हरियाणा में अब नहीं रहेगी पानी की कमी ! 248 करोड़ रुपये से होगा 131 नए जलाशयों का निर्माण
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : हरियाणा के जल भविष्य को सुरक्षित करने और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने की राज्य की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम (WSHP)’ को मंजूरी दी गई। इस प्रोग्राम की अनुमानित लागत 5,714.80 करोड़ रुपये है। एकीकृत जल क्षेत्र प्रोग्राम के तहत भूजल स्तर में गिरावट, सिंचाई दक्षता, जल उपलब्धता और कृषि क्षेत्र में जल के सतत उपयोग जैसी चुनौतियों पर काम किया जाएगा। प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लगभग 45 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रोग्राम में 4,000.36 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ऋण तथा 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा।
यह प्रोग्राम 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जिनमें 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया शामिल है। इसके तहत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (I&WRD), सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण (MICADA) तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न कार्य किए जाएंगे।
दीर्घकालिक जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन को मजबूत करेगा प्रोग्राम
वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम राज्य की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नहर सिंचाई की दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार होगा, पानी के संचरण में होने वाली हानि कम होगी तथा भूजल दोहन को कम करने में मदद मिलेगी। भूजल रिचार्ज और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने और जलभराव वाले क्षेत्रों के सुधार पर भी जोर दिया जाएगा।
इससे डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और फसल विविधीकरण जैसे उपायों से कृषि क्षेत्र में पानी की मांग कम करने में मदद मिलेगी। SCADA और RTDAS प्रणालियों की स्थापना से नहरी तंत्र और जल संसाधनों की रियल टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे संचालन क्षमता और निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहतर होगी।
प्रोग्राम के माध्यम से संस्थागत क्षमता और जल प्रबंधन व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा तथा किसानों की आय को जलवायु एवं अन्य चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बनाने पर जोर रहेगा।
निर्माण परियोजना के बजाय एकीकृत जल क्षेत्र प्रोग्राम के रूप में तैयार किया गया WSHP
गौरतलब है कि हरियाणा के जल संसाधनों पर लगातार बढ़ता दबाव एक गंभीर चुनौती है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट और अत्यधिक दोहन, सिंचाई के लिए भूजल पर बढ़ती निर्भरता, पुराना नहर ढांचा और पानी के संचरण में होने वाली हानि, जलभराव एवं लवणीयता, भूजल पंपिंग के लिए बढ़ती ऊर्जा आवश्यकता तथा सिंचाई की बढ़ती मांग के साथ फसल विविधीकरण की आवश्यकता प्रमुख चुनौतियां हैं।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम को केवल पारंपरिक निर्माण परियोजना के बजाय एक एकीकृत जल क्षेत्र प्रोग्राम के रूप में तैयार किया गया है।
सिंचाई ढांचे के आधुनिकीकरण और जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए बड़े निवेश
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (I&WRD) के तहत वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम में सिंचाई ढांचे के आधुनिकीकरण, जल उपलब्धता बढ़ाने और डिजिटल जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत लगभग 2,484.87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 104 नहर चैनलों का पुनर्वास किया जाएगा, जिससे लगभग 8.75 लाख एकड़ कमांड एरिया (CCA) को लाभ मिलेगा।
इन कार्यों में नहरों का पुनर्वास, लाइनिंग तथा अन्य संबंधित सुधार कार्य शामिल होंगे, जिससे पानी के संचरण में होने वाली हानि कम होगी और सिंचाई सेवाओं की विश्वसनीयता एवं दक्षता बढ़ेगी। इसके अलावा, मुख्य रूप से भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने के लिए लगभग 248 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 131 नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा।
प्रोग्राम के तहत चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की भी व्यवस्था की जाएगी, जिस पर लगभग 282.13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।
डिजिटल जल प्रबंधन के तहत नहरों के स्वचालित और रियल टाइम संचालन के लिए 20 SCADA स्थान तथा पानी के डिस्चार्ज और प्रवाह की रियल टाइम निगरानी के लिए 400 RTDAS स्थान/माप बिंदु स्थापित किए जाएंगे। इससे आंकड़ों के आधार पर नहर संचालन, बेहतर जल लेखांकन तथा जल प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
MICADA और कृषि विभाग की योजनाओं से पानी की मांग घटेगी
सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण (MICADA) के तहत लगभग 900 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 620 वाटरकोर्स का पुनर्वास किया जाएगा। इसके अलावा लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी।
वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तहत लगभग 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का वर्टिकल ड्रेनेज/सब-सर्फेस ड्रेनेज के माध्यम से सुधार किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 5लाख एकड़ में डायरेक्ट सीडेड राइस को बढ़ावा दिया जाएगा तथा ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत लगभग 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण किया जाएगा।
इन सभी उपायों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पानी की मांग कम करना, सिंचाई दक्षता बढ़ाना तथा किसानों की आय को अधिक टिकाऊ और जलवायु चुनौतियों के प्रति मजबूत बनाना है।
