52 गांवों की बदलेगी तस्वीर ! इन किसानों की जमीनों का होगा अधिग्रहण, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
Udaipur Times, Amroha-Haridwar Expressway : उत्तर प्रदेश के अमरोहा से हरिद्वार तक प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं. मंगरौला टी-प्वाइंट से शुरू होने वाले इस एक्सप्रेसवे को प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा. इसके बाद यह मार्ग हरिद्वार तक पहुंचेगा। परियोजना का पूरा मानचित्र तैयार करने के साथ ही प्रशासन जमीनों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच में जुटा है। तहसील स्तर पर गाटा संख्याओं का मिलान किया जा रहा है, ताकि जमीन अधिग्रहण के समय किसी तरह की परेशानी न हो।
52 गांव परियोजना के दायरे में आए
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 116.85 किलोमीटर होगी। इसमें लगभग 44 किलोमीटर हिस्सा अमरोहा जिले से होकर गुजरेगा। जिले की हसनपुर और धनौरा तहसील के कुल 52 गांव परियोजना के दायरे में आए हैं। इनमें धनौरा तहसील के अटारी, मुरीदपुर, मीरपुर, बस्तौरी, जलालपुर कलां, झनकपुरी, नगलिया बहादिरपुर, ब्रह्मपुर भूड़, यकबगड़ी, शेखूपुर शमाली, रायपुर शुमाली, देहरा घनश्याम, कौराला, कुआंखेड़ा, पेली, खंडसाल, रछौटी, बंश गोपालपुर, बुद्धपुरा, डींगरा, पट्टीपुर माफी, हैबतपुर चौधरियान, पारा खालसा समेत कई गांव शामिल हैं।
वहीं हसनपुर क्षेत्र के रुखालू, शकरौली, गुलामपुर, भैंसरौली, बायखेड़ा, लुहारी खादर, सोहरका, दीपपुर, आगापुर कला, मछरई, याकूबपुर, सेमला, बसेड़ा खुर्द, आलमपुर, अब्दीपुर, पूठी और कटाई समेत अन्य गांव भी एक्सप्रेसवे की जद में हैं।
समझौते के आधार पर होगी जमीन की खरीद
यूपीडा की ओर से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाली जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लग जाएगी। इसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शासन स्तर पर इसके लिए समिति गठित की जाएगी। समिति किसानों से बातचीत और समझौते के आधार पर जमीन का बैनामा कराएगी। परियोजना के तहत जिले के 950 से अधिक किसानों की कृषि भूमि अधिग्रहित होने की संभावना है।
कारोबार के साथ-साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
गंगा एक्सप्रेसवे बनने से अमरोहा से हरिद्वार का सफर पहले के मुकाबले आसान और कम समय में पूरा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही दिल्ली, मेरठ और प्रयागराज की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी. एक्सप्रेसवे के आसपास उद्योग, वेयरहाउस, होटल, पेट्रोल पंप और लॉजिस्टिक हब विकसित होने की संभावना है। इससे जिले में निवेश बढ़ सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। पर्यटन को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
गंगा एक्सप्रेसवे की जद में आने वाले गांवों समेत जिलेभर में सर्किल रेट बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव पर लोगों से 25 अगस्त तक आपत्तियां मांगी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी रिकॉर्ड और आपत्तियों की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। फिलहाल एक्सप्रेसवे का अंतिम मानचित्र तैयार करने और जमीनों के रिकॉर्ड को सही तरीके से मिलाने का काम जारी है। इससे आने वाले समय में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।