पढ़ते-पढ़ते हो गई बूढ़ी... कहकर लोगों ने मारा ताना, सेल्फ स्टडी से टीचर बन ममता ने रचा इतिहास
Udaipur Times, KVS Teacher Success Story : कहते है की अगर मेहनत सच्ची हो तो जीवन में कोई भी मुकाम हासिल करना मुश्किल नहीं होता है। आज हम आपको ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहे है इसने कड़ी मेहनत से अपना इतिहास रच दिया है। यह कहानी है हरियाणा के साधारण से परिवार से आने वाली केंद्रीय विद्यालय (KV) की टीचर ममता नागर की। कभी लोग ताने देते थे, 'पढ़ते-पढ़ते बूढ़ी हो गई हो, अब क्या नौकरी मिलेगी तुझे, अब अपना घर संभालो।' उन्हीं तानों को प्रेरणा में बदल दिया और सफलता हासिल की।
सबने बोला कि इतने लोग फॉर्म भरते हैं, सालों से तैयारी कर रहे हैं, उनकी नौकरी लगती नहीं, तेरी लगेगी। एक बात ध्यान थी मुझे कि तारीफ दिन बनाती है और ताने जिंदगी बना देते हैं।' आज जब ममता नागर केंद्रीय विद्यालय में बच्चों को पढ़ा रही होती हैं, तो कुछ देर के लिए भूल जाती हैं कि यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपनी लाइफ में क्या कुछ नहीं झेला है। दो छोटे बच्चों की परवरिश, ससुराल छोड़कर मायके में रहीं और पति से दूर रहना पड़ा। उनकी सक्सेस स्टोरी दृढ़ हौसले और खुद पर विश्वास की जीती-जागती मिसाल है। Success Story
शादी पहले प्राथमिकता
ममता नागर, हरियाणा के साधारण परिवार से आती हैं। उनकी परवरिश ऐसे समाज में हुई है जहां लड़कियों को पढ़ाया जाने तो लगा है लेकिन आज भी परिवार की पहली प्राथमिकता लड़की की जल्द से जल्द शादी ही होती है। पिता को बेटी की शादी की चिंता थी, लेकिन फिर भी उन्होंने कभी भी पढ़ाई में कोई कमी नहीं की। अच्छे स्कूल-कॉलेज में पढ़ाया। कंप्यूटर सिखाने के लिए अलग से कोचिंग कराई। उस समय कंप्यूटर सीखना बड़ी बात होती थी। Success Story
उठाई किताबें
कॉलेज से निकलने के बाद साल 2013 में ममता की शादी हो गई। परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए पता ही नहीं चला कि कब किताबें हाथ से छूट गईं। ममता ने बताया कि भले ही उन्हें परिवार का सपोर्ट नहीं मिला था, लेकिन पति ने हमेशा साथ दिया। उन्होंने फिर से पढ़ने के लिए कहा, हमेशा मोटिवेट किया। पति का सपोर्ट ही था, जिसकी वजह से उन्हें फिर से किताबें उठाने का हौसला मिला। Success Story
नहीं मानी हार
एक तरफ परिवार और बच्चे व दूसरी तरफ कुछ बनने का सपना। दोनों जिम्मेदारियों को निभाते हुए ममता ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। हरियाणा ग्राम सचिव, CET और राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) में असफलता मिली। फिर भी उनके कदम डगमगाए नहीं। क्योंकि उन्हें पूरा यकीन था कि सफलता उनसे सिर्फ एक कदम दूर है। Success Story
मायके रहना पड़ा
ममता बताती हैं कि जब भी कोई परिणाम आता और वो कुछ अंकों की कमी से चूक जाती तो उन्हें ताने सुनने पड़ते थे। उन्होंने बताया, 'जब भी पेपर में फेलियर मिला तो ताने मिले। सबने बोला कि अब पढ़ाई छोड़ दो, बच्चों और घर पर ध्यान दो। पढ़ते-पढ़ते बूढ़ी हो गई हो, अब क्या नौकरी मिलेगी तुझे, अब अपना घर संभालो। फिर मैंने एक दिन घर छोड़ दिया। मायके चली गई ताकि वहां रहकर पढ़ाई कर सकूं। मां ने सहयोग किया। बच्चों की जिम्मेदारी ली। बच्चों को छोड़कर जाने का मन नहीं होता था। फिर भी दिल पर पत्थर रखकर मैंने लाइब्रेरी जाकर सेल्फ स्टडी की।' Success Story
पति ने पूरा साथ दिया
ममता नागर के पति हरियाणा पुलिस में कार्यरत हैं। पति के बारे में बताते हुए ममता कहती हैं कि वो भी पुलिस में नौकरी करते हैं और एक जिम्मेदारी भरी ड्यूटी निभाते हुए भी उन्होंने पूरा सपोर्ट किया। जब घर छोड़े हुए 1 साल हुआ तो लोगों ने कहा कि अब बुढ़ापे में नौकरी नहीं मिलेगी। अपने घर आ जाओ, लेकिन पति ने बोला कि जब तक सफल न हो जाओ, घर की चिंता मत करना। Success Story
एग्जाम देने के लिए चाहे कितनी भी दूर जाना पड़े, पति वहीं ले जाते थे। कभी असफलता पर गुस्सा नहीं किया। हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इस बीच ममता ने राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा क्वालिफाई कर ली। अब वे अपनी कामयाबी से एक कदम दूर थीं। Success Story
तानों का जवाब दिया
कई तरह की परेशानियों से लड़ते हुए ममता की जिंदगी में फिर वो दिन आया, जब उन्होंने अपनी सफलता से लोगों के तानों का जवाब दिया। साल 2023 में उनका चयन केंद्रीय विद्यालय में PRT टीचर पद पर हो गया। वर्तमान में ममता PM श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर-2 जयपुर में पढ़ा रही हैं। Success Story वो कहती हैं, 'लोगों के तानों ने ही मुझे आगे बढ़ाया और मजबूत बनाया है। उनके तानों ने ही मेरी जिंदगी बना दी। वो कहते हैं ना कि तारीफ दिन बनाती है और ताने जिंदगी बना देते हैं।'
