बिहार से बंगाल का सफर होगा बिल्कुल आसान ! जल्द तैयार होगा ये फोरलेन हाईवे, देखें पूरा मास्टर प्लान ?
Udaipur Times, Bihar-West Bengal Highway : बिहार से पश्चिम बंगाल और आगे सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अहम सड़क परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत 31.2 किलोमीटर लंबा फोरलेन हाईवे बनाया जाएगा। यह सड़क बिहार के गलगलिया से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के पानीटंकी और खारीबारी होते हुए बागडोगरा तक जाएगी।
इस नए हाईवे से बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क को नया विकल्प मिलने की उम्मीद है। परियोजना को खास तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रणनीतिक महत्व को देखते हुए अहम माना जा रहा है।
रु2,077 करोड़ से बनेगा नया फोरलेन हाईवे
इस सड़क परियोजना के लिए करीब रु2,077.18 करोड़ की लागत मंजूर किए जाने की जानकारी दी गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस परियोजना की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए साझा की है। प्रस्तावित फोरलेन सड़क बिहार के गलगलिया से पश्चिम बंगाल के बागडोगरा तक बनेगी। यह नया मार्ग मौजूदा NH-27 के समानांतर क्षेत्र में, उससे करीब 20 से 30 किलोमीटर की दूरी पर विकसित किए जाने की जानकारी दी गई है।
गलगलिया शुरू हो बागडोगरा तक बनाया जाएगा नया रास्ता
नए हाईवे का रूट बिहार के गलगलिया से शुरू होगा। इसके बाद यह पश्चिम बंगाल के खारीबारी और पानीटंकी क्षेत्र से होते हुए बागडोगरा तक पहुंचेगा।इस परियोजना से बिहार से सिलीगुड़ी क्षेत्र की ओर जाने वाले लोगों को एक अतिरिक्त सड़क मार्ग मिल सकता है। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी आवागमन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है।
हाईवे पर 3 बड़े पुल और रोड ओवरब्रिज भी हुए प्रस्तवित
परियोजना में केवल फोरलेन सड़क का निर्माण ही शामिल नहीं है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण संरचनाएं भी तैयार की जाएंगी।
प्रस्तावित परियोजना में
3 बड़े पुल
1 रोड ओवरब्रिज
5 हाथी अंडरपास
सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड
बनाने की योजना है। हाथी अंडरपास का प्रावधान इस क्षेत्र के वन्यजीव और हाथियों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बागडोगरा, नक्सलबाड़ी और खारीबारी में कम हो सकता है ट्रैफिक दबाव
नया फोरलेन हाईवे तैयार होने के बाद बागडोगरा, नक्सलबाड़ी, खारीबारी और पानीटंकी जैसे क्षेत्रों में मौजूदा सड़क यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।नया रास्ता बनने से स्थानीय ट्रैफिक और लंबी दूरी के यातायात को अलग-अलग मार्ग मिलने की संभावना रहेगी। इससे सड़क यात्रा को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। यह देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण संकरा भू-भाग है।यही वजह है कि इस क्षेत्र में सड़क और रेल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बिहार से पश्चिम बंगाल तक बनने वाला यह नया हाईवे इस क्षेत्र में सड़क संपर्क का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकता है।
नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की ओर कनेक्टिविटी को भी फायदा
प्रस्तावित सड़क पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के करीब से गुजरती है। पानीटंकी और आसपास का इलाका नेपाल सीमा के निकट है। ऐसे में इस मार्ग के विकसित होने से नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर हो सकता है।इसके अलावा सिलीगुड़ी क्षेत्र के जरिए भूटान और बांग्लादेश की ओर जाने वाले मार्गों तक भी कनेक्टिविटी को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की संभावना है।
बिहार और सिलीगुड़ी के बीच मिलेगा वैकल्पिक सड़क मार्ग
नए हाईवे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह बिहार और सिलीगुड़ी क्षेत्र के बीच वैकल्पिक सड़क संपर्क तैयार करेगा। अभी इस दिशा में आवागमन के लिए प्रमुख मार्गों पर काफी निर्भरता रहती है।
नया फोरलेन तैयार होने के बाद यातायात को एक अतिरिक्त विकल्प मिलने से लंबी दूरी के वाहनों और स्थानीय यातायात के संचालन में मदद मिल सकती है।
सड़क के साथ रेल नेटवर्क पर भी जोर
सिलीगुड़ी क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सड़क के साथ-साथ रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। दी गई जानकारी के मुताबिक, सिलीगुड़ी के आसपास करीब 35 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन से जुड़ी योजना का भी ऐलान किया गया है।
इस तरह एक तरफ नया फोरलेन हाईवे और दूसरी तरफ रेल नेटवर्क को मजबूत करने की योजनाएं सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच होगी आसान होने की उम्मीद
बिहार से पश्चिम बंगाल के रास्ते सिलीगुड़ी क्षेत्र तक नया सड़क संपर्क तैयार होने के बाद आगे पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले यात्रियों और माल परिवहन के लिए भी कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है। हालांकि, इससे यात्रा समय में कितनी कमी आएगी और परियोजना पूरी तरह तैयार होने के बाद यातायात का वास्तविक असर क्या होगा, यह निर्माण पूरा होने और सड़क के संचालन के बाद ही स्पष्ट होगा।
सीमावर्ती इलाकों के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना
गलगलिया, पानीटंकी और खारीबारी जैसे क्षेत्र सीमावर्ती इलाके के करीब हैं। ऐसे में नया फोरलेन हाईवे सिर्फ सामान्य यातायात के लिहाज से ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। कुल मिलाकर, रु2,077.18 करोड़ की लागत से बनने वाला 31.2 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन हाईवे बिहार के गलगलिया से पश्चिम बंगाल के बागडोगरा तक नया सड़क संपर्क तैयार करेगा।
इससे सिलीगुड़ी कॉरिडोर को एक अतिरिक्त कनेक्टिविटी विकल्प मिलने और बिहार, पश्चिम बंगाल तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच आवागमन को बेहतर बनाने की उम्मीद है।