46 गांवों की बदलेगी तस्वीर ! किसानों को मिलेगा पैसा, रेलवे करेगा जमीनों का होगा अधिग्रहण
Udaipur Times, Railway Land Acquisition : उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में रेलवे की एक बड़ी परियोजना के लिए 46 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। गाजियाबाद-मुरादाबाद, मुरादाबाद-रोजा और रोजा-सीतापुर रेल मार्ग के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने की योजना के तहत जिले के किसानों की जमीन परियोजना के दायरे में आ रही है। जमीन अधिग्रहण के बदले पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। प्रशासन ने प्रभावित जमीनों की पहचान और रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ऐसे में किसानों के लिए अपनी जमीन से जुड़े कागजात और रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण हो गया है।
402.78 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर बिछेंगी नई लाइनें
रेलवे बोर्ड की योजना के मुताबिक गाजियाबाद-मुरादाबाद, मुरादाबाद-रोजा और रोजा-सीतापुर के बीच कुल 402.78 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा रेल मार्ग पर बढ़ते यातायात और यात्री दबाव को कम करना तथा ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त रेल क्षमता तैयार करना है। परियोजना के लिए जिन क्षेत्रों में नई रेल लाइन का निर्माण प्रस्तावित है, उनमें अमरोहा जिले के 46 गांव भी शामिल हैं। इन गांवों की कुछ जमीन रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहण के दायरे में आएगी। प्रशासन अब संबंधित जमीनों का रिकॉर्ड जुटाकर यह निर्धारित करने की प्रक्रिया में है कि किस गांव में किन गाटों की कितनी जमीन परियोजना के लिए आवश्यक होगी।
तीन तहसीलों के 46 गांव आएंगे दायरे में
रेलवे की इस परियोजना का असर अमरोहा जिले की तीन प्रमुख तहसीलों के गांवों पर पड़ने वाला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अमरोहा तहसील के 27 गांवों की करीब 48.1182 हेक्टेयर जमीन परियोजना के दायरे में है। वहीं धनौरा तहसील के 14 गांवों की लगभग 12.487 हेक्टेयर जमीन और हसनपुर तहसील के 5 गांवों की करीब 10.787 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस तरह तीनों तहसीलों को मिलाकर कुल 46 गांवों की जमीन रेलवे की नई लाइन परियोजना के लिए प्रभावित होगी। जमीन का वास्तविक अधिग्रहण संबंधित प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के तहत किया जाएगा।
प्रशासन ने प्रभावित जमीन की खरीद-बिक्री पर लगाई गई रोक
रेलवे लाइन के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित जमीनों पर कुछ पाबंदियां लागू की हैं। परियोजना के संरेखण यानी Alignment में आने वाले गाटों की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। तीनों तहसीलों के उपजिलाधिकारियों और सब-रजिस्ट्रार को इस संबंध में पत्र भेजे गए हैं। इसके साथ ही प्रभावित जमीनों पर धारा-80 से जुड़ी प्रक्रिया और किसी भी तरह के अनधिकृत निर्माण पर भी रोक लगाई गई है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान जमीन के रिकॉर्ड में अनावश्यक बदलाव या विवाद की स्थिति पैदा न हो।
धारा-80 और अनधिकृत निर्माण पर भी रोक
प्रशासन की ओर से प्रभावित गाटों पर धारा-80 की कार्रवाई पर भी रोक लगाई गई है। इसके अलावा संबंधित जमीन पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण नहीं किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि परियोजना के लिए चिन्हित जमीनों पर पहले से ही रिकॉर्ड स्पष्ट रखना जरूरी है, ताकि आगे चलकर अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक अड़चन न आए। किसानों के लिए इसका मतलब यह है कि यदि उनकी जमीन प्रस्तावित रेल लाइन के Alignment में आ रही है, तो उन्हें फिलहाल जमीन से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव या लेनदेन से पहले संबंधित प्रशासनिक निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए।
रेलवे से मांगा गया गाटों का पूरा ब्योरा
