519 गांवों की चमकेगी किस्मत ! 12 इंडस्ट्रियल नोड और नए कारखानों से मिलेगा हजारों लोगों को रोजगार
Udaipur Times, Ganga Expressway to boost logistics in UP : 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाला साबित हो सकता है। मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला यह हाई-स्पीड कॉरिडोर (High Speed Corridor) न सिर्फ यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाएगा, बल्कि इसके किनारे औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, रियल एस्टेट और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे राज्य में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों का नया केंद्र बनकर उभरेगा।
12 जिलों को मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी (High-speed connectivity)
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 जिलों को जोड़ता है। छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे को भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसकी डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रति घंटा रखी गई है, जिससे मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा पहले की तुलना में काफी कम समय में पूरी हो सकेगी।
519 गांवों में विकसित होंगे 12 इंडस्ट्रियल नोड (Industrial Node)
गंगा एक्सप्रेसवे को केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि एक्सप्रेसवे आधारित औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे 12 इंडस्ट्रियल नोड विकसित किए जाएंगे, जो 12 जिलों के 519 गांवों में फैले होंगे। इन परियोजनाओं के लिए करीब 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।
सरकार को अब तक लगभग 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इन प्रस्तावों के जरिए करीब 47 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इंडस्ट्रियल नोड में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, एमएसएमई क्लस्टर और अन्य औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
हर जिले की क्षमता के अनुसार होगा विकास
सरकार हर जिले की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इंडस्ट्रियल नोड विकसित कर रही है। मेरठ और हापुड़ को मैन्युफैक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक्स हब, प्रतापगढ़ को फूड प्रोसेसिंग, हरदोई और शाहजहांपुर को औद्योगिक इकाइयों, जबकि उन्नाव, रायबरेली और अन्य जिलों को वेयरहाउसिंग और एमएसएमई आधारित उद्योगों के लिए विकसित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्थानीय उद्योगों को नई पहचान मिलेगी और छोटे शहरों में भी बड़े निवेश आकर्षित होंगे।
लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर (Logistics and Warehousing Sector) को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) विकसित किए जा रहे हैं। इनमें आधुनिक वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग सेंटर और वितरण केंद्र बनाए जाएंगे।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बदायूं, शाहजहांपुर और संभल जैसे जिले भविष्य के बड़े वेयरहाउसिंग हब बन सकते हैं। वहीं प्रतापगढ़, उन्नाव और हापुड़ में कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित होगा, जिससे कृषि और खाद्य उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
रियल एस्टेट बाजार (Real estate market) में आएगी नई तेजी
प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी कंपनियों का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर का नया ग्रोथ कॉरिडोर बनेगा। अब तक राज्य में लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्रमुख रियल एस्टेट बाजार रहे हैं, लेकिन अब मेरठ से प्रयागराज तक का पूरा कॉरिडोर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
मेरठ में दिल्ली-एनसीआर का विस्तार देखने को मिलेगा, जबकि हापुड़, उन्नाव, रायबरेली, अमरोहा और प्रतापगढ़ जैसे शहरों में सस्ती आवासीय परियोजनाएं, प्लॉटेड डेवलपमेंट और इंटीग्रेटेड टाउनशिप तेजी से विकसित होने की संभावना है।
मेरठ, कानपुर और प्रयागराज बन सकते हैं नए ऑफिस हब (New office hubs)
बेहतर सड़क संपर्क के कारण मेरठ, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में कॉर्पोरेट कंपनियों की रुचि बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में ये शहर दिल्ली-एनसीआर के साथ सेकेंडरी ऑफिस हब के रूप में विकसित हो सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
दूसरे एक्सप्रेसवे और फ्रेट कॉरिडोर से भी जुड़ेगा नेटवर्क
गंगा एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC), नेशनल वॉटरवे-1 और यमुना एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं से भी इसका बेहतर तालमेल होगा। इससे माल परिवहन की लागत घटेगी और सप्लाई चेन पहले से अधिक मजबूत होगी।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बड़ा बूस्ट
औद्योगिक क्लस्टर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस और फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के विकास से हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। एमएसएमई सेक्टर को भी नई बाजार पहुंच मिलेगी, जिससे छोटे उद्योगों को बड़ा फायदा होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार एक्सप्रेसवे शुरू होने के शुरुआती तीन वर्षों में सबसे पहले वेयरहाउसिंग और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट विकसित होंगे। इसके बाद अगले दो से पांच वर्षों में आवासीय और व्यावसायिक रियल एस्टेट परियोजनाओं में तेजी देखने को मिल सकती है।
यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया इंजन
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों को एक मजबूत आर्थिक गलियारे में बदल देगा। बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश, आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, नए शहरों का विकास और बढ़ती आवासीय मांग राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे। ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक और औद्योगिक ग्रोथ इंजन के रूप में उभर सकता है।
