पढ़ाई से टूट चुका था नाता, पति ने बढ़ाया हौसला, 37 साल की उम्र में बनीं KVS टीचर

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पढ़ाई से टूट चुका था नाता, पति ने बढ़ाया हौसला, 37 साल की उम्र में बनीं KVS टीचर

Udaipur Times, KVS Teacher Pretty Sharma : जब किसी महिला को अपने पति और परिवार का साथ मिलता है, तो उसका आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है। वह डरने के बजाय हर चुनौती का डटकर सामना करती है। ऐसी ही कहानी है उत्तर प्रदेश की प्रीति शर्मा की, जिन्होंने उस उम्र में केंद्रीय विद्यालय में सरकारी टीचिंग की नौकरी हासिल की, जब ज़्यादातर लोग उम्मीद छोड़ चुके होते हैं। अपने आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग की बदौलत, प्रीति शर्मा की सफलता की कहानी देश भर की अनगिनत महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

हर कदम पर पति का साथ

प्रीति शर्मा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की रहने वाली हैं। शादी के बाद वह दिल्ली आ गईं; उनके ससुराल वाले बागपत ज़िले के बरवाला गाँव के रहने वाले हैं। शादी के समय उनके पास बैचलर डिग्री थी। हालाँकि, शादी के बाद उन्होंने न केवल मास्टर डिग्री हासिल की, बल्कि केंद्रीय विद्यालय में टीचर बनने के लिए ETT कोर्स भी पूरा किया।

वह अपनी मौजूदा सफलता का श्रेय अपने पति के सहयोग को देती हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पति हर कदम पर मेरे साथ खड़े रहे... उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि मैं यह कर सकती हूँ।"

9 साल बाद फिर से किताबें उठाईं

प्रीति के लिए अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करना आसान नहीं था। शादी के बाद, घर की ज़िम्मेदारियों और दो बेटियों की परवरिश के बीच पढ़ाई-लिखाई से उनका नाता लगभग टूट चुका था; नौ साल का लंबा गैप आ गया था। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी। प्रीति ने बताया कि नौ साल के उस गैप के बाद, जब 2019 में KVS और CTET परीक्षाओं की घोषणा हुई, तो उन्होंने फिर से किताबें उठाईं।

कई बार फॉर्म भरे लेकिन परीक्षा नहीं दे पाईं

प्रीति ने पहले भी कई बार आवेदन फॉर्म भरे थे, लेकिन अलग-अलग कारणों से परीक्षा में शामिल नहीं हो पाई थीं। इस बार उनके पति ने उन्हें प्रोत्साहित किया और कोचिंग का इंतज़ाम किया। उनकी ननद और ससुराल वालों ने भी पूरा सहयोग दिया, जिससे उन्हें घर के कामों के साथ-साथ अपनी तैयारी पर ध्यान देने का मौका मिला। 

दिन में पढ़ाई नहीं की

प्रीति बताती हैं कि वह दिन में पढ़ाई नहीं करती थीं क्योंकि वह कई कामों में व्यस्त रहती थीं। इसके अलावा, वह एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थीं। इसलिए, उन्होंने अपनी तैयारी के लिए रात का समय चुना। वह बताती हैं कि वह रात को 10:00 या 10:30 बजे अपनी किताबों के साथ बैठती थीं और पूरी रात पढ़ाई करती थीं, जिससे उन्हें अक्सर मुश्किल से दो या तीन घंटे की ही नींद मिल पाती थी।

सख्त रूटीन का पालन करके KVS में 6वीं रैंक हासिल की

यह उनके परिवार के सपोर्ट और अटूट भरोसे का नतीजा था कि 37 साल की उम्र में प्रीति ने न सिर्फ KVS परीक्षा पास की, बल्कि पूरे देश में 6वीं रैंक भी हासिल की। ​​इसे पाने के लिए उन्होंने एक मुश्किल रूटीन का पालन किया, जो नीचे बताया गया है:

ऑनलाइन क्लासेस: उन्होंने YouTube वीडियो देखकर और नोट्स बनाकर तैयारी की।

कलर-कोडेड नोट्स: जो कुछ भी उन्होंने पढ़ा था उसे लंबे समय तक याद रखने के लिए, उन्होंने अलग-अलग रंगों के पेन का इस्तेमाल किया, जिससे मुख्य बातें याद रखना आसान हो गया।

रात में पढ़ाई: घर की जिम्मेदारियों और दिन में प्राइवेट स्कूल की नौकरी के कारण, वह रात में पढ़ाई करती थीं। इससे उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देते हुए बाकी चीजों को भी मैनेज करने में मदद मिली।

मॉक इंटरव्यू: अपनी झिझक दूर करने के लिए प्रीति ने कई मॉक इंटरव्यू में हिस्सा लिया। इससे उनका कॉन्फिडेंस बढ़ा और असल इंटरव्यू के दौरान यह बहुत फायदेमंद साबित हुआ।

KVS परीक्षा में 180 में से 155 अंक हासिल किए

प्रीति शर्मा ने KVS परीक्षा में 180 में से 155 अंक हासिल करके 6वीं रैंक प्राप्त की। उन्होंने बताया कि असफलता के दौर में भी, जब कुछ लोग उनकी पीठ पीछे ताने मारते थे, तब भी उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा, "चाहे शादीशुदा महिला को अपने पति का सपोर्ट मिले या न मिले, उसे अपने लिए समय जरूर निकालना चाहिए। 

दिन भले ही हमारा न हो, लेकिन रात तो हमारी है।" प्रीति शर्मा की सफलता यह साबित करती है कि अगर किसी का इरादा पक्का हो, तो किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है।

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