बदलने वाला है ट्राइसिटी का नक्शा, हरियाणा और पंजाब से सटे इस शहर में बसने जा रहा है नया शहर
Udaipur Times, New Chandigarh : घर की मांग अब केवल दिल्ली-NCR जैसे बड़े रियल एस्टेट मार्केट तक ही सीमित नहीं है; चंडीगढ़ ट्राईसिटी इलाके में भी बड़े लेआउट, गेटेड कम्युनिटी और प्रीमियम लाइफस्टाइल सुविधाओं वाले घरों की मांग बढ़ रही है। चंडीगढ़, मोहाली, ज़ीरकपुर और पंचकूला जैसे स्थापित हब के अलावा, रिहायशी और कमर्शियल गतिविधियां डेरा बस्सी, खरड़, न्यू चंडीगढ़ और कुराली जैसे इलाकों में भी फैल रही हैं। यहां एक नया शहरी नजारा बन रहा है, जो इस इलाके का नक्शा बदलने के लिए तैयार है।
चंडीगढ़ ट्राईसिटी रियल एस्टेट मार्केट पारंपरिक शहर के केंद्रों से आगे बढ़कर उभरते हुए माइक्रो-मार्केट की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव के मुख्य उदाहरणों में मोहाली-एरोसिटी-एयरपोर्ट रोड कॉरिडोर, ज़ीरकपुर, न्यू चंडीगढ़, डेरा बस्सी, खरड़ और कुराली शामिल हैं।
बेहतर सड़क और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी इन इलाकों तक पहुंच आसान बना रही है। इनकी लंबी अवधि की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि इस कनेक्टिविटी के साथ-साथ रोज़गार के अवसर, स्कूल, अस्पताल, बाज़ार और अन्य शहरी सुविधाएं कितनी तेज़ी से विकसित होती हैं।
बेहतर कनेक्टिविटी और तेज़ी से विकसित हो रहा शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर इस बदलाव के मुख्य कारण माने जाते हैं। CII-नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट ने चंडीगढ़ ट्राईसिटी को देश के 11 उभरते शहरों में से एक के रूप में पहचाना है। रिपोर्ट के अनुसार, इन उभरते बाज़ारों में घरों की कीमतों में 2021 और 2026 के बीच 63% की वृद्धि हुई, जबकि देश के आठ प्रमुख शहरों में यह वृद्धि 42% थी।
बेहतर कनेक्टिविटी से प्रॉपर्टी का दायरा बढ़ा
ट्राईसिटी इलाके में कई बड़े सड़क प्रोजेक्ट अभी चल रहे हैं। इनमें 31.23 किलोमीटर लंबा ज़ीरकपुर-कुराली 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे, 10.30 किलोमीटर लंबा चंडीगढ़ एयरपोर्ट-एरोसिटी ग्रीनफील्ड हाईवे और 19.20 किलोमीटर लंबा ज़ीरकपुर बाईपास शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत लगभग ₹5,278 करोड़ होने का अनुमान है।
ये सड़कें न केवल ट्रैफिक जाम को कम करने में मदद करेंगी, बल्कि ट्राईसिटी के बाहरी इलाकों तक पहुंच भी बेहतर करेंगी। जैसे-जैसे किसी इलाके तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होता है, वहां घर खरीदने और बिज़नेस शुरू करने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ती है।
2. एयरपोर्ट रोड और एयरोसिटी नए प्रॉपर्टी हब के तौर पर उभर रहे हैं
मोहाली का एयरपोर्ट रोड इस ट्रेंड का एक बड़ा उदाहरण है। रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ, एयरपोर्ट रोड, आईटी सिटी, एयरोसिटी और आसपास के सेक्टरों में ऑफिस, होटल, रिटेल आउटलेट और दूसरी कमर्शियल एक्टिविटीज़ में तेज़ी आई है। होमलैंड ग्रुप के CEO उमंग जिंदल के अनुसार, आज घर खरीदने वाले सिर्फ़ शहर के सेंटर से प्रोजेक्ट की दूरी ही नहीं देखते; वे एयरपोर्ट, ऑफिस, स्कूल, हॉस्पिटल और मार्केट तक पहुंचने में लगने वाले समय का भी आकलन करते हैं।
