देश की राजधानी की बदलेगी तस्वीर ! 70 गांवों के साथ लाखों लोगों को नया शहर, जाने सरकार का नया मास्टर प्लान ?
Udaipur Times, Delhi Master Plan 2047 : राजधानी दिल्ली के भविष्य के विकास को नई दिशा देने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) का औपचारिक ऐलान किया गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य और बिजली मंत्री मनोहर लाल ने इस महत्वाकांक्षी योजना का अनावरण किया। मास्टर प्लान में नए शहरी क्षेत्रों के विकास के साथ पुराने इलाकों के पुनर्विकास, सस्ते मकानों, बेहतर परिवहन, यमुना के पुनरुद्धार और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है।
इस योजना के तहत दिल्ली में 40 लाख से अधिक नए किफायती घर, करीब 200 वर्ग किलोमीटर में नया शहरी विस्तार और कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। आइए जानते हैं MPD-2047 की 18 बड़ी बातें, जो आने वाले वर्षों में दिल्ली की तस्वीर बदल सकती हैं।
ये पूरा करने के लिए 40 लाख से अधिक नए किफायती मकान विकसित करने की योजना है। ग्रुप हाउसिंग और डीडीए कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम क्षेत्र की सीमा 40,000 वर्ग मीटर से घटाकर 3,000 वर्ग मीटर की गई है। इससे करीब 7 लाख अतिरिक्त घरों के निर्माण का रास्ता खुलेगा।
मेट्रो कॉरिडोर के आसपास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के तहत करीब 18 लाख किफायती मकान विकसित किए जाएंगे। वहीं झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टरों के पुनर्विकास के जरिए 17 लाख से अधिक लोगों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने की योजना है।
200 वर्ग किमी में होगा नया शहरी विस्तार
लैंड पूलिंग नीति के जरिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सुनियोजित शहरी विकास किया जाएगा। इस क्षेत्र में लगभग 12 लाख नए घर और करीब 600 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क विकसित करने की योजना है।
यूईआर-II के आसपास हाई-डेंसिटी विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे दिल्ली के नए इलाकों में आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं विकसित हो सकेंगी।
औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों को आधुनिक बनाने के लिए नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे। यहां बड़े रिटेल स्टोर, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग, को-वर्किंग स्पेस और डेटा सेंटर जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे उद्योगों के साथ-साथ स्टार्टअप और नए कारोबार के लिए भी बेहतर माहौल तैयार करने की कोशिश होगी।
दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत का होगा संरक्षण
दिल्ली की करीब 1,500 ऐतिहासिक और विरासत संपत्तियों के संरक्षण के लिए कल्चरल रिसोर्स मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा।
इन ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण करते हुए उन्हें होटल, म्यूजियम, लाइब्रेरी, ऑफिस और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है।
यमुना का होगा पुनरुद्धार
मास्टर प्लान में यमुना और उसके आसपास के इलाकों को भी खास महत्व दिया गया है। करीब 1,700 हेक्टेयर फ्लडप्लेन के संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए 13 बड़ी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा यमुना के किनारे करीब 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित करने की योजना है।
नरेला को बनाया बड़ा एजुकेशन हब
नरेला को विश्वस्तरीय शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके लिए करीब 138 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है, जहां सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों समेत अन्य शैक्षणिक संस्थान विकसित किए जाएंगे।
द्वारका बनेगा इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट हब
द्वारका को दिल्ली के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आईटी, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और आधुनिक औद्योगिक पार्क जैसी गतिविधियों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
मेट्रो और बसों से लेकर पैदल यात्रियों तक बेहतर होगी कनेक्टिविटी
