Udaipur Times, Haryana News, झज्जर : जिला में पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने, पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी एवं जागरूकता गतिविधियां की जा रही हैं। इसी कड़ी में डीसी वर्षा खांगवाल ने बुधवार को कैम्प कार्यालय में अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदूषण नियंत्रण एवं फसल अवशेष प्रबंधन कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करें और फील्ड में नियमित निगरानी रखें। पराली जलाने की संभावित घटनाओं की तत्काल सूचना प्राप्त करने तथा मौके पर प्रभावी कार्रवाई के लिए क्विक रेस्पॉन्स टीमें सक्रिय रखी जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक किया जाए और फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक एवं वैकल्पिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
अधिकारी फील्ड विजिट के साथ संभावित स्रोतों पर रखें नजर
डीसी वर्षा खांगवाल ने अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करने और पराली जलाने की आशंका वाले क्षेत्रों में पहले से आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाले संभावित स्रोतों की निगरानी के लिए आवश्यकता अनुसार ड्रोन का उपयोग करने तथा संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा। उन्होंने भुवन एप और सीआरएम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया।
पराली खेत में मिलाने पर प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि
डीसी वर्षा खांगवाल ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के तहत पराली को खेत में मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना सहित फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध विभिन्न तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि पंचायतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी पराली प्रबंधन अभियान से जोड़ा जाए। किसानों के साथ निरंतर संवाद करते हुए उन्हें फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन से होने वाले पर्यावरणीय एवं कृषि संबंधी लाभों के बारे में जानकारी दी जाए।
स्वच्छ पर्यावरण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
डीसी ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर वायु गुणवत्ता के लिए पराली जलाने की समस्या का प्रभावी समाधान जरूरी है। जिला प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करते हुए फसल अवशेष न जलाएं तथा उपलब्ध फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।