हरियाणा में नहीं रहेगी पानी की कमी ! 5714 करोड़ रुपये से सरकार ने तैयार किया नया प्लान ?
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़,20 मई : हरियाणा वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य के तहत विश्व बैंक सहायता प्राप्त प्रस्तावित “वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम (WSHP)” के अंतर्गत प्रदेश में नहर अवसंरचना को आधुनिक एवं सुदृढ़ बनाया जाएगा, जिससे सिंचाई दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ जल संसाधनों का सतत प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
मंत्री श्रुति चौधरी आज विश्व बैंक सहायता प्राप्त प्रस्तावित “वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम” की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग श्री अनुराग अग्रवाल इंजीनियर-इन-चीफ श्री बीरेंद्र सिंह, श्री राकेश चौहान, श्री संदीप बिश्नोई,मुख्य अभियंता श्री नितेश जैन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान परियोजना के विभिन्न घटकों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि लगभग 5714.80 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना के अंतर्गत नहर नेटवर्क का आधुनिकीकरण, जल मार्गों का पुनर्वास, उपचारित अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग, फसल विविधीकरण, नए जलाशयों का निर्माण, सूक्ष्म सिंचाई क्षमता निर्माण तथा सूचना, शिक्षा एवं जन जागरूकता गतिविधियों को शामिल किया गया है।
सिंचाई मंत्री ने कहा कि हरियाणा जल संकट का सामना कर रहा राज्य है, इसलिए भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण की दिशा में विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि “वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम” के तहत राज्य के प्रस्तावित 15 क्लस्टरों में नए जलाशयों के निर्माण की योजना तैयार की जाए। इसके लिए जिला प्रशासन के सहयोग से उपयुक्त पंचायत एवं सरकारी भूमि की पहचान सुनिश्चित की जाए, ताकि इन कार्यों को परियोजना में शामिल किया जा सके।
मंत्री श्रुति चौधरी ने परियोजना से संबंधित विभिन्न स्वीकृतियों की प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े सभी लंबित कार्यों एवं औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, क्योंकि विश्व बैंक के साथ अंतिम स्तर की चर्चाएं एवं वार्ताएं जून 2026 से पहले पूर्ण किए जाने का प्रस्ताव है।