दिल्ली में परिवहन व्यवस्था को एकीकृत करने के लिए यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी बनाने की योजना है।
मेट्रो, आरआरटीएस, बस और पैदल यात्रियों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब विकसित किए जाएंगे। साथ ही UER-I, UER-II और UER-III के जरिए शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर रहेगा।
कारोबार और निर्माण के नियम होंगे आसान
मास्टर प्लान में कारोबार और निर्माण से जुड़े नियमों को सरल बनाने पर भी जोर दिया गया है। उपयोग की श्रेणियों को 133 से घटाकर 45 करने का प्रस्ताव है।
ऑनलाइन मंजूरी और आसान प्रक्रियाओं के जरिए लोगों और कारोबारियों के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की जाएगी।
पुराने इलाकों का होगा आसान पुनर्विकास
प्लॉट आधारित पुनर्विकास को बढ़ावा देने के लिए 4 हेक्टेयर की न्यूनतम जमीन की शर्त हटाने का प्रावधान किया गया है।
कम से कम 1,000 वर्ग मीटर के भूखंडों पर अधिक FAR प्रोत्साहन देकर व्यावसायिक पुनर्विकास को बढ़ावा देने की योजना है।
1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को मिलेगी राहत
दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में बने आवासीय भवनों को 'जैसा है, जहां है' के आधार पर नियमित करने का प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य करीब 45 लाख लोगों को उनके मकानों से जुड़ी सुरक्षा और मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
24 घंटे जीवंत और सुरक्षित दिल्ली का लक्ष्य
मास्टर प्लान में दिल्ली को अधिक सुरक्षित, समावेशी और 24x7 जीवंत शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में कल्चरल सर्किट और ऐसी जगहों को विकसित किया जाएगा, जहां लोग दिन-रात गतिविधियों का हिस्सा बन सकें।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नेट-जीरो विकास को तवज्ज्व
यमुना की जल गुणवत्ता सुधारने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवरेज नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।
इसके साथ ऊर्जा-कुशल इमारतों, सोलर पैनल, वर्षा जल संचयन, पानी के पुनर्चक्रण और कचरे से संसाधन तैयार करने जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा शहरी प्रशासन
दिल्ली के विकास और प्लानिंग में GIS आधारित सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
इससे जमीन, निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य शहरी सुविधाओं से जुड़े फैसले डेटा के आधार पर लेने में मदद मिलेगी।
बढ़ेया जाएगा दिल्ली का ग्रीन कवर
शहर में पार्कों और हरित क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के लिए ग्रीन कनेक्ट नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
अर्बन फॉरेस्ट, बायोडायवर्सिटी पार्क और इकोलॉजिकल कॉरिडोर के जरिए दिल्ली में हरित क्षेत्र बढ़ाने की योजना है।
प्रशासनिक क्षेत्र को मिलेगा नया ओर बेहतर रूप
दिल्ली के प्रशासनिक और औपचारिक केंद्र को और मजबूत किया जाएगा। कर्तव्य पथ को विश्वस्तरीय सार्वजनिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है।
इसके अलावा करीब 1.25 लाख वर्ग मीटर में युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय विकसित करने का भी प्रावधान है।
सीमावर्ती और लो-डेंसिटी क्षेत्रों का होगा विकास
दिल्ली के सीमावर्ती गांवों और 23 अधिसूचित गांवों के आसपास करीब 150 वर्ग किलोमीटर के लो-डेंसिटी क्षेत्र के लिए समान विकास ढांचा लागू किया जाएगा।
यहां बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के साथ आवासीय, व्यावसायिक, मनोरंजक और जन-सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों को अनुमति देने की योजना है।
दिल्ली को ज्यादा योजनाबद्ध और रहने योग्य बनाने पर जोर
MPD-2047 का सबसे बड़ा लक्ष्य दिल्ली के मौजूदा क्षेत्रों के पुनर्विकास के साथ-साथ नए शहरी क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है। इसमें आवास, परिवहन, रोजगार, पर्यावरण, शिक्षा, उद्योग और सार्वजनिक सुविधाओं को एक साथ विकसित करने पर जोर दिया गया है।कुलमिलाकर,कहें तो दिल्ली मास्टर प्लान 2047 का फोकस सिर्फ नए निर्माण पर नहीं, बल्कि पुराने इलाकों के पुनर्विकास, सस्ते आवास, बेहतर ट्रांसपोर्ट, रोजगार, पर्यावरण और आधुनिक शहरी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने पर है।
