सरकार पुराने वाहनों के खरीद-बिक्री के दौरान ओनरशिप की प्रक्रिया को सरल बनाने पर कर रही है विचार

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सरकार पुराने वाहनों के खरीद-बिक्री के दौरान ओनरशिप की प्रक्रिया को सरल बनाने पर कर रही है विचार

Vehicle ownership transfer rule: सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री (MoRTH) हर्ष मल्होत्रा ​​के अनुसार, केंद्र सरकार पुरानी गाड़ियों (used vehicles) के मालिकाना हक (ownership) को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है। उन्होंने माना कि इस प्रक्रिया में खरीदारों और विक्रेताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि अलग-अलग राज्यों द्वारा परिवहन नीतियों को लागू करने के तरीकों में अंतर होना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

MoRTH, EVOI 2026 रिपोर्ट के सुझावों का अध्ययन करेगा 

रिपोर्ट में पाया गया कि मालिकाना हक ट्रांसफर करने का खर्च, आधिकारिक फीस से लगभग 10 गुना तक हो सकता है। पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक ट्रांसफर करने के मुद्दे पर हर्ष मल्होत्रा ​​का बयान। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर होती है
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मल्होत्रा ​​नई दिल्ली में IndiaTech.Org और Consumer VOICE द्वारा जारी 'ईज़ ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स' (EVOI) 2026 रिपोर्ट के लॉन्च के मौके पर बोल रहे थे। रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि "इसमें कोई शक नहीं" है कि गाड़ी का मालिकाना हक ट्रांसफर करने में कई दिक्कतें आती हैं। EVOI 2026 रिपोर्ट में पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है और इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने के सुझाव दिए गए हैं।

सरकार गाड़ियों से जुड़ी सेवाओं के लिए नीतियां बना रही

हालांकि सरकार गाड़ियों से जुड़ी सेवाओं के लिए नीतियां बना रही है, लेकिन मल्होत्रा ​​ने बताया कि इन नीतियों को ज़मीनी स्तर पर लागू करना राज्यों पर निर्भर करता है, और हर राज्य के अपने अलग प्रशासनिक नियम हो सकते हैं। मल्होत्रा ​​के अनुसार, इसी वजह से केंद्र सरकार और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल होना बहुत ज़रूरी है।

मल्होत्रा ​​ने रिपोर्ट तैयार करने वालों से कहा कि MoRTH उनके सुझावों का अध्ययन करेगा और संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करेगा कि क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने उनसे अपने सुझाव मंत्रालय को भेजने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि सरकार तकनीक पर आधारित ऐसे बदलावों के लिए तैयार है, जिनसे लोगों की आवाजाही, जीवन-यापन और व्यापार करना आसान हो सके। हालांकि, मल्होत्रा ​​ने ट्रांसफर नियमों में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की और न ही इन सुझावों पर अमल करने के लिए कोई समय-सीमा तय की। उन्होंने परिवहन सेवाओं को वाहन मालिकों के लिए सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए 'डिजिटलीकरण' (digitisation) पर ज़ोर दिया।

पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक ट्रांसफर करने का खर्च

अलग-अलग राज्यों और यहां तक ​​कि अलग-अलग RTOs में भी शुल्क (charges) काफी अलग-अलग हो सकते हैं। EVOI 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में किसी गाड़ी का मालिकाना हक ट्रांसफर करने का खर्च, आधिकारिक फीस से लगभग 10 गुना तक हो सकता है। कुछ जगहों पर तो यह खर्च 14,000 रुपये तक भी पहुंच जाता है। इसमें 15 राज्य शामिल थे, जो मिलकर भारत के संगठित 'यूज्ड-कार' (पुरानी कारों के) बाजार का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा खर्च के कारणों में मैनुअल वेरिफिकेशन, बिचौलियों की फीस और अलग-अलग क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) की अलग-अलग जरूरतें शामिल हैं।

पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने का खर्च बिहार में सबसे ज्यादा

रिपोर्ट के मुताबिक, पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक (ओनरशिप) को ट्रांसफर करने का खर्च बिहार में सबसे ज्यादा है; मुजफ्फरपुर में यह 13,000 से 14,000 रुपये तक है। तमिलनाडु में, लोगों ने होसुर और कृष्णगिरि RTO में 7,000 से 8,000 रुपये तक का भुगतान किया, जबकि आधिकारिक फीस लगभग 800 रुपये ही है। EVOI 2026 अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में यह खर्च 3,000 से 3,600 रुपये के बीच रहा। इन आंकड़ों में आधिकारिक फीस और एजेंटों का शुल्क दोनों शामिल हैं। हालांकि, ये आंकड़े लोगों द्वारा बताए गए खर्चों पर आधारित हैं और हर राज्य के लिए कोई तय दर नहीं हैं।

सर्वे में शामिल सभी लोगों ने बताया कि मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए उन्हें एजेंटों या बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ा। सर्वे में यह भी पता चला कि 39 प्रतिशत लोग गाड़ी का लेन-देन पूरा करने के बाद भी अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के ट्रांसफर होने का इंतजार कर रहे थे, जबकि 63 प्रतिशत लोग यह अंदाजा नहीं लगा पाए कि ट्रांसफर का कुल खर्च कितना आएगा।

ईज ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स (Ease of Vehicle Ownership Index) 2026

इस इंडेक्स में किसी भी राज्य को 10 में से 6 से ज्यादा अंक नहीं मिले।
आंध्र प्रदेश 10 में से 5.91 अंकों के साथ इस इंडेक्स में सबसे ऊपर रहा, जबकि केरल 5.74 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, उत्तर प्रदेश 2.47 अंकों के साथ सबसे नीचे रहा; बिहार और पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा, जिन्हें क्रमशः 2.51 और 2.56 अंक मिले। रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश को मिले अच्छे स्कोर का कारण वहां का बायोमेट्रिक-आधारित ओनरशिप ट्रांसफर सिस्टम है, जिससे RTO के दफ्तर खुद जाकर काम करवाने की जरूरत कम हो गई है।

 

IndiaTech.Org और Consumer VOICE ने सुधार के लिए आठ उपाय सुझाए

IndiaTech.Org और Consumer VOICE ने सुधार के लिए आठ उपाय सुझाए हैं। इनमें राज्यों के बीच मालिकाना हक ट्रांसफर करने की एक मानक प्रक्रिया, वाहनों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड, लोन चुकाने के बाद हाइपोथेकेशन (गिरवी) का अपने आप हटना, और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के लिए एक समान नियम शामिल हैं। 2026 की रिपोर्ट में दिए गए अन्य सुझावों में शामिल हैं: राज्यों के बीच टैक्स से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए एक साझा रोड टैक्स ढांचा, कानूनी और सर्विस चार्ज दोनों के लिए एक एकीकृत भुगतान प्रणाली, और सर्विस देने के लिए तय समय-सीमा। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि सर्विस पूरी करने की समय-सीमा 24 घंटे से कम होनी चाहिए।

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