नाटक ‘चार कोट’ में व्यवस्थाओं पर कटाक्ष
शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में आयोजित रंगशाला में बीकानेर के कलाकारों ने ए.वी. कमल द्वारा लिखित व सुधेश व्यास द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘चारकोट’’ का मंचन किया। नाटक में यह दर्शाया गया कि चार कोट जो वास्तव में जनता की सेवा और सुरक्षा के प्रतीक बन चुके हैं उनसे आम आदमी सहमा हुआ सा है। ये सब आज बिजनेस सिम्बल बन चुके हैं। वर्तमान परिस्थितियों में किस प्रकार आदमी तंत्र की व्यवस्था में भटकता हुआ आज की राजनीति में किस प्रकार युज एण्ड थ्रो की तरह है और उसकी भावनाओं को किस प्रकार सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘‘रंगशाला’’ में रविवार को बीकानेर के रंगकर्मी सुधेश व्यास द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘चार कोट’’ में व्यवस्थाओं पर करारा व्यंग्य किया गया।
शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में आयोजित रंगशाला में बीकानेर के कलाकारों ने ए.वी. कमल द्वारा लिखित व सुधेश व्यास द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘चारकोट’’ का मंचन किया। नाटक में यह दर्शाया गया कि चार कोट जो वास्तव में जनता की सेवा और सुरक्षा के प्रतीक बन चुके हैं उनसे आम आदमी सहमा हुआ सा है। ये सब आज बिजनेस सिम्बल बन चुके हैं। वर्तमान परिस्थितियों में किस प्रकार आदमी तंत्र की व्यवस्था में भटकता हुआ आज की राजनीति में किस प्रकार युज एण्ड थ्रो की तरह है और उसकी भावनाओं को किस प्रकार सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
सामाजिक सरोकारिता के चार कोट की गाथाओं को नाटक में विभिन्न दृश्यबंधों के माध्यम से रूपायित किया गया। नाटक के मूल में आदमी का सरकार, कानून एवं राजनीति में व्याप्त जटिल खामियों एवं विद्रूपताओं के प्रति एक दर्द है जिसे व्यंग्यात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक के चुटीले संवाद जहां दर्शकों को गुदगुदाने मं सफल रहे वहीं उनें पाशर्व में निहित कटाक्ष ने दर्शकों में एक नये विचार का संचरण किया। कलाकारों में आम आदमी के किरदार में अशोक व्यास, वकील नवल किशोर, नेता किशन रंगा पुलिस वाला उत्तम सिंह का अभिनय श्रेष्ठ बन सका वहीं कक्कू सिंह की भूमिका में सुनील जोशी लिलि उषा व्यास का अभिनय चरित्रानुकूल बन सका। अन्य कलाकारों में जितेन्द्र पुरोहित, विकास शर्मा, राजेन्द्र झुंझ, रवि व्यास, मदन मारू, सुमित मोहिल, शिव सुथार, अमित सोनी, मनोज राजपाल शामिल है।
