बरसात में भी चलता रहा मंचन दर्शको ने ली छतरी की शरण

नाट्यांश सोसाइटी ऑफ ड्रामेटिक एंड परफोर्मिंग आर्ट्स द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के मद्देनज़र नुक्कड नाटक ‘‘ऐसा भी होता है!’’ के दो मंचन किये गये। इस नुक्कड़ नाटक का पहला मंचन कल शाम फतह सागर पाल पर किया गया और दुसरा मंचन आज सवेरे गुलाब बाग में हुआ। कल शाम को फतह सागर पर मंचन के दौरान तेज बारिश शुरू हो गई इस पर सभी दर्शक पाल पर बनी छतरी में चले गये और कलाकारों ने भीगते हुये मंचन जारी रखा।

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बरसात में भी चलता रहा मंचन दर्शको ने ली छतरी की शरण

नाट्यांश सोसाइटी ऑफ ड्रामेटिक एंड परफोर्मिंग आर्ट्स द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के मद्देनज़र नुक्कड नाटक ‘‘ऐसा भी होता है!’’ के दो मंचन किये गये। इस नुक्कड़ नाटक का पहला मंचन कल शाम फतह सागर पाल पर किया गया और दुसरा मंचन आज सवेरे गुलाब बाग में हुआ।

कल शाम को फतह सागर पर मंचन के दौरान तेज बारिश शुरू हो गई इस पर सभी दर्शक पाल पर बनी छतरी में चले गये और कलाकारों ने भीगते हुये मंचन जारी रखा।

नाटक के माध्यम से कलाकारों ने दिखाया कि साफ-सफाई रखना हमारी जिम्मेंदारी के साथ साथ नैतिक कर्तव्य भी है। हमें हमेशा ही सरकार और दुसरो की गलती नज़र आती है। हमें लगता है कि अगर हमारी गली से साफ-सफाई नही हुई है तो इसमें सरकार का दोष है। लेकिन हम कभी भी ये नही देखते कि वहाँ पर कचरा किसने डाला है? उस जगह को किसने गंदा किया है? बरसात में भी चलता रहा मंचन दर्शको ने ली छतरी की शरण

ऐसी ही सभी बातों को ध्यान में रखते हुये इस नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से बताया गया है कि कैसे छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रख कर हम अपने देश को और अपने आप को ज्यादा साफ और ज्यादा स्वच्छ बना सकते है।

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नाटक के संयोजक और निर्देशक मोहम्मद रिजवान मन्सुरी ने बताया कि नाटक का लेखन अमित श्रीमाली ने किया। कलाकारों में ईशा जैन, अगस्त्य हार्दिक नागदा, राघव गुर्जरगौड़, अंशुल, दिशा सक्सेना, चक्षु सिंह रूपावत, महेश जोशी, पीयूष गुरुनानी और मोहम्मद रिज़वान मंसूरी नें अभिनय किया। साथ ही अमित श्रीमाली और अश्फाक नुर खान का भी सहयोग प्राप्त हुआ।

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