1450 गांवों में नहीं रहेगी अब पानी की कमी ! सबसे लंबी जल सुरंग का सपना हुआ पूरा, 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि की होगी सिंचाई

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1450 गांवों में नहीं रहेगी अब पानी ! सबसे लंबी जल सुरंग का सपना हुआ पूरा, 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि की होगी सिंचाई 

Udaipur Times, Country's Longest water tunnel ready : मध्य प्रदेश के कटनी जिले में स्थित स्लीमनाबाद वाटर टनल का निर्माण लगभग 17 साल बाद पूरा हो गया है। 11.95 किलोमीटर लंबी यह सुरंग देश की सबसे लंबी भूमिगत जल परिवहन (वॉटर कन्वेयंस) सुरंग मानी जा रही है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस परियोजना स्थल का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने इसे प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई प्रोजेक्ट्स में से एक बताया।

यह सुरंग बर्गी डायवर्जन परियोजना का सबसे अहम हिस्सा है। इसके जरिए पहली बार नर्मदा नदी का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से होकर सोन नदी बेसिन और सूखा प्रभावित विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा। खास बात यह है कि पानी का प्रवाह पूरी तरह गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी फ्लो) से होगा, यानी इसके लिए किसी पंप की जरूरत नहीं पड़ेगी।

17 साल तक चली इंजीनियरिंग की चुनौती

इस परियोजना की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। 2011 में अमेरिका निर्मित टनल बोरिंग मशीन (TBM) से खुदाई शुरू हुई, लेकिन कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण कई वर्षों तक काम बेहद धीमी गति से चला। बाद में 2016 में दूसरी जर्मन टनल बोरिंग मशीन दूसरी ओर से लगाई गई, जिसके बाद दोनों तरफ से खुदाई शुरू हुई। आखिरकार 14 जुलाई 2026 को दोनों सुरंगों का सफल मिलन (ब्रेकथ्रू) हुआ और 11.95 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार हो गई।

आसान नहीं था सुरंग बनाना

इंजीनियरों को खुदाई के दौरान संगमरमर, चूना पत्थर, डोलोमाइट और स्लेट जैसी कठोर चट्टानों का सामना करना पड़ा। कई जगह बड़े भूमिगत गड्ढे, कार्बन डाइऑक्साइड गैस और तेज भूजल रिसाव जैसी चुनौतियां भी सामने आईं। कुछ स्थानों पर सुरंग के भीतर प्रति मिनट 25,000 लीटर तक पानी भरने लगा, जिससे काम कई बार प्रभावित हुआ। मशीनों के कटर हेड भी बार-बार क्षतिग्रस्त हुए। इन सभी बाधाओं के बावजूद आधुनिक तकनीक और दोनों सिरों से एक साथ खुदाई कर परियोजना को पूरा किया गया।

1,450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा लाभ

बर्गी डायवर्जन परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1,450 गांवों को फायदा मिलेगा। लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि स्लीमनाबाद टनल के जरिए अकेले करीब 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। परियोजना से जबलपुर और कटनी को पेयजल और औद्योगिक जल आपूर्ति भी मिलेगी।

अब जल्द छोड़ा जाएगा नर्मदा का पानी

अधिकारियों के अनुसार, टनल बोरिंग मशीन (TBM) को हटाने के बाद सुरंग में नर्मदा का पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद नहर नेटवर्क के शेष कार्य पूरे कर चरणबद्ध तरीके से किसानों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे विंध्य क्षेत्र की खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में बड़ा बदलाव आएगा।

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