हरियाणा के इस शहर की प्रॉपर्टी में आ सकता है बड़ा बूम ! बड़े एक्सप्रेसवे, RRTS कॉरिडोर और अब दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन
Udaipur Times, Haryana News : दिल्ली से सटे सोनीपत में इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ रियल एस्टेट गतिविधियों को लेकर भी उम्मीदें बढ़ रही हैं। कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित RRTS कॉरिडोर जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं के बाद अब हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर भी चर्चा तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर परिवहन नेटवर्क से शहर में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन 'नमो ग्रीन रेल' को जींद से सोनीपत के बीच चलाए जाने की खबर के बाद सोनीपत के रियल एस्टेट सेक्टर में भी इसे महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। करीब 89 किलोमीटर के रेल रूट पर आधुनिक तकनीक से जुड़ी यह पहल क्षेत्र की कनेक्टिविटी और भविष्य के विकास को लेकर उम्मीदें बढ़ा रही है।
NCR में तेजी से उभर रहा सोनीपत
पिछले कुछ वर्षों में सोनीपत को NCR के उभरते लॉजिस्टिक्स और रेजिडेंशियल हब के रूप में देखा जाने लगा है। बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी के साथ यहां औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े जानकारों के मुताबिक, किसी भी शहर के विकास में मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम की अहम भूमिका होती है। बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों के लिए रोजाना आवागमन आसान होता है और इससे रोजगार, कारोबार तथा आवासीय मांग पर असर पड़ सकता है।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?
न्यूस्टोन के सीईओ रजत बोकोलिया के मुताबिक, देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन स्वच्छ परिवहन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उनका कहना है कि जींद-सोनीपत रेल कॉरिडोर पर आधुनिक परिवहन सुविधा से लोगों की आवाजाही आसान होने के साथ सोनीपत में निवेश, आवासीय विकास और व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। वहीं, मैपस्को ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंगला का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन का सोनीपत कॉरिडोर से जुड़ना क्षेत्र के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। उनके अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी का असर आवासीय मांग और निवेश गतिविधियों पर देखने को मिल सकता है। इससे दिल्ली-NCR के अन्य हिस्सों से सोनीपत की कनेक्टिविटी और मजबूत होने की उम्मीद है।
प्रॉपर्टी की मांग बढ़ने की उम्मीद
रियल एस्टेट सेक्टर के जानकारों के अनुसार, लोग अक्सर ऐसे क्षेत्रों में घर खरीदना पसंद करते हैं जहां से नौकरी, कारोबार या पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों तक पहुंचना आसान हो। यदि जींद-सोनीपत रेल कनेक्टिविटी से यात्रा सुविधाजनक होती है और आने वाले समय में यात्रियों की संख्या बढ़ती है, तो इसका असर आसपास के आवासीय क्षेत्रों की मांग पर पड़ सकता है। इसके अलावा, मजबूत ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से उद्योग, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेक्टर के विस्तार को भी मदद मिल सकती है। इसका फायदा सोनीपत में विकसित हो रही इंटीग्रेटेड टाउनशिप, प्लॉटेड डेवलपमेंट और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
KMP और RRTS के बाद बढ़ी उम्मीदें
सोनीपत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली योजनाओं में KMP एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित RRTS कॉरिडोर भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सड़क और रेल नेटवर्क के विस्तार से दिल्ली-NCR के प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होने की संभावना है। यही वजह है कि रियल एस्टेट सेक्टर की नजर सोनीपत और इसके आसपास के इलाकों पर बनी हुई है। हालांकि, किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का प्रॉपर्टी की कीमतों पर वास्तविक असर उसके निर्माण, संचालन, कनेक्टिविटी और आसपास होने वाले आर्थिक विकास पर निर्भर करता है।
क्या उड़ने लगेंगी प्रॉपर्टी की कीमतें?
इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से किसी क्षेत्र में प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर इलाके में कीमतें निश्चित रूप से तेजी से बढ़ेंगी। स्थानीय जमीन की उपलब्धता, रोजगार, औद्योगिक निवेश, आबादी का विस्तार और बाजार की मांग जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं। सोनीपत में हाइड्रोजन ट्रेन, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और प्रस्तावित बड़े ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स के बीच आने वाले वर्षों में शहर के विकास की संभावनाएं जरूर बढ़ी हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं का रियल एस्टेट पर अंतिम प्रभाव जमीनी स्तर पर इनके संचालन और आसपास होने वाले वास्तविक आर्थिक विकास के बाद ही स्पष्ट होगा। निवेशकों के लिए जरूरी है कि अपब केवल किसी बड़ी परियोजना की घोषणा के आधार पर फैसला न लें। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जमीन के दस्तावेज, मालिकाना हक, सरकारी रिकॉर्ड, जमीन का उपयोग, वास्तविक कनेक्टिविटी और आसपास के विकास की स्थिति की जांच करना जरूरी है।