कानपुर से भोपाल का सफर होगा आसान ! ये नया 'लाइफलाइन' हाईवे बदलेगा तस्वीर, देखें कहां-कहां से गुजरेगा ?
Udaipur Times, Bhopal-Kanpur Corridor : मध्य प्रदेश में कई नए हाईवे और एक्सप्रेसवे पर काम चल रहा है। इसी कड़ी में पुराने मार्गों को भी अपग्रेड कर हाई स्पीड कॉरिडोर में बदला जा रहा है। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मोहरी-सतई घाट फोर-लेन कॉरिडोर है, जो नेशनल हाईवे-934 (NH-934) का हिस्सा है। करीब 40 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके पूरा होने के बाद बुंदेलखंड क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सफर भी आसान होगा।
इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद कानपुर से भोपाल का सफर करीब 7-8 घंटे, जबकि सागर से खजुराहो की दूरी करीब 2-2.5 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे सागर, छतरपुर, पन्ना और दमोह जैसे क्षेत्रों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी और कारोबार, पर्यटन तथा लॉजिस्टिक्स को भी फायदा होने की उम्मीद है।
क्या है मोहरी-सतई घाट फोर-लेन प्रोजेक्ट?
यह प्रोजेक्ट भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का अहम हिस्सा है। यह मध्य प्रदेश के सागर जिले के मोहरी से छतरपुर जिले के सतई घाट तक फैला हुआ है। प्रोजेक्ट के तहत करीब 39.5 किलोमीटर फोर-लेन हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। इसमें करीब 38 किलोमीटर मुख्य कैरेजवे और 26 किलोमीटर सर्विस एवं स्लिप रोड शामिल हैं।
इसके अलावा प्रोजेक्ट में 3 बड़े पुल, 11 छोटे पुल, 8 व्हीकुलर अंडरपास, 4 लाइट व्हीकुलर अंडरपास, 1 ओवरपास, 19 बस शेल्टर, 22 जंक्शन सुधार और 1 ट्रक ले-बाय का निर्माण भी किया जा रहा है। सतई घाट क्षेत्र में पहले सड़कें संकरी होने के साथ तीखे मोड़, खतरनाक ढलान और सीमित विजिबिलिटी जैसी समस्याएं थीं। इसकी वजह से वाहनों की रफ्तार कम रहती थी और सफर में ज्यादा समय लगता था। फोर-लेन कॉरिडोर तैयार होने के बाद बेहतर अलाइनमेंट, विजिबिलिटी और सुरक्षित ड्राइविंग की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
40 KM का सफर अब करीब 40 मिनट में तय
NHAI के छतरपुर प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र चापेकर के मुताबिक, पहले करीब 40 किलोमीटर लंबे इस घाट सेक्शन को पार करने में डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते थे। नई फोर-लेन सड़क तैयार होने के बाद यही दूरी करीब 40 मिनट में तय की जा सकेगी। यानी जिस सफर में पहले लंबा समय लगता था, वह सड़क की बेहतर डिजाइन और कनेक्टिविटी के कारण काफी तेज हो जाएगा। इससे इस रूट पर चलने वाले स्थानीय वाहन चालकों के साथ लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिलेगी।
सागर, छतरपुर और खजुराहो का सफर होगा और भी आसान
कॉरिडोर के पूरा होने के बाद कई प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है।
सागर से खजुराहो: पहले 4 से 4.5 घंटे, अब करीब 2 से 2.5 घंटे
सागर से छतरपुर: पहले 3.5 से 4 घंटे, अब करीब 1.5 से 2 घंटे
भोपाल से कानपुर: पहले 12 से 13 घंटे, अब करीब 7 से 8 घंटे
इंदौर से कानपुर: पहले 16 से 18 घंटे, अब करीब 10 से 11 घंटे
इस तरह यह कॉरिडोर सिर्फ एक घाट सेक्शन को बेहतर नहीं करेगा, बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा।
वन्यजीवों का भी रखा गया पूरा ध्यान
यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के डीप फॉरेस्ट एरिया से होकर गुजरता है। ऐसे में निर्माण के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही और पर्यावरण का भी ध्यान रखा गया है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र चापेकर के मुताबिक, कॉरिडोर में 7 एनिमल अंडरपास बनाए जा रहे हैं। इसके साथ आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, स्लोप स्टेबिलाइजेशन और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। NHAI के अनुसार, स्थानीय पत्थरों से गेबियन वॉल तैयार कर लागत और स्टील की खपत को भी कम किया गया है।
यूपी और एमपी के बीच मजबूत होगी कनेक्टिविटी
मोहरी-सतई घाट कॉरिडोर के पूरा होने से बुंदेलखंड के कई प्रमुख क्षेत्रों को फायदा मिलेगा। यह कॉरिडोर सागर, छतरपुर, पन्ना और दमोह को उत्तर प्रदेश के कबरई (महोबा), बांदा और आगे औद्योगिक शहर कानपुर से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से स्थानीय लोगों के साथ व्यापारिक और मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी आसान होगी। इससे बुंदेलखंड के उन क्षेत्रों को भी फायदा मिल सकता है, जहां अभी सड़क यात्रा में ज्यादा समय लगता है।
कृषि और कारोबार को मिलेगा परियोजना का फायदा
इस हाईवे के तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच कृषि उत्पादों की तेज ढुलाई संभव होगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और औद्योगिक सामान की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।बेहतर कनेक्टिविटी से नए रोजगार अवसर, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के विस्तार को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा खजुराहो और पन्ना टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन गतिविधियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान के लिए भी बनेगा नया कॉरिडोर
भोपाल, सागर, कबरई, कानपुर रूट के बेहतर होने से इसका फायदा राजस्थान से आने वाले भारी और व्यापारिक ट्रैफिक को भी मिल सकता है। कोटा, झालावाड़ और जयपुर की ओर से आने वाला ट्रैफिक इस बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए यूपी और आगे पूर्वी भारत के क्षेत्रों से सीधे जुड़ सकेगा। यही वजह है कि मोहरी-सतई घाट फोर-लेन कॉरिडोर को सिर्फ स्थानीय सड़क परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच लंबी दूरी की कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बन सकता है