88 गांवों की बदलेगी तस्वीर ! 541 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण, किसानों को सरकार देगी मुआवजा ?
Udaipur Times, UP Expressway Land Acquisition : उत्तर प्रदेश में पूर्व से पश्चिम तक बेहतर और तेज कनेक्टिविटी विकसित करने की दिशा में गोरखपुर-शामली हाईस्पीड कॉरिडोर परियोजना पर काम लगातार आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। सिद्धार्थनगर जिले में परियोजना के लिए जमीन चिह्नित करने और उससे जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन का काम पूरा कर लिया गया है। अब अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए प्रस्ताव को राजपत्र में प्रकाशित करने के लिए भेजा गया है।
जानकारी के मुताबिक, जिले की बांसी, डुमरियागंज और इटवा तहसीलों के 88 गांवों में करीब 541 हेक्टेयर जमीन इस परियोजना के दायरे में आ रही है। इस जमीन पर करीब 1,800 किसानों का स्वामित्व या हित जुड़ा हुआ है। गजट अधिसूचना जारी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया शुरू होगी और पात्र भूमि मालिकों को नियमानुसार मुआवजा देने का रास्ता साफ हो जाएगा।
88 गांवों में हुआ जमीन का विस्तृत सर्वे
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की टीम ने संबंधित गांवों में जमीन का विस्तृत सर्वे किया है। प्रस्तावित एलाइनमेंट के आधार पर करीब 70 मीटर चौड़ाई वाले क्षेत्र को चिह्नित किया गया है। इस सर्वे में खेतों, जमीन के रिकॉर्ड और प्रस्तावित सड़क की सीमा का मिलान किया गया है। तहसीलवार आंकड़ों की बात करें तो बांसी तहसील के 45 गांव, डुमरियागंज तहसील के 28 गांव और इटवा तहसील के 15 गांव इस परियोजना से प्रभावित होने वाले हैं। इस तरह तीनों तहसीलों को मिलाकर कुल 88 गांवों की जमीन एक्सप्रेसवे के लिए प्रस्तावित की गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, जमीन संबंधी प्रस्ताव में संबंधित गाटा संख्या, रकबा और अन्य आवश्यक विवरण शामिल किए गए हैं। इन दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद अब अधिग्रहण प्रक्रिया को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी है।
ड्रोन सर्वे से तय हुआ एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट तय करने के लिए सिर्फ कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं किया गया है। इसके लिए ड्रोन सर्वे और स्थलीय निरीक्षण दोनों का इस्तेमाल किया गया। अलग-अलग स्थानों पर जमीन की स्थिति और प्रस्तावित सड़क की सीमा का मौके पर सत्यापन किया गया।खेसरहा क्षेत्र सहित कई इलाकों में खेतों पर लाल झंडियां लगाकर निशानदेही भी की जा चुकी है। इन निशानों के आधार पर एक्सप्रेसवे के लिए दोनों तरफ करीब 35-35 मीटर जमीन अधिग्रहित किए जाने की योजना है। इससे किसानों को पहले से यह जानकारी मिल रही है कि उनकी जमीन का कौन-सा हिस्सा परियोजना की जद में आ सकता है। हालांकि, जमीन अधिग्रहण की अंतिम प्रक्रिया संबंधित कानूनी और प्रशासनिक चरण पूरे होने के बाद ही आगे बढ़ेगी।
किस तहसील के कितने गांव आएंगे दायरे में?
