योमे-ए-आशूरा पर जोश-खरोश के साथ निकला मातमी जुलूस
दाऊदी बोहरा जमात द्वारा मोहर्रम की १०वी तारीख पर २ नवम्बर रविवार को बोहरवाड़ी के विभिन्न मोहल्लों में या हुसैन-या हसन के नारों की गूंज के साथ हज़रत इमाम हुसैन की याद में जोश-खरोश के साथ मातमी जुलूस निकाला गया।

दाऊदी बोहरा जमात द्वारा मोहर्रम की १०वी तारीख पर २ नवम्बर रविवार को बोहरवाड़ी के विभिन्न मोहल्लों में या हुसैन-या हसन के नारों की गूंज के साथ हज़रत इमाम हुसैन की याद में जोश-खरोश के साथ मातमी जुलूस निकाला गया।
जिसमें दाऊदी बोहरा जमात के सैकड़ों की तादाद में पुरूषो-बच्चों ने भाग लिया। नोहों और मर्सियाख्वानी में कर्बला में शहीद हुए लोगों को याद किया जा रहा था।योमे-ए-आशूरा के मौके पर समुदाय के सभी लोगों ने रोजा रखा और शाम के वक्त एक साथ रोजा इफ्तारी में व नमाज में भाग लिया। अलसुबह कुर्बानी की रस्म भी अदा की गई।
यह जानकारी देते हुए दाऊदी बोहरा जमात के प्रवक्ता अनिस मियांजी ने बताया कि मोहर्रम की १०वी तारीख योमे-ए-आशूरा के मौके पर रविवार को निकाले गये मातमी जुलूस की शुरूआत दोपहर बाद करीब २ बजे मोयदपुरा मस्जिद से हुई।
तत्पश्चात् जुलूस विभिन्न मोहल्लों में होता हुआ वजीहपुरा मस्जिद जाकर सम्पन्न हुआ। जुलूस के दौरान सड़क के दोनों किनारों पर दाऊदी बोहरा जमात की महिलाएं काले लिबास में मौजुद रहकर गम का इजहार कर रही थी। जुलूस में सबसे आगे अलम लिये बच्चे चल रहे थे उनके पीछे जमात के लोग थे और मुज्जमिल मुजाहिर पार्टी, मौयज भाई एवं पार्टी जुलुस में मातमी नोहे पढ़ते हुए चल रहे थे।
माहौल में जोश-खरोश के साथ गम का आलम भी था। जुलूस वजीहपुरा मस्जिद में पहुंचकर मजलिस में तब्दील हो गया। जहांमुल्ला पीर अली ने हजरत ईमाम हुसैन और कर्बला में शहीद हुए लोगों को याद करते हुए तकरीर पेश की।
इसके बाद सभी ने सामुहिक नमाज अदा की और सामुहिक रोजा इफ्तारी में हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान जगह-जगह बनायी गयी सबीलों में शर्बत, दुध, कॉफी, मिठाई, फल आदि के प्रसाद वितरित किये गये। रात को वजीहपुरा मस्जिद में शामे-ए-गरीबां का आयोजन हुआ।
