समय के तानों ने बनाया मजबूत ! पिता के सपने को किया पूरा, कड़ी मेहनत से आयुषी बनी DSP

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समय के तानों ने बनाया मजबूत ! पिता के सपने को किया पूरा, कड़ी मेहनत से आयुषी बनी DSP

Udaipur Times, UPPSC Success Story of Ayushi Singh  : कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो मुश्किल हालातों के बीच भी आगे बढ़ने का हौसला देती हैं। आयुषी सिंह की कहानी भी संघर्ष, हिम्मत और सफलता की ऐसी ही कहानी है। साल 2015 की एक घटना ने उनके बचपन के सपनों और खुशहाल जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया, जब कोर्ट परिसर में उनके पिता योग्रेंद सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 

पिता की हत्या के बाद परिवार को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा और आयुषी को समाज के तानों का भी सामना करना पड़ा। लोगों ने उन्हें यहां तक कह दिया कि वह 'क्रिमिनल की बेटी' हैं और आगे चलकर कुछ नहीं कर पाएंगी। हालांकि, इन बातों से टूटने के बजाय आयुषी ने अपने पिता के सपने को अपना लक्ष्य बना लिया। पहले प्रयास में असफल होने के बाद उन्होंने मेहनत जारी रखी और आखिरकार UPPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर पुलिस उपाधीक्षक यानी DSP का पद हासिल किया।

बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थीं आयुषी सिंह

आयुषी सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के एक खुशहाल परिवार में हुआ था। एक वीडियो इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके पिता योग्रेंद सिंह चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर सरकारी अधिकारी बने। वह आयुषी की पढ़ाई को लेकर काफी संवेदनशील थे और बेटी को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित करते थे। आयुषी भी बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थीं और अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करती थीं। उनका लक्ष्य शुरू से ही बड़ा होकर अधिकारी बनने का था।

पिता की हत्या ने बदल दी जिंदगी

आयुषी की जिंदगी में साल 2015 वह काला दौर लेकर आया, जिसने उनके परिवार को पूरी तरह बदल दिया। कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े उनके पिता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पिता की इस तरह हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। आयुषी के लिए भी यह बेहद मुश्किल समय था। पिता के जाने के साथ ही परिवार की जिम्मेदारियां और भविष्य को लेकर चिंताएं उनके सामने खड़ी हो गईं।

इस मुश्किल दौर में उन्हें समाज के तानों का भी सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने उन्हें 'क्रिमिनल की बेटी' कहकर ताना दिया और कहा कि वह भी आगे चलकर उसी राह पर जाएंगी और जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगी। ऐसी बातें आयुषी के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाली थीं, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और इन बातों को अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया।

पिता के अधूरे सपने को बनाया जिंदगी का लक्ष्य

पिता की हत्या के बाद भी आयुषी ने अधिकारी बनने का अपना संकल्प नहीं छोड़ा। 11वीं की परीक्षाओं के कठिन दौर से गुजरने के बाद उन्होंने अपने पिता के अधूरे सपने को ही अपने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बना लिया। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दिल्ली यूनिवर्सिटी पहुंचीं और वहां से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान उनका विश्वास और मजबूत हुआ कि सिविल सेवा में जाकर ही वह अपने पिता के सपने को पूरा कर सकती हैं।

आयुषी के लिए अधिकारी बनना सिर्फ एक करियर का विकल्प नहीं था, बल्कि यह उनके पिता के सपने को पूरा करने का जरिया बन चुका था। वह चाहती थीं कि उनकी सफलता से उनके पिता का नाम और सम्मान आगे बढ़े। इसी सोच के साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।

पहले प्रयास में मिली असफलता, लेकिन नहीं मानी हार

सिविल सेवा की तैयारी के दौरान आयुषी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहले प्रयास में प्रीलिम्स परीक्षा में असफलता मिली, जिसने उन्हें निराश जरूर किया, लेकिन उन्होंने तैयारी छोड़ने का फैसला नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने अपनी कमियों को समझकर दोबारा मेहनत शुरू की। इस दौरान उनके भाई ने भी उनका सहयोग किया।

आयुषी ने उत्तराखंड सिविल सेवा परीक्षा और UPPSC समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया। लगातार प्रयास और मेहनत के बाद आखिरकार उन्हें वह सफलता मिली, जिसका सपना उन्होंने अपने पिता के साथ देखा था।

UPPSC में 62वीं रैंक हासिल कर बनीं DSP

अप्रैल 2023 में घोषित UPPSC 2022 के रिजल्ट में आयुषी सिंह ने सफलता हासिल की। उन्होंने 62वीं रैंक हासिल की और पुलिस उपाधीक्षक यानी DSP के पद के लिए चयनित हुईं। यह उपलब्धि उनके लिए इसलिए भी खास थी क्योंकि जिस समाज ने कभी उन्हें 'क्रिमिनल की बेटी' कहकर उनकी काबिलियत पर सवाल उठाए थे, उसी समाज के सामने उन्होंने अपनी मेहनत और सफलता से जवाब दिया।

आयुषी की कहानी बताती है कि मुश्किल परिस्थितियां इंसान के रास्ते में रुकावट जरूर बन सकती हैं, लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत जारी रखी जाए तो सफलता हासिल की जा सकती है। पिता की हत्या के बाद मिले सामाजिक तानों और शुरुआती असफलता के बावजूद आयुषी ने अपने सपने को नहीं छोड़ा और आखिरकार DSP बनकर अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा किया।

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