जो जमीन थी कभी बंजर, आज बनी सोना ! जाने NCR के इस शहर के 50 सालों का सफर
Udaipur Times, The 50-year journey of this NCR city : नोएडा ने 50 सालों के भीतर बहुत तरक्की की है। 17 अप्रैल 1976 को दिल्ली से प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को को शिफ्ट करने के उद्देश्य से इस शहर को स्थापित किया गया था। आज के समय में यह शहर आज आईटी हब, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
साल 2000 के बाद नोएडा में विकास की रफ्तार हुई और तेज
एक वक्त था जब नोएडा में जमीन 100-150 वर्ग मीटर की कीमत पर उपलब्ध थी और आज के दौर में यह कीमत लाखों रुपये तक पहुंच गई है। इस हिसाब से जमीन की कीमत में 800 गुना की बढ़ोतरी हुई है। 1980-90 का दशक था जब सहकारी सोसायटियों के माध्यम से मल्टी-स्टोरी हाउसिंग 1200 से 1700 रुपये प्रति वर्ग फुट पर उपलब्ध थी। साल 2000 के बाद नोएडा में विकास की रफ्तार और तेज हुई है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार ने शहर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया
दरअसल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार ने नोएडा शहर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। बीते 10 सालों में यहां जमीन की कीमत आसमान पर पहुंच गई है। साल 2010 तक औसत फ्लैट कीमतें 3000-3500 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है। जिस फ्लैट की कीमत 2015 में 50 लाख रुपये थी और आज इस फ्लैट की कीमत करोड़ों रुपये में पहुंच गई है।
बीते 5 सालों में नोएडा में जमीन की कीमत में 98 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नियोजित विकास, आईटी-कॉरपोरेट हब्स, बेहतर कनेक्टिविटी और रोजगार के भरपूर अवसरों ने नोएडा को निवेशकों और घर खरीदारों की पहली पसंद बना दिया है।
नोएडा प्राधिकरण 1000 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं का शिलान्यास
हाल ही में नोएडा ने अपना 50वां स्थापना दिवस पूरा किया है। इस खास मौके पर नोएडा प्राधिकरण ने 1000 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया।
जेवर एयरपोर्ट बना विकास का बड़ा केंद्र
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) इस समय क्षेत्र के विकास का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। अब यहां चरणबद्ध तरीके से सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। एयरपोर्ट परिसर में मल्टी-मॉडल कार्गो हब (MMCH) विकसित किया जा रहा है, जिसके संचालन की जिम्मेदारी एयर इंडिया एसएटीएस को दी गई है।
तकरीबन 30 एकड़ में विकसित हो रहे इस कार्गो हब की शुरुआती क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकेगा। यहां कोल्ड चेन सुविधा, बॉन्डेड वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क, समेकन केंद्र और क्लाउड आधारित रीयल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेगी।
यह कार्गो हब पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान के किसानों को अपने कृषि उत्पाद देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेगा। साथ ही, क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादों के निर्यात को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
क्या है मौजूदा स्थिति?
वर्तमान में एयरपोर्ट से यात्री सेवाओं के विस्तार और कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित करने का काम जारी है। कार्गो सेवाएं शुरू करने की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं और आने वाले महीनों में यहां से घरेलू कार्गो संचालन शुरू होने की संभावना है। इसके साथ ही हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जिससे जेवर और आसपास का क्षेत्र एक बड़े लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब के रूप में विकसित होगा।
