हरियाणा में ICE प्लांट एवं कोल्ड स्टोरेज लगाने पर सरकार देगी पैसा ! ऐसे मिलेगा लाभ
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से सशक्त बनाने और मत्स्य किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आइस प्लांट एवं कोल्ड स्टोरेज की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। योजना के अंतर्गत न्यूनतम 30 टन क्षमता के आइस प्लांट अथवा कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने वाले पात्र लाभार्थियों को अनुदान प्रदान किया जाएगा। यह योजना मछलियों के सुरक्षित भंडारण, गुणवत्ता संरक्षण तथा विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योजना के तहत लाभार्थी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आइस प्लांट अथवा कोल्ड स्टोरेज के संचालन, रखरखाव एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी वह स्वयं वहन करेगा। साथ ही इकाई को नियमित रूप से चालू रखना भी अनिवार्य होगा। लाभार्थी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि केंद्रीय सहायता से स्थापित इकाई में उत्पादित बर्फ मछुआरों और मत्स्य किसानों को उचित एवं रियायती दरों पर उपलब्ध करवाई जाए, जिससे उन्हें सीधे तौर पर लाभ मिल सके।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत स्थापित की जाने वाली इस इकाई के लिए सरकार द्वारा आकर्षक अनुदान का प्रावधान किया गया है। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाएगा। योजना के अनुसार 30 टन क्षमता वाले आइस प्लांट/स्टोरेज की इकाई लागत लगभग 120 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक के पास परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) होना आवश्यक है। इसके अलावा लाभार्थी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अथवा स्व-निहित प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। यदि परियोजना पट्टे की भूमि पर स्थापित की जानी है तो पट्टे की अवधि कम से कम 10 वर्ष होना अनिवार्य है। भूमि संबंधी सभी रिकॉर्ड, स्वामित्व अथवा वैध पट्टा दस्तावेज भी आवेदन के साथ प्रस्तुत करने होंगे।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि आवेदन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), बैंक खाते का विवरण, पैन कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, जीएसटी संबंधित दस्तावेज, परियोजना स्थल के फोटो तथा अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र जमा करवाने होंगे।
इसके अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विद्युत विभाग, अग्निशमन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृति और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना भी जरूरी होगा। उन्होंने बताया कि इस योजना से मत्स्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का विकास होगा और मछलियों के संरक्षण एवं विपणन में सुधार आएगा। इससे मत्स्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा तथा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे
