यहां शुरू होगा दुनिया का सबसे बड़ा लो-कार्बन प्रोजेक्ट ! अंबुजा सीमेंट्स और Leilac की हुई साझेदारी
Ambuja Cements Leilac Deal: देश की प्रमुख सीमेंट कंपनी अंबुजा सीमेंट्स (Ambuja Cements) ने ब्रिटेन की तकनीकी कंपनी लीलैक लिमिटेड (Leilac Limited) के साथ मिलकर गुजरात के कच्छ जिले में एक अत्याधुनिक कम-कार्बन उत्सर्जन वाले सीमेंट संयंत्र की स्थापना की घोषणा की है। इस परियोजना का उद्देश्य सीमेंट उद्योग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और भारत को टिकाऊ निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है।
सीमेंट उद्योग के सामने बढ़ती पर्यावरणीय चुनौती
भारत में तेजी से बढ़ रहे निर्माण और बुनियादी ढांचा विकास के कारण सीमेंट की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, इसके साथ ही इस क्षेत्र से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, दुनिया भर में होने वाले कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में सीमेंट उद्योग की हिस्सेदारी करीब आठ प्रतिशत है। ऐसे में इस क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
नई तकनीक से घटेगा कार्बन उत्सर्जन
इस साझेदारी के तहत कच्छ में बनने वाले संयंत्र में कम उत्सर्जन वाली चूना और सीमेंट तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक सीमेंट निर्माण के दौरान निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को अलग कर उसे सुरक्षित रूप से संग्रहित या दोबारा उपयोग करने में मदद करती है। अंबुजा सीमेंट्स का मानना है कि यह तकनीक भारतीय परिस्थितियों में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है और भविष्य में अन्य संयंत्रों में भी इसे अपनाया जा सकता है।
पूरे उद्योग के लिए बन सकता है मॉडल
गुजरात में प्रस्तावित यह परियोजना सिर्फ एक सीमेंट संयंत्र तक सीमित नहीं रहेगी। यदि यह सफल होती है तो देश के अन्य सीमेंट कारखानों में भी इस तकनीक को लागू किया जा सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय सीमेंट उद्योग पारंपरिक उत्पादन पद्धतियों से आगे बढ़कर आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को तेजी से अपनाने लगेगा।
भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को मिलेगा बल
भारत ने वर्ष 2070 तक शून्य-शुद्ध कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में सीमेंट उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है, क्योंकि देश के बुनियादी ढांचे के निर्माण में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है। कच्छ परियोजना की सफलता हरित तकनीकों में निवेश को बढ़ावा देने और औद्योगिक क्षेत्रों में बदलाव की नई राह खोल सकती है।
ग्रीन सीमेंट निर्यात की भी बन सकती हैं संभावनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कम-कार्बन सीमेंट तकनीक व्यावसायिक रूप से सफल होती है, तो भारत पर्यावरण-अनुकूल सीमेंट के उत्पादन और निर्यात का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।
उद्योग की नजर इस परियोजना पर
अंबुजा सीमेंट्स और लीलैक लिमिटेड की यह साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया भर में भारी उद्योगों को पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के साथ विकास का नया मॉडल अपनाने की जरूरत महसूस हो रही है। कच्छ में बनने वाला यह संयंत्र भारत की हरित औद्योगिक यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ सकता है और भविष्य में अन्य उद्योगों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