असल में, प्रॉपर्टी की कीमत तय करने में कनेक्टिविटी एक अहम फैक्टर बनती जा रही है।
बड़े घर, गेटेड सोसाइटी और प्रीमियम लाइफस्टाइल
ट्राइसिटी में लग्जरी घरों की बढ़ती मांग के पीछे सिर्फ लोकेशन ही वजह नहीं है। खरीदार अब बड़े लेआउट, गेटेड कम्युनिटी, क्लबहाउस, बेहतर सिक्योरिटी और मॉडर्न लाइफस्टाइल सुविधाओं को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं। इस ट्रेंड से उन माइक्रो-मार्केट को फ़ायदा हो रहा है जहाँ बड़े प्लॉट, नई टाउनशिप और मॉडर्न रेजिडेंशियल डेवलपमेंट की गुंजाइश है।
नतीजतन, न्यू चंडीगढ़, मोहाली और एयरपोर्ट रोड जैसे इलाकों में रेजिडेंशियल डेवलपमेंट के साथ-साथ शहरी सुविधाओं का विस्तार भी ज़रूरी हो गया है।
महंगे प्राइम इलाकों से आगे बढ़कर तलाश
ज़ीरकपुर लंबे समय से चंडीगढ़ और पंचकूला के बीच एक बड़ा रेजिडेंशियल मार्केट रहा है। हालाँकि, बढ़ती कीमतों और ट्रैफ़िक जाम की वजह से खरीदार अब आसपास के इलाकों को भी देख रहे हैं। कुराली, लालरू, डेरा बस्सी और कुराली-मोरिंडा रोड जैसी जगहों पर रियल एस्टेट एक्टिविटीज़ तेज़ी पकड़ रही हैं। कुछ मामलों में, बड़े शहरों की तुलना में ज़मीन और घरों की कम कीमतें खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ा सकती हैं।
दूसरे शब्दों में, ट्राइसिटी का रियल एस्टेट मार्केट अब सिर्फ़ चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और ज़ीरकपुर तक ही सीमित नहीं है; यह धीरे-धीरे एक बड़े रीजनल रियल एस्टेट कॉरिडोर के तौर पर विकसित हो रहा है।
न्यू चंडीगढ़ में तेजी
न्यू चंडीगढ़ (मुल्लनपुर) में हॉस्पिटल, स्कूल और दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स भी डेवलप किए जा रहे हैं। वहीं, आईटी सिटी, एयरपोर्ट रोड, एयरोसिटी और मोहाली के नए सेक्टरों के आसपास कंस्ट्रक्शन का काम भी तेज़ हो गया है। गिलको ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर तेजप्रीत सिंह गिल के अनुसार, किसी नए इलाके में सिर्फ़ सड़कें बनाने से लंबे समय तक रियल एस्टेट की मांग बनी नहीं रह सकती; इसके लिए रोज़गार के केंद्र, स्कूल, अस्पताल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रोज़मर्रा की सुविधाओं का विकास भी ज़रूरी है।
कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए फायदे
बेहतर कनेक्टिविटी का फ़ायदा सिर्फ रिहायशी प्रॉपर्टी को ही नहीं मिलता; एयरपोर्ट रोड और बड़े हाईवे के किनारे शोरूम, दुकानों, ऑफ़िस, होटलों और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए भी संभावनाएं बढ़ रही हैं। हालाँकि, किसी नए इलाके में प्रॉपर्टी खरीदते समय सिर्फ़ प्रस्तावित हाईवे या भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर निर्भर रहना काफ़ी नहीं है।
मौजूदा सड़क नेटवर्क, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पानी और सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूल, अस्पताल, रोज़गार के केंद्र और आस-पास पहले से मौजूद विकास पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।