मरीजों के बीच पनपा IAS का सपना, UPSC में पहले ही प्रयास में दूसरा स्थान हासिल कर डॉक्टर से IAS अधिकारी बनीं डॉ रेनू राज
Udaipur Times, IAS Dr Renu Raj : जब वे हाथ, जो कभी मरीजों की नब्ज टटोलते थे, सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करने लगें, तो यह कहानी एक खास अहमियत रखती है। डॉ. रेनू राज की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने महसूस किया कि जहां मेडिकल इलाज किसी एक व्यक्ति को ठीक कर सकता है, वहीं पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन के क्षेत्र में कदम रखना जरूरी है। इसी सोच के चलते उन्होंने UPSC परीक्षा में ऑल-इंडिया रैंक 2 हासिल की।
रेनू राज केरल कैडर की IAS अधिकारी हैं; वह कोट्टायम की रहने वाली हैं। उन्होंने कोट्टायम के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से MBBS किया और बाद में JNU से पब्लिक मैनेजमेंट में MA की डिग्री ली। उन्होंने 2014 में सिविल सेवा परीक्षा दी और अपने पहले ही प्रयास में दूसरा स्थान हासिल किया। वह 2015 बैच की अधिकारी हैं।

मरीजों के बीच पनपा एक सपना
अपनी इंटर्नशिप के दौरान, रेनू का अक्सर समाज के सबसे कमजोर वर्गों के मरीजों से सामना होता था। उनकी बीमारियों की जड़ अक्सर गरीबी और एक विफल व्यवस्था में होती थी। हालांकि चिकित्सा का अपना महत्व है, लेकिन असली समाधान व्यवस्था में सुधार करने में था और यहीं से सिविल सेवा में करियर बनाने का बीज पड़ा।
तैयार की रणनीति
रेनू ने सालों तक खुद को किताबों में नहीं उलझाए रखा; माना जाता है कि उन्होंने लगभग एक साल तक पूरी लगन और एकाग्रता के साथ तैयारी की। अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ-साथ, वह रोजाना तीन से छह घंटे पढ़ाई करती थीं—छुट्टियों के दिनों में या परीक्षा के करीब आने पर यह समय बढ़कर दस से बारह घंटे तक हो जाता था। खास बात यह है कि उन्होंने कभी भी अपनी नींद से समझौता नहीं किया; सात घंटे की नींद और समय पर भोजन करना उनकी प्राथमिकता थी। एक डॉक्टर होने के नाते, वह समझती थीं कि थका हुआ दिमाग जानकारी को याद रखने में संघर्ष करता है।

मेडिकल साइंस की जगह मलयालम साहित्य को चुना
जहाँ ज्यादातर डॉक्टर अपने वैकल्पिक विषय (optional subject) के रूप में मेडिकल साइंस चुनते हैं, वहीं रेनू ने मलयालम साहित्य को चुना। उन्हें अपनी मातृभाषा से गहरा लगाव था, और साहित्य पढ़ने से उन्हें तकनीकी विषयों की कठिन पढ़ाई से एक सुखद राहत मिलती थी। यह चुनाव उनके प्रशासनिक करियर के लिए भी फायदेमंद साबित हुआ।
मुन्नार में लिए गए कड़े फैसले
अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, रेनू ने त्रिशूर में सब-कलेक्टर के रूप में काम किया। इसके बाद वह मुन्नार से जुड़े क्षेत्र, देवीकुलम की पहली महिला सब-कलेक्टर बनीं। मुन्नार लंबे समय से जटिल भूमि विवादों से जूझ रहा है। वहां अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई ने काफी सुर्खियां बटोरीं, जिसके चलते स्थानीय राजनीतिक नेताओं के साथ उनका टकराव भी हुआ। इसके बावजूद, वह अपने रुख पर अडिग रहीं। मार्च 2022 में, उन्होंने अलाप्पुझा की 53वीं जिला कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाला जिला कलेक्टर के तौर पर यह उनकी पहली पोस्टिंग थी।
हार्वर्ड तक का सफर
रेणु वर्तमान में 'फुलब्राइट-नेहरू मास्टर्स फेलो' हैं और हार्वर्ड से पब्लिक हेल्थ में मास्टर्स डिग्री कर रही हैं। उनका लक्ष्य प्रशासन में अपने अनुभव और मेडिकल बैकग्राउंड को मिलाकर स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच को बढ़ाना है। इससे पहले, उन्होंने केरल में 'अनुसूचित जनजाति विकास विभाग' के निदेशक के रूप में काम किया, जहां उन्होंने हजारों आदिवासी बस्तियों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों की देखरेख की।

उम्मीदवारों के लिए सीख
एक साक्षात्कार में, रेणु ने कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। पहली बात, अपने उद्देश्य को लेकर स्पष्ट रहें; जो लोग वास्तव में यह समझते हैं कि वे अधिकारी क्यों बनना चाहते हैं, उन्हें पढ़ाई के लिए लंबी और कठिन रातें भी बोझ नहीं लगेंगी। दूसरी बात, ऐसे विषय चुनें जिनमें आपकी सच में रुचि हो—यह जरूरी नहीं है कि आप उन्हीं विषयों को चुनें जो आपने अपनी अंडरग्रेजुएट डिग्री के दौरान पढ़े थे।
तीसरी बात, अपनी नींद या स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें; थका हुआ शरीर लंबे समय तक चलने वाले किसी बड़े लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकता। अंत में, अपनी पढ़ाई के साथ-साथ रोज लिखने का अभ्यास करें। अक्सर यही बात 'मेन्स' परीक्षा में सफलता तय करने वाला अहम कारक साबित होती है।