सेल्फ स्टडी के दम पर सफलता हासिल कर IAS और IPS बने ये अधिकारी, इन अधिकारियों की कहानी करेगी आपको प्रेरित
Udaipur Times, IAS officers without coaching : UPSC परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। आम तौर पर यह माना जाता है कि इस परीक्षा को पास करने के लिए महंगी कोचिंग, बड़े शहरों में रहने और बहुत सारे संसाधनों की ज़रूरत होती है। हालाँकि, देश भर के कई युवाओं ने सेल्फ-स्टडी, पक्के इरादे और सीमित साधनों के ज़रिए इस धारणा को गलत साबित किया है। इन अधिकारियों की सफलता यह साबित करती है कि साफ़ लक्ष्य और सच्ची मेहनत से, बिना कोचिंग के भी IAS या IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया जा सकता है।
सृष्टि जयंत देशमुख (AIR 5, 2018)
23 वर्षीय सृष्टि ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर ली और देश भर में पांचवां स्थान हासिल किया। ये हैं सृष्टि। उन्होंने कोचिंग बिल्कुल नहीं ली और ऑनलाइन संसाधनों, एक ठोस अध्ययन योजना और रोज़ाना उत्तर लिखने के अभ्यास के दम पर सफलता प्राप्त की। सृष्टि ने रटने के बजाय अवधारणाओं को गहराई से समझने पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी सलाह? नियमित रहें और इस तरह से रिवीजन करें जैसे आपका जीवन इस पर निर्भर करता हो। यदि आप 2025 की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो उनकी कहानी एक उदाहरण है कि स्मार्ट और केंद्रित स्व-अध्ययन आपको तेज़ी से सफलता दिला सकता है।

सत्यम गांधी (AIR 10, 2020)
ने स्व-अध्ययन पर पूरा भरोसा रखते हुए बिना किसी कोचिंग की मदद के शीर्ष 10 रैंक हासिल की। उन्होंने मजबूत बुनियादी ज्ञान बनाने और बार-बार दोहराने पर जोर दिया। कोई फैंसी क्लास नहीं—सिर्फ किताबें, समसामयिक विषय और दृढ़ इच्छाशक्ति। यह उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते या कोचिंग तक पहुंच नहीं सकते; सत्यम ने दिखाया है कि अनुशासन के साथ, आप बिना कोचिंग के भी UPSC परीक्षा पास कर सकते हैं और शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।

अनन्या सिंह (AIR 51, 2019)
महज 22 साल की उम्र में पहली ही कोशिश में IAS परीक्षा पास करके सबसे कम उम्र की IAS अधिकारियों में से एक बन गईं। उनकी सफलता का राज क्या था? प्रतिदिन 7-8 घंटे की पढ़ाई का एक सरल और अनुशासित रूटीन। उन्होंने कोचिंग के चक्कर में नहीं पड़ीं और मानक पुस्तकों और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का इस्तेमाल किया। अनन्या की कहानी से पता चलता है कि अगर आप एकाग्रचित्त रहें और ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचें तो UPSC की सेल्फ स्टडी कितनी कारगर हो सकती है।

अरुण राज (AIR 34, 2014)
IIT कानपुर से स्नातक हैं। उन्होंने NCERT की पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से बुनियादी सिद्धांतों पर महारत हासिल करके बिना कोचिंग के तैयारी की। उन्होंने UPSC को एक पहेली की तरह समझा, उसे बुनियादी बातों में तोड़कर फिर आगे बढ़े। यदि आप तकनीकी क्षेत्र से हैं, तो उनका यह दृष्टिकोण आपको पसंद आ सकता है। यह साबित करता है कि विश्लेषणात्मक कौशल और स्व-अध्ययन मिलकर IAS में सफलता दिलाते हैं।
तपस्या परिहार (AIR 23, 2017)
ने कोचिंग से शुरुआत की, लेकिन बाद में इसे छोड़कर अपनी खुद की योजना बनाई। उन्होंने पाठ्यक्रम का गहन अध्ययन किया, रटने के बजाय समझने को प्राथमिकता दी और उत्तर लेखन का निरंतर अभ्यास किया। उनकी कहानी उन लोगों के लिए एकदम सही है जिन्हें लगता है कि कोचिंग से उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा है—स्वयं अध्ययन की ओर रुख करें, और आप शायद सफलता प्राप्त कर लेंगे।

सौम्या शर्मा (AIR 9, 2017)
श्रवण बाधित होने के बावजूद, सौम्या ने अपनी अथक मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर सर्वोच्च रैंक हासिल की। उन्होंने यह साबित कर दिया कि चुनौतियाँ आपको परिभाषित नहीं करतीं; आपका प्रयास ही आपको परिभाषित करता है। आत्म-प्रेरणा पर उनका ध्यान UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हर उम्मीदवार के लिए एक बड़ा सबक है।

राधिका गुप्ता (AIR 18, 2020)
राधिका गुप्ता ने अपने दूसरे प्रयास में प्रतिदिन 9-10 घंटे के स्व-अध्ययन और एक सख्त समय सारिणी के बल पर परीक्षा पास की। उन्होंने ऑनलाइन संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग किया और अनुशासन बनाए रखा। खबरों के अनुसार, उनकी कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि स्व-अध्ययन में दृढ़ता का फल अवश्य मिलता है।

प्रियांक किशोर (2018)
अपने पिता से प्रेरित होकर, प्रियांक ने बिना कोचिंग के पहली ही कोशिश में सीएसई परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। उन्होंने रोजमर्रा की प्रेरणा और बुनियादी संसाधनों का सहारा लिया, जिससे यह साबित हुआ कि पारिवारिक सहयोग और आत्मविश्वास आईएएस परीक्षा में स्व-अध्ययन की सफलता को बढ़ावा दे सकते हैं।
श्रीनाथ के (AIR 82)
यह एक दिल को छू लेने वाली कहानी है: एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर पूर्व कुली रहे श्रीनाथ ने रेलवे वाई-फाई और काम करते हुए अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके पढ़ाई की। कोई कोचिंग नहीं, सिर्फ दृढ़ संकल्प और मुफ्त ऑनलाइन साधनों का सहारा लिया। उनकी कहानी बिना कोचिंग के यूपीएससी परीक्षा पास करने की चाह रखने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है।
वंदना मीना (AIR 331, 2021)
ने स्व-अध्ययन, ऑनलाइन संसाधनों और अनुशासित दिनचर्या के सहारे सफलता हासिल की। उन्होंने दिखाया कि भले ही आपका लक्ष्य शीर्ष रैंक हासिल करना न हो, निरंतर प्रयास आपको वहां तक पहुंचा सकता है।
चंद्रज्योति सिंह (AIR 28, 2019)
चंद्रज्योति सिंह ने 22 वर्ष की आयु में प्रतिदिन 6-8 घंटे के गहन अध्ययन, विशेष रूप से समसामयिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, अपने पहले ही प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। उनकी सावधानीपूर्वक तैयारी स्व-अध्ययन के शौकीनों के लिए एक आदर्श उदाहरण है।
