किसानों की आमदनी में अब होगी बढ़ोतरी, सरकार ने शुरु की ये नई योजना ?

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किसानों की आमदनी में अब होगी बढ़ोतरी, सरकार ने शुरु की ये नई योजना ?

Udaipur Times, GOBARdhan Scheme : किसानों  के लिए अच्छी खबर आई है। केंद्र सरकार ने देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गोबरधन योजना को मंजूरी दे दी है। जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट ने 23,731 करोड़ रुपये के बजट वाली नेशनल यूनिफाइड स्कीम 'गोबरधन' को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू CBG उत्पादन को करीब दस गुना तक बढ़ाना है।

मिली जानकारी के अनुसार, सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि इस योजना के जरिए स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिले, ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए साधन विकसित हों और जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन हो सके। जैसा की बताया जा रहा है कि 10 अगस्त को विश्व जैव-ईंधन दिवस के अवसर पर 'संपूर्ण गोबरधन योजना' की शुरुआत की जा सकती है।

जाने क्या है GOBARdhan योजना?

GOBARdhan (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना केंद्र सरकार की एक ऐसी पहल है। जिसे साल 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य गांवों में उपलब्ध गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलना है। इसके माध्यम से जैविक कचरे से बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद तैयार की जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा होते हैं।

इस योजना का क्या है उद्देश्य?

जानकारी के अनुसार, गोबरधन योजना का मुख्य लक्ष्य देश में घरेलू CBG उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। इसके अलावा योजना के जरिए निजी निवेश को बढ़ावा देना और देश में एक मजबूत सर्कुलर बायो-इकोनॉमी तैयार करना भी शामिल है। सरकार का मानना है कि बेहतर खरीद व्यवस्था, स्थिर कीमतें, पूंजी सहायता, पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर, आसान ऋण सुविधा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से CBG सेक्टर को मजबूती मिलेगी। 

किसानों और देश को कैसे होगा फायदा?

मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को कई फायदे मिलने की उम्मीद है। गोबर और कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल कर किसान अतिरिक्त आय कमा सकेंगे। इसके अलावा जैविक खाद की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खेती में भी मदद मिलेगी। CBG के बढ़ते उत्पादन से प्राकृतिक गैस की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी और आयातित जीवाश्म ईंधन पर देश की निर्भरता कम हो सकती है।

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