आने वाले समय में AC की नहीं पड़ेगी जरूरत ! 50 प्रतिशत बिजली में मिलेगी डबल कूलिंग, बिना कंप्रेसर चलेगी नई टेक्नोलॉजी ?

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आने वाले समय में AC की नहीं पड़ेगी जरूरत ! 50 प्रतिशत बिजली में मिलेगी डबल कूलिंग, बिना कंप्रेसर चलेगी नई टेक्नोलॉजी ?

Udaipur Times, LDCS Cooling Tech : गर्मी से बचने के लिए हर कोई AC को ही सबसे कारगार उपाय मानते हैं। असल में, AC न केवल हवा का टेम्परेचर कम करता है बल्कि उसकी नमी सुखाने में भी बहुत एनर्जी खर्च करता है। इससे बिजली का बिल बढ़ता है और यह वातावरण के लिए भी अच्छा नहीं है। इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए एक नई तरह की कूलिंग टेक्नोलॉजी खोज की गई है, जिसे LDCS यानी लिक्विड डेसिकेंट कूलिंग सिस्टम (Liquid Desiccant Cooling System) कहते हैं। 

AC से भी एडवांस्ड कूलिंग टेक्नोलॉजी

Liquid Desiccant Cooling System AC से भी एडवांस्ड कूलिंग टेक्नोलॉजी है, जो बिना कंप्रेसर के नमी सोखकर कमरे को कुछ ही सेकंड में बर्फ जैसा ठंडा कर देती है। कंप्रेसर न होने की कारण  यह टेक्नोलॉजी बिजली भी बहुत कम इस्तेमाल करती है। इस टेक्नोलॉजी का मुख्य आधार केमिस्ट्री और थर्मोडायनामिक्स पर आधारित है।

LDCS क्या है और यह टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

LDCS (लिक्विड डेसिकेंट कूलिंग सिस्टम) एक थर्मोडायनामिक रूप से आधारित कूलिंग टेक्नोलॉजी है जो नॉन-कंप्रेसर-बेस्ड एयर कंडीशनिंग सिस्टम पर काम करती है। यह सिस्टम हवा से नमी सोखकर उसे ठंडा करता है। यह सिस्टम एक खास केमिकल या नमक के घोल का इस्तेमाल करता है, जैसे लिथियम क्लोराइड या कैल्शियम क्लोराइड। जब बाहर की गर्म, नमी वाली हवा लिक्विड के संपर्क में आती है, तो घोल हवा का तापमान बदले बिना तुरंत सारी नमी सोख लेता है।

हवा के पूरी तरह सूखने के बाद, इसे पानी के हल्के स्प्रे से गुज़ारा जाता है, इस प्रोसेस को इवैपोरेटिव कूलिंग कहते हैं। यह सूखी हवा पानी के संपर्क में आने पर तेज़ी से ठंडी हो जाती है और कमरे में ताज़ी, ठंडी हवा निकलती है।

AC से LDCS टेक्नोलॉजी कितनी बेहतर है?

आम AC से LDCS टेक्नोलॉजी कितनी बेहतर है? एक आम AC हवा को सुखाने और ठंडा करने के लिए दोगुनी बिजली इस्तेमाल करता है। इसके लिए कंप्रेसर की ज़रूरत होती है, जिससे बिजली का बिल बढ़ जाता है। लेकिन, LDCS में कंप्रेसर जैसा ज़्यादा बिजली न लेने वाला पार्ट होने से, बिजली की खपत आधी हो जाती है।

LDCS नुकसानदायक रेफ्रिजरेंट गैसों का इस्तेमाल नहीं करता, जिससे ग्लोबल वार्मिंग और कार्बन एमिशन कम होता है। यह इस टेक्नोलॉजी को आम AC से बेहतर बनाता है। इसके साथ ही LDCS में इस्तेमाल होने वाला लिक्विड नमक का घोल न सिर्फ़ नमी सोखता है, बल्कि हवा में मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और एलर्जन को भी फ़िल्टर करता है, जिससे हवा साफ़ रहती है।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कहां हो रहा है?

LDCS टेक्नोलॉजी सिर्फ़ टेस्टिंग फ़ेज़ में ही नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल कमर्शियल और इंडस्ट्रियल लेवल पर बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सर्वर रूम को लगातार ठंडा रखने और ह्यूमिडिटी को कंट्रोल करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

कई जगहों पर, मॉडर्न शॉपिंग मॉल और कॉर्पोरेट ऑफ़िस इसे तेज़ी से अपना रहे हैं। LDCS सिस्टम को दवाओं और खाने की चीज़ों को नमी से बचाने के लिए सबसे सटीक और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाला तरीका माना जाता है

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