1 रुपये भी नहीं आएगा बिजली बिल ! ON, Off-ग्रिड या हाइब्रिड, जाने घर के लिए कौन-सा सोलर सिस्टम रहेगा फायदेमंद ?

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1 रुपये भी नहीं आएगा बिजली बिल ! ON, Off-ग्रिड या हाइब्रिड, जाने घर के लिए कौन-सा सोलर सिस्टम रहेगा फायदेमंद ?

Udaipur Times, Solar Panel Installation : बढ़ते बिजली बिल और बार-बार होने वाली बिजली कटौती से परेशान लोग अब तेजी से सोलर एनर्जी की ओर रुख कर रहे हैं। अगर आप भी अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपके लिए कौन-सा सोलर सिस्टम सही रहेगा। सही सिस्टम चुनने से न केवल बिजली का खर्च काफी कम हो सकता है, बल्कि लंबे समय में लाखों रुपये तक की बचत भी संभव है। इसके अलावा, सोलर एनर्जी (Solar Energy) पर्यावरण के अनुकूल बिजली उत्पादन का भी बेहतर विकल्प है।

बाजार में मुख्य रूप से तीन तरह के सोलर सिस्टम (Solar System) ऑन-ग्रिड (On-Grid), ऑफ-ग्रिड (Off-Grid) और हाइब्रिड (Hybrid) उपलब्ध हैं। इनकी कीमत, काम करने का तरीका और फायदे अलग-अलग हैं। ऐसे में अपनी जरूरत और बिजली की उपलब्धता के हिसाब से सही विकल्प चुनना जरूरी है।

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम (On-Grid Solar System) : सबसे किफायती विकल्प

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम (On-Grid Solar System) सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला और अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प माना जाता है। इसमें छत पर लगे सोलर पैनल (Solar Panel) बिजली बनाते हैं, जिसे इन्वर्टर के जरिए सीधे घर और बिजली ग्रिड से जोड़ा जाता है।

दिन में बनने वाली बिजली का इस्तेमाल घर में होता है और अगर बिजली बच जाती है तो नेट मीटरिंग के जरिए उसे ग्रिड में भेजा जा सकता है। इससे बिजली का बिल काफी कम हो जाता है और कई मामलों में लगभग शून्य तक पहुंच सकता है।

हालांकि, इस सिस्टम में बैटरी नहीं होती। इसलिए बिजली कटने पर सुरक्षा कारणों से यह सिस्टम भी काम करना बंद कर देता है।

ऑन-ग्रिड सिस्टम के फायदे

शुरुआती लागत कम होती है।

बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती।

बिजली बिल में बड़ी बचत होती है।

नेट मीटरिंग का लाभ मिलता है।

पीएम सूर्य घर योजना के तहत पात्र उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिल सकती है।

रखरखाव का खर्च भी कम रहता है।

ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम (Off-Grid Solar System): जहां बिजली की समस्या ज्यादा हो

ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम  (Off-Grid Solar System) उन इलाकों के लिए बेहतर माना जाता है जहां बिजली की सप्लाई नियमित नहीं रहती या लंबे समय तक कटौती होती है। यह सिस्टम पूरी तरह बिजली ग्रिड से अलग काम करता है।

दिन में बनने वाली बिजली बैटरी में स्टोर होती है और रात या बिजली जाने पर यही बैटरी घर को बिजली सप्लाई करती है। इसलिए यह सिस्टम लगातार बैकअप देने में सक्षम होता है।

हालांकि, इसमें बैटरी बैंक लगाने की वजह से शुरुआती लागत ज्यादा आती है। साथ ही समय-समय पर बैटरी बदलने और उसके रखरखाव का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।

ऑफ-ग्रिड सिस्टम के फायदे

बिजली कटने पर भी सप्लाई जारी रहती है।

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लिए उपयुक्त।

बिजली ग्रिड पर निर्भरता खत्म हो जाती है।

पूरी तरह ऊर्जा आत्मनिर्भर बनने का विकल्प।

हाइब्रिड सोलर सिस्टम (Hybrid Solar System): दोनों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन

