भाखड़ा और पोंग बांध का घटा जलस्तर ! पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में हो सकता है पानी व बिजली संकट

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भाखड़ा और पोंग बांध का घटा जलस्तर ! पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में हो सकता है पानी व बिजली संकट

Udaipur Times, Haryana News : पंजाब, हरियाणा व राजस्थान वासियो के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है मानसून इस समय अपने अंतिम पड़ाव में है बावजूद इसके अगर पिछले साल से तुलना करें तो भाखड़ा का जलस्तर 37 फीट कम है। इसी तरह पोंग बांध में भी 23 फीट कम पानी है जिससे आने वाले सीजन में तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान व दो केंद्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़ और दिल्ली को बिजली और पानी के गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।

जून, जुलाई व अगस्त में मानसून कमजोर रहा है और सितंबर में भी अब तक यही स्थिति है। यही कारण है कि आने वाले दिनों में यह संकट व गहरा सकता है। इसका असर खेती पर भी पड़ सकता है क्योंकि तीनों राज्य सिंचाई के लिए भाखड़ा बांध पर निर्भर हैं।

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार भाखड़ा का जलस्तर अभी 1641.20 फीट दर्ज किया गया है जो पिछले साल के दौरान 1678.97 फीट दर्ज किया गया था। उस दौरान बांध में पहाड़ों से 95,435 क्यूसेक पानी आ रहा था जबकि इस समय सिर्फ 42,701 क्यूसेक पानी आ रहा है।

अगर पोंग बांध की बात करें तो उसका जलस्तर इस समय 1371.16 फीट है जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1394.51 फीट दर्ज किया गया था। पिछले साल बांध में 1,32,595 क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी जबकि अब बांध का जलस्तर 1371.16 फीट है और 20,102 क्यूसेक पानी आ रहा है।

पिछले साल बांध की तबाही के कारण इस वर्ष सभी राज्यों को खरीफ सीजन के दौरान सिंचाई के लिए पूरा पानी दिया गया ताकि इस साल मानसून सीजन के दौरान बाढ़ खतरा न बने लेकिन इस साल सूखे ने सरकार की चिंता बढ़ा दी। अब राज्यों की मांग बढ़ गई है जो खेती के लिए अधिक पानी चाहते हैं लेकिन आने वाले रबी और खरीफ सीजन में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अगस्त भी पूरी तरह से रहा सूखा : प्रदेश में जून व जुलाई के बाद अगस्त में भी उम्मीद मुताबिक बारिश नहीं हुई है, अगस्त के दौरान 32 फीसदी कम बारिश हुई। बारिश की कमी के कारण पंजाब देश के उन 4 राज्यों में शामिल हो गया है, जहां अगस्त में सबसे कम बारिश हुई है। इसका असर धान की फसल पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। संवाद

गहरा सकता जल विवाद

भाखड़ा में जिस तरह से इस बार जलस्तर कम चल रहा है, उससे आगे संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पानी की आपूर्ति कम हो सकती है जिससे जल विवाद गहरा सकता है। पहले भी पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर विवाद हो चुका है। साथ ही बिजली के उत्पादन भी असर पड़ेगा।

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