उत्सव का आगाज़ 21 दिसम्बर को होगा मगर उत्सवी माहौल शिल्पग्राम परिसर में यौवन पर है।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आगामी 21 से 30 दिसम्बर तक शिल्पग्राम में राष्ट्रीय हस्त शिल्प एवं लोक कला उत्सव ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’ की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही है। उत्सव में भाग लेने के लिये शिल्पकारों का उदयपुर आगमन का दौर प्रारम्भ हो गया है।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आगामी 21 से 30 दिसम्बर तक शिल्पग्राम में राष्ट्रीय हस्त शिल्प एवं लोक कला उत्सव ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’ की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही है। उत्सव में भाग लेने के लिये शिल्पकारों का उदयपुर आगमन का दौर प्रारम्भ हो गया है।
केन्द्र निदेशक श्री फुरकरन ख़ान ने बताया कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, विकास आयुक्त हथकरघा, नई दिल्ली, राष्ट्रीय पटसन बोर्ड, ट्राइफेड तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों के सहयोग से आयोजित इस उत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के 700 लोक कलाकार व 800 शिल्पकार तथा व्यंजन के शिल्पी भाग शिकत करेंगे।
उत्सव की तैयारियाँ अंतिम चरणो में है। लिपाई पुताई और अलंकरणों से शिल्पग्राम की पारंपरिक आभा यहां आने वाले पर्यटकों को लुभा रही है। राजस्थान की रामा व सम झोंपड़ी हो या गुजरात के कच्छ अंचल की बन्नी झोंपड़ी का समूह, भुजोड़ी, लामड़िया व राठवा या गोवा की झोंपड़ियाँ कमोबेश समूचा शिल्पग्राम सौन्दर्य के यौवन का उन्मादित हो रहा है देश भर के कलाकारों और शिल्पकारों के लिये। मुक्ताकाशी रंगमंच ‘‘कलांगन’’ की सजावट के साथ शिल्पग्राम परिसर में विभिन्न जगहों पर लगाये द्वारों का शिल्पन नयनाभिराम बन सका है।
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उत्सव में भाग लेने के लिये शिल्पकारों का आगमन बुधवार से शुरू हुआ तथा सभी शिल्पकारों को आमंत्रण के साथ ही स्टाॅल का आवंटन किया जा चुका है। उत्सव की रौनक तथा कला प्रस्तुतियों के ट्रेलर के रूप लोग शिल्पग्राम के बंजारा रंगमंच पर दिन में चार बार होने वाली लोक कला प्रस्तुतियों को देखने के लिये बड़ी संख्या में सैलानी एकत्र हो रहे हैं।

