बरेली से झांसी का सफर होगा बिल्कुल आसान ! 600 KM लंबा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर 7 एक्सप्रेसवे से बढ़ाएगा कनेक्टिविटी

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बरेली से झांसी का सफर होगा बिल्कुल आसान ! 600 KM लंबा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर 7 एक्सप्रेसवे से बढ़ाएगा कनेक्टिविटी

Udaipur Times, North-South Corridor : उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए करीब 600 किलोमीटर लंबे नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। बरेली से ललितपुर तक प्रस्तावित यह कॉरिडोर रुहेलखंड, पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के साथ कई प्रमुख एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी देने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। कॉरिडोर के पूरा होने के बाद बरेली से आगरा, झांसी और ललितपुर की यात्रा का समय मौजूदा मार्गों की तुलना में कम होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरेली से झांसी की दूरी करीब 5 घंटे और बरेली से ललितपुर की दूरी लगभग 6 से 6.5 घंटे में तय करने का लक्ष्य रखा गया है।

बरेली से ललितपुर तक बनेगा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े एक्सप्रेसवे और हाईवे प्रोजेक्ट पर काम हुआ है। गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। अब इन प्रमुख मार्गों को आपस में जोड़ने और नए क्षेत्रों तक तेज सड़क संपर्क पहुंचाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। 

इसी कड़ी में करीब 600 किलोमीटर लंबा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर प्रस्तावित है। इसे बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर के नाम से भी जाना जा रहा है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में स्थित रुहेलखंड क्षेत्र को मध्य और दक्षिणी हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड से जोड़ना है। कॉरिडोर बरेली से शुरू होकर बदायूं, कासगंज, एटा, हाथरस, आगरा और झांसी होते हुए ललितपुर तक जाने का प्रस्ताव है।

कई जिलों से होकर गुजरेगा कॉरिडोर

यह परियोजना किसी एक नए एक्सप्रेसवे के बजाय मौजूदा सड़कों और नए सड़क मार्गों के नेटवर्क को विकसित और अपग्रेड करने से जुड़ी है। इसके जरिए बरेली, बदायूं, कासगंज, एटा, हाथरस, आगरा, झांसी और ललितपुर समेत कई जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। 

ललितपुर के जरिए यह मार्ग उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश से भी जोड़ने में मदद कर सकता है।लंबी दूरी के वाहनों को शहरों के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से बचाने के लिए प्रमुख शहरों और कस्बों में बाईपास तथा फ्लाईओवर विकसित करने की योजना भी बताई गई है। इससे मुख्य शहरों के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम करने और कॉरिडोर पर चलने वाले वाहनों को अपेक्षाकृत सुगम मार्ग उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

बरेली से आगरा पहुंचने में लगेंगे अब करीब 4 घंटे

कॉरिडोर के तैयार होने के बाद बरेली से आगरा के बीच सफर का समय भी कम होने की उम्मीद है। मौजूदा सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में कई बार करीब 6 घंटे तक का समय लग जाता है। प्रस्तावित कॉरिडोर के जरिए यह सफर करीब 4 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य बताया जा रहा है। हालांकि वास्तविक यात्रा समय सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, वाहनों की गति और कॉरिडोर के अलग-अलग हिस्सों के पूरा होने पर निर्भर करेगा। 

बरेली से झांसी के बीच भी यात्रा समय में बड़ी कमी आने की संभावना है। अभी इस रूट पर सफर करने में करीब 10 से 11 घंटे तक लग सकते हैं। कॉरिडोर के पूरी तरह विकसित होने के बाद इसे करीब 5 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। इसी तरह बरेली से ललितपुर की यात्रा, जिसमें मौजूदा मार्गों से करीब 12 घंटे तक लग सकते हैं, लगभग 6 से 6.5 घंटे में पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

7 प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा कॉरिडोर

नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इसकी अलग-अलग एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी बताई जा रही है। प्रस्तावित नेटवर्क के जरिए उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों को पहले से मौजूद और विकसित किए जा रहे प्रमुख एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इससे कॉरिडोर सिर्फ बरेली से ललितपुर के बीच यात्रा का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच लंबी दूरी की कनेक्टिविटी का हिस्सा बन सकता है। 

इस नेटवर्क के जरिए गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत कुल 7 प्रमुख एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी देने की योजना बताई गई है। इससे इन एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए कई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकते हैं।

दिल्ली-NCR तक पहुंचना भी हो सकता है आसान

नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का फायदा केवल बरेली और ललितपुर के बीच सफर करने वाले लोगों को ही नहीं मिलेगा। इसके जरिए रुहेलखंड और बुंदेलखंड को पश्चिमी यूपी तथा दिल्ली-एनसीआर की ओर जाने वाले प्रमुख सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।बरेली, बदायूं और कासगंज जैसे जिलों के लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद दिल्ली-एनसीआर की तरफ जाना आसान हो सकता है। वहीं, यमुना एक्सप्रेसवे से कनेक्शन मिलने पर आगरा और मथुरा की ओर से नोएडा तथा नोएडा एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी फायदा मिल सकता है। इस तरह कॉरिडोर कई अलग-अलग सड़क मार्गों को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम कर सकता है।

बुंदेलखंड से रुहेलखंड तक मजबूत होगी कनेक्टिविटी

फिलहाल बुंदेलखंड क्षेत्र के कई जिलों से उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों तक आने-जाने में लंबा समय लगता है। नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के विकसित होने के बाद झांसी और ललितपुर जैसे जिलों से बरेली, बदायूं और आसपास के क्षेत्रों तक सीधा और बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई को भी फायदा हो सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क से कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और अन्य माल को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचाने में समय कम होने की संभावना है। इसके अलावा कॉरिडोर से जुड़े शहरों और कस्बों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तराखंड जाना भी होगा आसान 

इस कॉरिडोर के जरिए बुंदेलखंड और झांसी-ललितपुर क्षेत्र से बरेली तक पहुंच आसान होने के बाद उत्तराखंड की ओर जाने वाले यात्रियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है। बरेली उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों में से एक है। बरेली से रुद्रपुर की ओर एक्सप्रेसवे की योजना और मौजूदा नैनीताल हाईवे जैसे मार्गों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी बनने पर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान हो सकती है। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तार देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से हरिद्वार और ऋषिकेश की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी सड़क नेटवर्क के विकल्प बढ़ सकते हैं।

यूपी के सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई कनेक्टिविटी

नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने वाली बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। बरेली से शुरू होकर ललितपुर तक जाने वाला यह नेटवर्क एक तरफ रुहेलखंड और पश्चिमी यूपी को जोड़ेगा, वहीं दूसरी तरफ झांसी और बुंदेलखंड के रास्ते मध्य प्रदेश तक पहुंच बनाएगा। अगर प्रस्तावित कनेक्टिविटी और एक्सप्रेसवे लिंक योजना तय स्वरूप में विकसित होती है, तो इससे लंबी दूरी के यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन को भी फायदा मिल सकता है। साथ ही दिल्ली-एनसीआर, आगरा, लखनऊ, बुंदेलखंड और उत्तराखंड की ओर जाने वाले मार्गों के बीच बेहतर इंटरकनेक्शन तैयार होने की उम्मीद है।

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