हरियाणा में इन किसानों की चमकेगी किस्मत ! 26 करोड़ की लागत से यहां बनेगा आधुनिक जूस प्लांट
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा में किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा के सिरसा का किन्नू अब वैश्विक पहचान के साथ बाजार में उतरेगा। यहां के किन्नू को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल गया है। यह उपलब्धि गांव खारी सुरेरां स्थित एक कंपनी के विशेष प्रयासों से हासिल हुई है।
GI टैग मिलने के बाद अब सिरसा का किन्नू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान के साथ बिकेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय हरियाणा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे प्रदेश के किसानों की वर्षों की मेहनत, उच्च गुणवत्ता और समृद्ध बागवानी परंपरा का सम्मान बताया है।
13 हजार हेक्टेयर में खेती, हर साल 1.80 लाख मीट्रिक टन पैदावार
सिरसा हरियाणा का सबसे बड़ा किन्नू उत्पादक क्षेत्र है। यहां करीब 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर किन्नू के बाग लहलहा रहे हैं। जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद के अनुसार, जिले में प्रतिवर्ष 1 लाख 80 हजार 508 मीट्रिक टन किन्नू का उत्पादन हो रहा है। जिले में सबसे ज्यादा किन्नू के बाग डबवाली खंड में लगे हुए हैं। विशेष जलवायु और मिट्टी के कारण यहां का किन्नू चमकदार, रसीला और स्वादिष्ट होता है।
GI टैग से कैसे बदलेगी किसानों की तकदीर
नकली ब्रांडिंग पर लगेगी पूरी रोक:अब केवल सिरसा क्षेत्र में निर्धारित मानकों के तहत उगाए गए किन्नू को ही आधिकारिक रूप से 'सिरसा किन्नू' के नाम से बेचा जा सकेगा। इससे बाजार में नकली उत्पादों और गलत ब्रांडिंग पर रोक लगेगी।
ब्रांड वैल्यू और वैश्विक बाजार: GI टैग एक तरह का प्योरिटी सर्टिफिकेट है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सिरसा के किन्नू की साख बढ़ेगी, जिससे सीधे निर्यात के रास्ते खुलेंगे।
यह होता है GI टैग?
यह टैग किसी उत्पाद की उस खास विशेषता, स्वाद या गुणवत्ता के लिए दिया जाता है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र की वजह से होती है। यह उत्पाद को कानूनी संरक्षण देता है।
हरियाणा का पहला टैग
सिरसा के किन्नू को स्वतंत्र GI टैग मिला है। इससे पहले बासमती चावल के लिए हरियाणा और पंजाब को संयुक्त रूप से और फुलकारी के लिए संयुक्त टैग मिला हुआ है।
सिरसा में 26.39 करोड़ से लगेगा आधुनिक जूस प्लांट
हरियाणा सरकार बजट घोषणा के तहत सिरसा के वीटा मिल्क प्लांट परिसर में एक अत्याधुनिक किन्नू जूस प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने जा रही है। लगभग 26.39 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह प्लांट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर तैयार होगा, जिसके लिए 3 एकड़ जमीन आवंटित की जा चुकी है।
इस प्लांट में हर साल 9 से 10 हजार मीट्रिक टन किन्नू और लगभग 12 हजार मीट्रिक टन अन्य फलों की प्रोसेसिंग की जा सकेगी। प्लांट में तैयार होने वाले बेहतरीन जूस को सरकार अपने स्थापित वीटा ब्रांड के तहत बाजार में उतारेगी।
