106 गांवों की बदलेगी तस्वीर ! 117 KM लंबा एक्सप्रेसवे सफर बनाएगा आसान, जमीनों का होगा अधिग्रहण
Udaipur Times, Vindhya Expressway : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर समेत विंध्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी सड़क परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है। करीब 117 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेसवे सोनभद्र से शुरू होकर प्रयागराज तक जाएगा और इसे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। खास बात यह है कि मिर्जापुर जिले में एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिले की सदर और चुनार तहसील के 106 गांवों की जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जानी है। मिर्जापुर के जिलाधिकारी की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। अब संबंधित जमीन मालिकों से आपत्तियां और दावे लिए जाएंगे तथा निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। करीब 26 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को क्षेत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद सड़क संपर्क बेहतर होने के साथ-साथ व्यापार, खनन, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
117 KM लंबा होगा विंध्य एक्सप्रेसवे
विंध्य एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 117 किलोमीटर बताई जा रही है। इसका निर्माण सोनभद्र से शुरू होकर प्रयागराज तक प्रस्तावित है। इस दौरान मिर्जापुर, भदोही और चंदौली के कुछ हिस्से भी परियोजना के दायरे में आएंगे। करीब 26 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना विंध्य और पूर्वांचल क्षेत्र के लिए बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा होने के बाद इन क्षेत्रों के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर सड़क मार्ग मिल सकेगा। वहीं, माल की आवाजाही भी पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार के साथ क्षेत्र के प्रमुख शहरों और औद्योगिक इलाकों को बड़े बाजारों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने पर बढ़ेगी अहमियत
विंध्य एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना इस परियोजना की अहमियत को और बढ़ाती है। गंगा एक्सप्रेसवे पहले से ही उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है। ऐसे में दोनों एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बनने से विंध्य क्षेत्र को प्रदेश के बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसका फायदा मिर्जापुर और सोनभद्र के साथ आसपास के जिलों को भी मिल सकता है। बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के जरिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश के दूसरे प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान होने की संभावना है। हालांकि, यात्रा के समय और वास्तविक दूरी में कितना बदलाव आएगा, यह परियोजना के अंतिम रूट और पूरी कनेक्टिविटी तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मिर्जापुर में 106 गांवों की जमीन का होगा अधिग्रहण
मिर्जापुर जिले में विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब आगे बढ़ रही है। इसके लिए सदर और चुनार तहसील के 106 गांवों को चिह्नित किया गया है। जिलाधिकारी की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद अब जमीन से जुड़े दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।
भूमि अधिग्रहण किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें परियोजना के रूट में आने वाली जमीन की पहचान, संबंधित जमीन मालिकों की आपत्तियां और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। मिर्जापुर में भी इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद एक्सप्रेसवे निर्माण से जुड़े अगले चरण को आगे बढ़ाया जाएगा।
सदर तहसील के इन गांवों में आएगी परियोजना
विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए मिर्जापुर की सदर तहसील के कई गांवों को अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इनमें नेवढ़िया, पटेहरा, भेवर करमनपुर, झिंगुरा, उमरिया, लोकापुर, तिगोडा, गुरखुली, पथरताल, भिलगो, चौमुख, अर्जुनपुर पाठक, जगदीशपुर, मोहनपुर भवरख, सागर सेमर, इन्दरपुर, लोहंदी खुर्द, अघवार, पाण्डेयपट्टी, सिरसी बघेल, विष्णुपट्टी, चिंदलिख गहरवार, तोसवा पारसिया, चौरा, सारी पट्टी, दामोदरपुर पट्टी, हुसैनीपुर, सिरसी गहरवार, देवखरा, अर्जुनपुर मवैया, चिंदलिख, महुअरिया, पडरा मौनस, मझलीपट्टी चक, कंतित, बसही, भिस्कुरी, राजापुर, रानीबारी, हुरुआ, गोपालपुर, शाहपुर चौसा, नकहरा, पहाड़ी भोजपुर, पसैया डगमगपुर, रक्का भुआल, तिलठी, श्रीपट्टी और देवरी शामिल हैं।
इन गांवों में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। अधिसूचना जारी होने के बाद अब संबंधित लोगों के दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चुनार तहसील के भी कई गांव आएंगे दायरे में
