सोलर सेक्टर में होने वाला है बड़ा बदलाव, 40 प्रतिशत ज्यादा बिजली बना पायेंगे ये सोलर पैनल

 | 
सोलर सेक्टर में होने वाला है बड़ा बदलाव, 40 प्रतिशत ज्यादा बिजली बना पायेंगे ये सोलर पैनल 

Udaipur Times, Solar Panel : दुनिया भर में घरों में कई ऐसे उपकरण इस्तेमाल होते हैं जो सिर्फ़ बिजली से चलते हैं। जिन घरों में बिजली की खपत ज़्यादा होती है, वहां अक्सर बिजली का बिल भी बहुत ज़्यादा आता है। इस समस्या को हल करने के लिए, अब कई घरों में सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। भारत में 'PM-सूर्या घर: मुफ़्त बिजली योजना' लागू की जा रही है, जिसके तहत सोलर पैनल लगाने के लिए सरकारी सब्सिडी दी जाती है। सोलर पैनल टेक्नोलॉजी में भी काफ़ी तरक्की हो रही है।

बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, अमेरिका की टेक और एनर्जी कंपनियाँ मिलकर ऐसे एडवांस्ड सोलर पैनल ला रही हैं जो बिजली बनाने और लंबे समय तक चलने, दोनों मामलों में पारंपरिक सिलिकॉन पैनल से बेहतर हैं। आइए जानते हैं कि ये नए सोलर पैनल क्या खास बनाते हैं और ये पुराने मॉडल से कैसे अलग हैं।

नई टैंडेम सोलर टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

इन नए, एडवांस्ड सोलर पैनल को चलाने वाली मुख्य टेक्नोलॉजी को 'पेरोव्स्काइट-सिलिकॉन टैंडेम' टेक्नोलॉजी कहा जाता है। जहाँ पारंपरिक सोलर पैनल में सिर्फ़ एक परत होती है, वहीं इन नए टैंडेम पैनल में रोशनी सोखने वाली दो अलग-अलग परतें होती हैं। 

ऊपरी परत पेरोव्स्काइट क्रिस्टल से बनी होती है

जो सूरज की रोशनी के हाई-एनर्जी स्पेक्ट्रम को पकड़ती है, जबकि नीचे वाली पारंपरिक सिलिकॉन परत बाकी रोशनी को सोख लेती है। दो परतों वाला यह डिज़ाइन पैनल को सूरज की रोशनी के एक बड़े हिस्से को बिजली में बदलने में मदद करता है, जिससे पुरानी टेक्नोलॉजी की तुलना में इनकी क्षमता 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

40 प्रतिशत तक ज़्यादा बिजली बनाना

इन नए अमेरिकी सोलर पैनल का एक बड़ा फ़ायदा यह है कि ये कम जगह में भी काफ़ी ज़्यादा बिजली बना सकते हैं। पारंपरिक पैनल की तुलना में, ये उतनी ही जगह में लगभग 25 से 40 प्रतिशत ज़्यादा बिजली बनाते हैं, जिसका मतलब है कि आपकी सभी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कम पैनल की ज़रूरत होती है। पहले यह चिंता थी कि नमी और गर्मी के संपर्क में आने पर पेरोव्स्काइट मटीरियल जल्दी खराब हो जाएगा।

हालाँकि, अमेरिकी कंपनियों ने इनोवेटिव इंजीनियरिंग और सुरक्षात्मक कोटिंग के ज़रिए इस कमी को पूरी तरह से दूर कर लिया है। अब लैब और फ़ील्ड टेस्ट से यह साबित हो गया है कि ये नए टैंडेम पैनल बिना किसी समस्या के लंबे समय तक धूप, बारिश और खराब मौसम का सामना कर सकते हैं, और इनकी सालाना खराब होने की दर एक प्रतिशत से भी कम है।

ये नए सोलर पैनल कितने फ़ायदेमंद हैं?

कीमत की बात करें तो, इन आधुनिक टैंडेम सोलर पैनल को बनाने का शुरुआती खर्च पारंपरिक सिलिकॉन पैनल की तुलना में थोड़ा ज़्यादा है। हालांकि, इसका एक बड़ा फ़ायदा यह है कि इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत काफ़ी कम हो जाती है। चूंकि बड़ी इमारतों पर कम पैनल लगाकर ही ज़्यादा बिजली बनाई जा सकती है, इसलिए इंस्टॉलेशन, वायरिंग और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े खर्चों में भारी कमी आती है।

अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां अब कमर्शियल और यूटिलिटी कामों के लिए इस टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर लाने की तैयारी कर रही हैं, जिससे आने वाले सालों में यह हर घर के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। कुल मिलाकर, सोलर पैनल की यह नई पीढ़ी भविष्य में ग्राहकों को बिजली के बिलों से छुटकारा दिला सकती है और रिन्यूएबल एनर्जी को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकती है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News