10 दिन में बदली किसान परिवार की किस्मत, एक बेटा बना टीचर तो दूसरे का भारतीय वायुसेना में हुआ चयन

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10 दिन में बदली किसान परिवार की किस्मत, एक बेटा बना टीचर तो दूसरे का भारतीय वायुसेना में हुआ चयन  

Udaipur Times, Success Story of Two brothers from Rajasthan : राजस्थान के अजमेर जिले के मनोहरपुरा क्षेत्र के सदापुर गांव के किसान गुमान गुर्जर के परिवार में पहली बार सरकारी नौकरी का सपना पूरा हुआ है। खास बात यह है कि परिवार के दो बेटों ने महज 10 दिनों के अंतराल में दो अलग-अलग सरकारी नौकरियां हासिल कर इतिहास रच दिया। बड़े बेटे धर्मराज गुर्जर का चयन राजस्थान थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा (Government Teacher) में हुआ, जबकि छोटे बेटे अर्जुन गुर्जर भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के ग्रुप 'एक्स' में चयनित हुए हैं।

10 दिन में मिली दो बड़ी खुशियां

गुमान गुर्जर ने बताया कि 1 जून 2026 को छोटे बेटे अर्जुन का भारतीय वायुसेना (Indian Airforce)  में चयन हुआ। इसके ठीक 10 दिन बाद 11 जून को बड़े बेटे धर्मराज ने सरकारी शिक्षक भर्ती परीक्षा (Government Teacher Recruitment Exam) पास कर ली। एक साथ मिली इन दो सफलताओं से पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।

गांव का पहला एयरफोर्स जवान (Air Force personnel) बना अर्जुन

अर्जुन गुर्जर को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह सदापुर गांव से भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) में चयनित होने वाले पहले युवक हैं। उनके चयन के बाद गांव में स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने उनकी सफलता का जश्न मनाया।

NDA की परीक्षा भी पास, अब अफसर बनने का लक्ष्य

भारतीय वायुसेना (Indian Airforce)  में चयन के साथ-साथ अर्जुन ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की लिखित परीक्षा भी पास कर ली है। उनका SSB इंटरव्यू 20 जुलाई को होना है। यदि वह इसमें सफल होते हैं तो सेना में अधिकारी बनने का सपना भी पूरा हो जाएगा।

पहले ही प्रयास में मिली सफलता

अर्जुन ने नागौर के पास कुचामन सिटी से 11वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद सीकर की एक डिफेंस अकादमी से तैयारी करते हुए पहले ही प्रयास में एयरफोर्स में चयन हासिल किया। वहीं, बड़े भाई धर्मराज ने भी पहली ही कोशिश में शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल की।

संयुक्त परिवार (Joint family) की मिसाल बना गुर्जर परिवार

गुमान गुर्जर का परिवार आज भी संयुक्त परिवार में रहता है। उनके पिता और उनके दो भाइयों का परिवार मिलकर करीब 200 बीघा जमीन पर खेती करता है। परिवार की सात पीढ़ियों में पहली बार सरकारी नौकरी मिलने से पूरे गांव में खुशी का माहौल है और दोनों भाइयों की सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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