चुनार तहसील के भी बड़ी संख्या में गांव विंध्य एक्सप्रेसवे की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल हैं। इनमें भेड़ी, विजुरीही, अतरौली खुर्द, विशुनपुर जरहा, चौकिया भागवत, बल्लीपुर कुसमुही, देवनाथपुर फहरदा, कुदारन, मीरापुर अहरौरा, शेखवा, लतीफपुर, अधवार, अतरौली कलां, बैरमपुर, भुड़्कुड़ा, चकलिया, चोरमरवा, हटिया, कनवाही, खानजादीपुर, खरका, मानिकपुर, मोहिउद्दीनपुर, नुआंव, सोनखरा, रोशनहर, श्रीपुर, आराजी ब्रम्हाचक, अतरौली कलां, बरुईया, भड़ेवल, भुड़्कुड़ा, चक तकिया, चंदौली, देवलासी, घरवासपुर, हमीदपुर, जैपट्टी कलां, खेगईबरी, खीडोरी मुंडेरु, खीडोरी नीरफ, लमवा, लठिया, मदरा, महोगनी, सम्मोलपुर, नोहरीपुर, फत्तेपुर भुइली, पीडख़िर, राजुपुर, रामपुर, रामपुर हवेली, रानीपुर, रेहिया, रेरुपुर, शाहपुर मुंडफालवा, शिकारपुर, सिरसी और जमीन इंग्लिश शामिल हैं। इन गांवों में भी एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर जरूरी कार्रवाई पूरी होने के बाद परियोजना के निर्माण से जुड़े अगले चरण आगे बढ़ाए जाएंगे।
सोनभद्र के खनन कारोबार को मिल सकता है फायदा
विंध्य एक्सप्रेसवे का एक बड़ा फायदा सोनभद्र के खनन और औद्योगिक कारोबार को मिलने की उम्मीद है। सोनभद्र में खनिज और खनन से जुड़ी गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं। ऐसे में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने पर भारी वाहनों और माल की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
एक्सप्रेसवे के जरिए सोनभद्र को मिर्जापुर और आगे प्रयागराज समेत दूसरे प्रमुख क्षेत्रों से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने और स्थानीय उद्योगों के लिए बाजार तक पहुंच आसान होने की संभावना है। बेहतर सड़क नेटवर्क किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
मिर्जापुर के गुलाबी पत्थर के कारोबार को भी फायदा
मिर्जापुर अपने गुलाबी पत्थर के लिए भी जाना जाता है। इस क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के लिए बेहतर सड़क कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण हो सकती है। एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद मिर्जापुर से दूसरे शहरों और बड़े बाजारों तक माल पहुंचाने में आसानी होने की उम्मीद है।
बेहतर परिवहन व्यवस्था से स्थानीय उत्पादों की आवाजाही में समय कम हो सकता है और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक आर्थिक असर एक्सप्रेसवे के पूरी तरह तैयार होने और आसपास के क्षेत्रों में विकसित होने वाली कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगा।
पर्यटन को भी मिलेगी नई रफ्तार
विंध्य क्षेत्र में धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन की अच्छी संभावनाएं हैं। मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के लिए बेहतर सड़क संपर्क यात्रा को आसान बना सकता है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार के बाद दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले लोगों को इन क्षेत्रों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन बढ़ने पर होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन, छोटे दुकानदारों और दूसरे सेवा क्षेत्र के कारोबार को भी फायदा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
दिल्ली और बड़े शहरों से कनेक्टिविटी होगी और भी बेहतर
विंध्य एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना के कारण इसका प्रभाव केवल मिर्जापुर और सोनभद्र तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए विंध्य क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के दूसरे प्रमुख हिस्सों और आगे दिल्ली क्षेत्र से बेहतर सड़क संपर्क मिलने की संभावना है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों और कारोबारियों को फायदा हो सकता है।
माल परिवहन के लिए भी बेहतर सड़क नेटवर्क महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, दिल्ली तक पहुंचने में वास्तविक समय कितना कम होगा, यह परियोजना के अंतिम रूट और सभी संबंधित एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण की दिशा में बढ़ेगी आगे की कार्यवाही
फिलहाल मिर्जापुर में सबसे महत्वपूर्ण चरण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया है। अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित जमीन मालिकों से आपत्तियां और दावे लिए जाएंगे। इनका निस्तारण और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। करीब 117 किलोमीटर लंबा और लगभग 26 हजार करोड़ रुपये की लागत वाला विंध्य एक्सप्रेसवे पूरा होने के बाद मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को नया आधार मिल सकता है।
इससे जहां सड़क यात्रा आसान होने की उम्मीद है, वहीं सोनभद्र के खनन कारोबार, मिर्जापुर के गुलाबी पत्थर के व्यापार और विंध्य क्षेत्र के पर्यटन को भी फायदा मिलने की संभावना है। ऐसे में यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों के लिए अहम साबित हो सकती है।