध हैं, और यह नोएडा हवाई अड्डे के कैचमेंट एरिया में स्थित है। इसके अलावा, हाथरस को आगरा के लिए एक सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे वहां औद्योगिक दबाव कम होगा और NH-93 और यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से कनेक्टिविटी का लाभ उठाया जा सकेगा।
रोजगार के नए अवसर
इस मास्टर प्लान के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, होजरी, कांच के मोती, पीतल के आभूषण, मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहन कंपोनेंट्स से जुड़े उद्योग स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा बाद के चरण में चिकित्सा उपकरण और बिजली ग्रिड निर्माण इकाइयां भी विकसित की जाएंगी। इन उद्योगों के शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही हाथरस के एमएसएमई सेक्टर और हींग व गुलाल बनाने वाले ओडीओपी कारीगरों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
इस योजना से किसे होगा फायदा?
इस परियोजना का सबसे ज्यादा फायदा स्थानीय एमएसएमई कारोबारियों, ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) निर्यातकों, औद्योगिक निवेशकों और स्थानीय युवाओं को मिलने की संभावना है। नए औद्योगिक क्लस्टर बनने से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, छोटे उद्योगों को बाजार मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि यह परियोजना हाथरस और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास का नया इंजन साबित होगी और इसे सिर्फ एक उपनगर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
