धूप में अब नहीं तपेगा घर ! खत्म होगी AC की जरूरत, वैज्ञानिकों ने तैयार किया ‘कूलिंग सीमेंट’

 | 
धूप में अब नहीं तपेगा घर ! खत्म होगी AC की जरूरत, वैज्ञानिकों ने तैयार किया ‘कूलिंग सीमेंट’

Udaipur Times, Supercool Cement Work : चीन के वैज्ञानिकों ने ऐसे सीमेंट का निर्माण किया है जिससे आपको घरों को ठंडा करने के लिए एयर कंडीशनर की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह ऐसा विशेष सीमेंट विकसित किया है, जो तेज धूप में भी पारंपरिक सीमेंट की तुलना में 26 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रह सकता है। 

धूप को सोखने के बजाय वापस भेजेगा सीमेंट

चीन के दक्षिण-पूर्व विश्वविद्यालय (Southeast University) के शोधकर्ताओं ने सीमेंट की रासायनिक संरचना में बदलाव कर ऐसा पदार्थ तैयार किया है, जो सूर्य की किरणों को अवशोषित करने के बजाय उन्हें परावर्तित (रिफ्लेक्ट) कर देता है। यह तकनीक ‘रेडिएटिव कूलिंग’ सिद्धांत पर आधारित है। इसमें सीमेंट सूर्य के प्रकाश को वापस अंतरिक्ष की ओर भेजता है और साथ ही अवरक्त (इन्फ्रारेड) विकिरण भी उत्सर्जित करता है, जिससे उसकी सतह का तापमान कम बना रहता है।

26 डिग्री तक ठंडा रहा नया सीमेंट

मैदानी परीक्षणों में पाया गया कि नए सीमेंट की सतह का तापमान सामान्य सीमेंट की तुलना में 26 डिग्री सेल्सियस तक कम था। इतना ही नहीं, यह आसपास के वातावरण से भी करीब 5.4 डिग्री सेल्सियस ठंडा बना रहा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे भवनों के अंदर का तापमान भी कम रहेगा और एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता काफी हद तक घट सकती है।

मजबूती में भी नहीं कोई कमी

शोध के दौरान यह भी पाया गया कि नया सीमेंट केवल ठंडा ही नहीं रहता, बल्कि मजबूती के मामले में भी पारंपरिक सीमेंट के बराबर है। यह घिसाव, अल्ट्रावॉयलेट किरणों, संक्षारणकारी रसायनों और अत्यधिक ठंड-गर्मी जैसी परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है।

25% कम होगा कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक का एक और बड़ा फायदा पर्यावरण से जुड़ा है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस सीमेंट के उत्पादन में पारंपरिक सीमेंट की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। गौरतलब है कि दुनिया भर में सीमेंट और कंक्रीट उद्योग कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है। ऐसे में यह तकनीक जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में अहम भूमिका निभा सकती है।

शहरों में घटेगा ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सीमेंट का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया तो शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को कम किया जा सकेगा। वर्तमान में कंक्रीट और डामर की सतहें दिनभर गर्मी सोखकर रात में छोड़ती हैं, जिससे शहरों का तापमान बढ़ जाता है। नई तकनीक से न केवल इमारतें ठंडी रहेंगी, बल्कि पूरे शहरी क्षेत्र का तापमान नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

विकासशील देशों के लिए वरदान

जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है और एयर कंडीशनिंग सुविधाएं हर किसी की पहुंच में नहीं हैं, वहां यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। इससे बिना अतिरिक्त बिजली खर्च किए भवनों को ठंडा रखा जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक निर्माण उद्योग में बड़ा बदलाव ला सकती है और ऊर्जा बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News