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कर्मेंद्र सिंह के अनुसार, रेल लाइन चौड़ीकरण की जद में आने वाले गांवों की जमीनों से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रभावित गाटों की खरीद-फरोख्त और धारा-80 पर रोक लगाने के लिए सभी संबंधित एसडीएम को पत्र भेजा जा चुका है। इसके साथ ही रेलवे अधिकारियों से प्रभावित किसानों की जमीनों का गाट संख्या सहित पूरा विवरण मांगा गया है। इस रिकॉर्ड के मिलने के बाद यह अधिक स्पष्ट हो सकेगा कि किस गांव में किन किसानों की कितनी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जानी है।
किसानों को मिलेगा मुआवजा, कागजात रखें तैयार
जमीन अधिग्रहण की स्थिति में संबंधित किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, मुआवजे की वास्तविक राशि जमीन की स्थिति, स्थान, भूमि के प्रकार और लागू अधिग्रहण नियमों के आधार पर तय होगी। इसलिए अभी से किसी निश्चित रकम की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी जमीन की खतौनी, खसरा, रजिस्ट्री, स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, बैंक खाते से संबंधित जानकारी और अन्य जरूरी रिकॉर्ड व्यवस्थित रखें। जमीन में संयुक्त हिस्सेदारी होने पर संबंधित हिस्सेदारों के दस्तावेज भी स्पष्ट रखना उपयोगी रहेगा। अंतिम मुआवजा प्रक्रिया के दौरान प्रशासन की ओर से मांगे जाने वाले दस्तावेजों और औपचारिकताओं का पालन करना होगा।
क्यों जरूरी है तीसरी और चौथी रेलवे लाइन?
गाजियाबाद से मुरादाबाद और आगे रोजा-सीतापुर तक रेल नेटवर्क उत्तर भारत के महत्वपूर्ण रेल मार्गों में शामिल है। इस रूट पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही भी होती है। ट्रेनों की संख्या और माल परिवहन बढ़ने के साथ मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव बढ़ता है। तीसरी और चौथी लाइन बनने से ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होंगे। इससे अलग-अलग ट्रेनों को चलाने में रेलवे को अधिक लचीलापन मिल सकता है और व्यस्त रेल मार्ग पर ट्रेनों के परिचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
किसान सबसे पहले करें अपनी जमीन का रिकॉर्ड अपडेट
जिन 46 गांवों की जमीन परियोजना के दायरे में बताई जा रही है, वहां के किसानों को सबसे पहले अपनी जमीन का रिकॉर्ड अपडेट और व्यवस्थित रखना चाहिए। खासतौर पर यह जांचना जरूरी होगा कि उनकी जमीन का कौन-सा गाटा प्रस्तावित रेल Alignment में शामिल है। इसके अलावा किसानों को अधिग्रहण से संबंधित प्रशासनिक नोटिस और अधिकारियों की ओर से जारी जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। मुआवजे से संबंधित प्रक्रिया में जमीन के स्वामित्व और रिकॉर्ड की स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी। किसी भी दस्तावेज या जमीन के लेनदेन से जुड़ी कार्रवाई करने से पहले स्थानीय राजस्व अधिकारी या संबंधित प्रशासनिक कार्यालय से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
46 गांवों की जमीन परियोजना के दायरे में
अमरोहा जिले में रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं। तीन तहसीलों के 46 गांवों की जमीन परियोजना के दायरे में आने के कारण भूमि रिकॉर्ड और गाटों का विवरण जुटाना सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। फिलहाल रेलवे अधिकारियों से प्रभावित गाटों का पूरा विवरण मांगा गया है। इसके बाद जमीन की स्थिति और प्रभावित किसानों की संख्या को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। परियोजना के आगे बढ़ने के साथ भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया से संबंधित अन्य जानकारियां भी सामने आने की संभावना कुल मिलाकर, अमरोहा के 46 गांवों के किसानों के लिए यह बड़ी रेलवे परियोजना सीधे तौर पर जमीन और मुआवजे से जुड़ी है। हालांकि मुआवजे की रकम अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्रभावित किसानों के लिए अपनी जमीन के दस्तावेज व्यवस्थित रखना और प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।