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के लिए सिद्धार्थनगर जिले में जमीन अधिग्रहण का दायरा तीन तहसीलों तक फैला है। बांसी तहसील के 45, डुमरियागंज के 28 और इटवा के 15 गांव इस परियोजना में शामिल हैं। प्रशासनिक सुविधा और परियोजना के काम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए इन गांवों को NHAI के अलग-अलग कार्यालयों के अंतर्गत रखा गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अयोध्या कार्यालय के अंतर्गत बांसी के 19, डुमरियागंज के 27 और इटवा के 20 गांव रखे गए हैं, जबकि गोरखपुर कार्यालय के तहत बांसी तहसील के 26 गांवों को जोड़ा गया है। इस व्यवस्था के जरिए जमीन अधिग्रहण, रिकॉर्ड सत्यापन और परियोजना से जुड़े दूसरे प्रशासनिक कामों को अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है।
गजट अधिसूचना के बाद शुरू होगा अगला चरण
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को औपचारिक और कानूनी रूप देने के लिए NHAI की ओर से तैयार प्रस्ताव को भूमि अध्याप्ति विभाग को भेजा गया है। इसमें संबंधित जमीन की गाटा संख्या और रकबे समेत जरूरी विवरण शामिल हैं। अब इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत भारत के राजपत्र में प्रकाशित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद जमीन अधिग्रहण की अगली कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।
इसके बाद पात्र भूमि मालिकों को नियमों के अनुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में करीब 541 हेक्टेयर जमीन से जुड़े किसानों के लिए गजट अधिसूचना और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी।
जमीन की खरीद-बिक्री और नए निर्माण पर रोक
प्रशासन ने अधिग्रहण वाली जमीन पर अनधिकृत गतिविधियों को रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। अपर जिलाधिकारी की ओर से संबंधित तीनों तहसीलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि चिह्नित गांवों में परियोजना के दायरे वाली जमीन को लेकर खरीद-बिक्री, नए निर्माण और भू-उपयोग में बदलाव जैसी गतिविधियों पर रोक रखी जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान जमीन की मौजूदा स्थिति में अनधिकृत बदलाव न हो और परियोजना के लिए चिह्नित भूमि को लेकर बाद में किसी तरह का विवाद या प्रशासनिक परेशानी पैदा न हो।
किसानों और जमीन मालिकों के लिए भी यह चरण महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिग्रहण के दायरे में आने वाली भूमि का रिकॉर्ड और उसकी वास्तविक स्थिति आगे मुआवजा निर्धारण में अहम भूमिका निभाएगी।
करीब 1,800 किसान होंगे प्रभावित
प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण से करीब 1,800 किसानों की जमीन प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। एक्सप्रेसवे के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया में किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मुआवजे का होगा। गजट अधिसूचना के बाद पात्र भूमि मालिकों को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत मुआवजा दिए जाने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। इससे पहले जमीन की पहचान, गाटा संख्या का सत्यापन और वास्तविक रकबे का मिलान जैसे काम किए जा चुके हैं। ऐसे में अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ प्रभावित किसानों के बीच मुआवजे और जमीन से संबंधित दस्तावेजों को लेकर भी गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
क्या है गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे?
गोरखपुर-शामली हाईस्पीड कॉरिडोर उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से को पश्चिमी हिस्से से बेहतर और तेज सड़क संपर्क से जोड़ना है। गोरखपुर से लेकर शामली तक बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने से पूर्वांचल, मध्य उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा और माल परिवहन को गति मिलने की उम्मीद है।
यह परियोजना सिर्फ दो शहरों को जोड़ने तक सीमित नहीं है। इसके मार्ग में आने वाले कई जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क का लाभ मिल सकता है। एक्सप्रेसवे के आसपास भविष्य में औद्योगिक गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और अन्य कारोबारी गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
पूर्वी यूपी से पश्चिमी यूपी तक तेज होगी कनेक्टिविटी
उत्तर प्रदेश का भौगोलिक विस्तार काफी बड़ा है। ऐसे में पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच तेज सड़क संपर्क राज्य के आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। गोरखपुर-शामली कॉरिडोर के विकसित होने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों और मालवाहक वाहनों के लिए वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे गोरखपुर और आसपास के पूर्वांचल क्षेत्रों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े बाजारों से जोड़ने में मदद मिल सकती है। कृषि उत्पादों की आवाजाही से लेकर औद्योगिक माल के परिवहन तक, बेहतर सड़क नेटवर्क का सीधा प्रभाव लॉजिस्टिक्स लागत और यात्रा समय पर पड़ सकता है।
जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण की राह होगी साफ
फिलहाल परियोजना के लिए सबसे अहम चरण भूमि अधिग्रहण है। 88 गांवों में करीब 541 हेक्टेयर जमीन का सत्यापन पूरा होने और प्रस्ताव को गजट अधिसूचना के लिए भेजे जाने के बाद प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। अब राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने, संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और किसानों को मुआवजा देने की कार्रवाई के बाद परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा। इसके बाद निर्माण से जुड़े काम को आगे बढ़ाने में तेजी आने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के लिए सिद्धार्थनगर जिले में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया का तेज होना परियोजना की प्रगति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। 88 गांव, 541 हेक्टेयर जमीन और करीब 1,800 किसानों से जुड़ी यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक बनने वाला यह हाईस्पीड कॉरिडोर धरातल पर उतरने की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा।