Udaipur Times, Land measurement in UP to go digital : उत्तर प्रदेश में भूमि मापन और सीमांकन की प्रक्रिया अब प्रौद्योगिकी के माध्यम से नई गति प्राप्त कर रही है। राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए योगी सरकार राज्य भर में बड़े पैमाने पर जीएनएसएस रोवर तकनीक का उपयोग कर रही है। राज्य में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवरों में से 350 पहले ही तहसीलों को आपूर्ति किए जा चुके हैं और इनके माध्यम से कार्य प्रारंभ हो चुका है।
भूमि मापन को बनाएगा अधिक सटीक और डिजिटल प्रणाली
वहीं, 10 स्थानीय स्थानीय निकायों (यूएलबी) में मानचित्र परियोजनाओं में 143 रोवरों का उपयोग किया जा रहा है। हरदोई स्थित केटीएस (समेकन प्रशिक्षण केंद्र) में दो रोवर तैनात किए गए हैं, जबकि लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए नौ रोवरों का उपयोग करके सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। यह बदलाव भूमि मापन को पारंपरिक तरीकों से हटाकर एक तेज, अधिक सटीक और डिजिटल प्रणाली की ओर ले जा रहा है।
मानचित्र परियोजनाओं के लिए 143 रोवर तैनात किए गए
राजस्व बोर्ड की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि जीएनएसएस रोवरों की तैनाती केवल तहसीलों तक ही सीमित नहीं है। तहसीलों को सीधे आपूर्ति किए जाने के बाद, 350 रोवरों का उपयोग फील्ड सर्वे के लिए किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, 10 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में मानचित्र परियोजनाओं के लिए 143 रोवर तैनात किए गए हैं। हरदोई स्थित केटीएस को भी दो रोवर उपलब्ध कराए गए हैं।
सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम अब पूरे हो चुके
वहीं, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए नौ रोवरों का उपयोग प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए किया गया था और सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम अब पूरे हो चुके हैं। इसका अर्थ यह है कि राजस्व विभाग में प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ-साथ, इसे संचालित करने के लिए कर्मियों को प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया गया है।
1 जुलाई से 15 अगस्त तक एक विशेष मेगा अभियान चलाया गया
कंचन वर्मा ने बताया कि भूमि सीमाओं और माप से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटान के लिए धारा-24 के तहत 1 जुलाई से 15 अगस्त तक एक विशेष मेगा अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान का शुभारंभ किया। अभियान के प्रभावी और एकसमान कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की। अब आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक के सहयोग से भूमि संबंधी कार्यों की तकनीकी क्षमता में और वृद्धि हुई है।
डिजिटल रिकॉर्ड से पारदर्शिता बढ़ेगी
रोवर्स का उपयोग करके उत्पन्न डिजिटल डेटा भूमि रिकॉर्ड और मानचित्रण प्रणालियों को सुव्यवस्थित करने में मदद कर रहा है। यह रिकॉर्ड की गुणवत्ता जांच की सुविधा भी देता है और डेटा ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित करता है। भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कैडस्ट्राल मैपिंग, मैपिंग परियोजनाओं और जीआईएस-आधारित मैपिंग में इसका अनुप्रयोग राजस्व प्रशासन के आधुनिकीकरण में सहायता कर रहा है।