हाइब्रिड सोलर सिस्टम (Hybrid Solar System) ऑन-ग्रिड (On-Grid Solar System) और ऑफ-ग्रिड  (Off-Grid Solar System) दोनों तकनीकों का मिश्रण है। इसमें सोलर पैनल, बैटरी और बिजली ग्रिड तीनों जुड़े होते हैं।

दिन में बनने वाली बिजली पहले घर में इस्तेमाल होती है। अतिरिक्त बिजली पहले बैटरी में स्टोर होती है और बैटरी भरने के बाद बची हुई बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है। वहीं, बिजली कटने पर बैटरी बैकअप के जरिए घर में बिजली मिलती रहती है।

यही वजह है कि इसे सबसे एडवांस और सुविधाजनक सोलर सिस्टम माना जाता है। हालांकि, इसकी कीमत तीनों विकल्पों में सबसे अधिक होती है।

हाइब्रिड सिस्टम के फायदे

बिजली कटने पर भी बैकअप मिलता है।

अतिरिक्त बिजली स्टोर भी होती है और ग्रिड में भी भेजी जा सकती है।

बिजली की बर्बादी नहीं होती।

बिल में बचत के साथ निर्बाध बिजली सप्लाई मिलती है।

कितने किलोवाट का सिस्टम लगवाएं?

सिस्टम का आकार आपके मासिक बिजली बिल और रोजाना खपत पर निर्भर करता है।

प्रतिदिन 6 यूनिट तक खपत: 1 kW
प्रतिदिन 12 यूनिट तक: 2 kW
प्रतिदिन 18 यूनिट तक: 3 kW
प्रतिदिन 24 यूनिट तक: 4 kW

अगर आपका एक महीने का बिजली बिल करीब 500 यूनिट का है तो आपकी औसत खपत लगभग 16 से 17 यूनिट प्रतिदिन होगी। ऐसे में 3 kW का सिस्टम उपयुक्त हो सकता है।

कितना आएगा खर्च?

सोलर सिस्टम (Solar System) की कीमत उसकी क्षमता, ब्रांड, इन्वर्टर, बैटरी (यदि हो) और इंस्टॉलेशन पर निर्भर करती है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana) के तहत पात्र उपभोक्ताओं को 2 kW तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम (Rooftop Solar System) पर 78,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।

कुछ राज्यों में इसके अलावा अतिरिक्त राज्य सब्सिडी भी दी जा रही है। सब्सिडी मिलने के बाद 3 kW का सोलर सिस्टम करीब 1.20 लाख रुपये तक में लग सकता है। हालांकि, अंतिम लागत कंपनी, उपकरणों की गुणवत्ता और इंस्टॉलेशन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसकी जानकारी आप जिस भी कंपनी का सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं उनसे भी हासिल कर सकते हैं।

कौन-सा सिस्टम आपके लिए सबसे सही?

अगर आपके इलाके में बिजली की सप्लाई अच्छी रहती है और आप बिजली बिल कम करना चाहते हैं, तो ऑन-ग्रिड सिस्टम (On-Grid Solar System) सबसे बेहतर और किफायती विकल्प है।  अगर आपके यहां अक्सर बिजली कटती है या ग्रिड की सुविधा नहीं है, तो ऑफ-ग्रिड सिस्टम (Off-Grid Solar System) ज्यादा उपयोगी रहेगा।

वहीं, अगर आप बिजली बिल भी बचाना चाहते हैं और बिजली कटने पर बैकअप भी चाहते हैं, तो हाइब्रिड सोलर सिस्टम (Hybrid Solar System) सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। हालांकि, इसके लिए शुरुआती निवेश ज्यादा करना पड़ता है।

सोलर सिस्टम (Solar System) लगवाने से पहले अपनी बिजली की जरूरत, बजट और स्थानीय बिजली सप्लाई की स्थिति का आकलन जरूर करें। साथ ही किसी प्रमाणित (Certified) कंपनी से इंस्टॉलेशन करवाएं और सब्सिडी व अन्य शुल्कों की जानकारी संबंधित एजेंसी या इंस्टॉलर से अवश्य प्राप्त करें।

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