कुल की रस्म के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन

कुल की रस्म के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन

शहर के ब्रह्मपोल बाहर स्थित दरगाह हजरत इमरत रसूल शाह बाबा के चल रहे तीन दिवसीय 129

 

कुल की रस्म के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन

शहर के ब्रह्मपोल बाहर स्थित दरगाह हजरत इमरत रसूल शाह बाबा के चल रहे तीन दिवसीय 129वें उर्स का समापन पीर मोहम्मद अली हाशमी साहब नागौरी (झुंझुंनू) की सरपरस्ती में सोमवार को बाद नमाज अस्र सलातो-सलाम व दुआ के साथ हुआ।

दरगाह कमेटी के नायब सदर मोहम्मद रफीक ने बताया कि हजरत इमरत रसूल शाह बाबा के तीन दिवसीय के चलते उर्स में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने बड़ी अकीदत के साथ शिरकत की। साथ ही उर्स में उदयपुर शहर व आस-पास के इलाकों से काफी संख्या में जायरीनों ने शिरकत की। विदेशी पर्यटकों भी इस अवसर पर उपस्थित थी। मजार पर चादर शरीफ व अकीदत के फुल पेश किए। जायरीनों के लिए लंगर व तबर्रूक का वितरण किया गया। साथ ही मस्तान बाबा ट्रस्ट की ओर से चादर शरीफ पेश की गई।

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प्रातः हुई कुरआन ख्वानी:

उर्स के तीसरे दिन के कार्यक्रमों का आगाज सोमवार प्रातः 8.30 पर कुरआन ख्वानी के साथ हुआ जिसमें कलामे पाक की तिलावत की गई। दोपहर बाद नमाज जौहर महफिल समां का आयोजन किया गया जिसमें कव्वाल पार्टियों ने नातिया कलाम व सूफियाना कलाम पेश किए।

दोपहर में महफिले समां का आयोजन

महफिले समां का आगाज जयपर के कव्वाल गुलाम हुसैन जयपुरी की पार्टी ने किया। जिन्होंने करार दिल को खुदा की कसम नहीं होता, नजर के सामने जब तक सनम नहीं होता….. पढ़ा। भोपाल के कव्वाल मुकर्रम वारसी ने बहिश्त में पहुंचकर भी दिल को करार नहीं, ये कोई और जगह है मकामे यार नहीं…., शाहे इमरत रसूल चिश्तियाँ शान है, इनके रोजे पर हर एक कुरबान है……पढ़ा। जावरा के कव्वाल मुजम्मिल हुसैन फजल हुसैन ने देख ले शक्ल मेरी जिसका आईना हुं मैं, यार की शक्ल हुं और यार में फना हुं मैं….. सहित कव्वाल पाटियों ने कई कलाम पेश किए जिस पर श्रोताओ ने खुब दाद दी।

दस्तारबंदी की रस्म अदा की गई

दरगाह कमेटी ने पीर मोहम्मद अली हाशमी सा. नागौरी, दरगाह के गद्दीनशीन इकबाल हुसैन, सज्जादानशीन शहीदेनाज अब्दुल रशीद, सदर मोहम्मद युसफ हाफिज मेहमुद्दुजमा की दस्तारबंदी कर रस्म अदा की गई।

रंग, सलातो सलाम के साथ हुआ उर्स का समापन:

उर्स के अन्त में सभी महफिल पार्टियों ने मिलकर हजरत अमीर खुसरों का लिखा हुआ रंग पढा। जिसके बाद मोहम्मद सिद्दीक, हाजी मोहम्मद बक्ष ने सलाम पढा। कुल की रस्म में कलामे पाक की तिलावत इमाम हाफिज मेहमूदुज्जमा ने की। पीर मोहम्मद अली हाशमी सा. नागौरी ने जायरीनों की सलामती के साथ मुल्क में शांति व भाईचारे के लिए दुआएं की। उसके बाद मौजूद लोगों ने कुल के छींटे लिए और सभी ने एक दूसरे के गले मिलकर उर्स की मुबारक बाद दी। इस मौके पर महिलाएं भी मौजूद रही। इस अवसर पर मुबारिक हुसैन, हाजी मुष्ताक शेख, जाकिर हुसैन, शब्बीर हुसैन, अब्दुल हमीद, मोहसिन हैदर, अब्दुल अजीज सिंधी, मांगु खान, मोहम्मद सलीम, जाकिर मंसूरी मौजूद रहे।

दरगाह कमेटी के सदर मोहम्मद युसुफ ने उर्स की व्यवस्था में विभिन्न विभागों से मिले सहयोग के लिए पुलिस प्रषासन, नगर निगम, विद्युत विभाग व मीडिया द्वारा दये गये कवरेज के लिए धन्यवाद दिया।

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