दिन में बेचती हैं चाय, रात में करती हैं UPSC की तैयारी, तीनों बहनों की आंखों में IAS-IPS बनने का सपना, जानिए इन बहनों की कहानी

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दिन में बेचती हैं चाय, रात में करती हैं UPSC की तैयारी, तीनों बहनों की आंखों में IAS-IPS बनने का सपना, जानिए इन बहनों की कहानी

Udaipur Times, 3 Sister’s UPSC Story : जिंदगी का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता; अचानक आए संकट सबसे मज़बूत लोगों के इरादों को भी डगमगा सकते हैं। लेकिन, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो साबित करती है कि मजबूत इरादों से गरीबी और बेबसी को भी हराया जा सकता है। महाराजगंज की तीन बहनों वर्तिका, वंदिता और अवंतिका ने आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकट के आगे हार मानने के बजाय अपनी किस्मत खुद लिखने का फैसला किया।

ये बहनें गोरखपुर में दीन दयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी के गेट के सामने चाय की दुकान चलाती हैं। साथ ही, वे देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSCको पास करने का सपना भी देखती हैं। उनका सफर साबित करता है कि सफलता के लिए बहुत सारे संसाधनों की ज़रूरत नहीं होती। सुबह से शाम तक चाय की दुकान चलाना, ग्राहकों को मुस्कुराकर चाय पिलाना और फिर देर रात तक ऑनलाइन क्लास के जरिए सिविल सर्विस की पढ़ाई करना इन युवतियों की दिनचर्या उन सभी युवाओं के लिए एक सबक है जो छोटी-मोटी मुश्किलों से निराश हो जाते हैं।

परिवार पर आया संकट; खोली चाय की दुकान

तीनों बहनों की ज़िंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी। उनके पिता, रामसकल उपाध्याय, महाराजगंज में एक कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे और परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी। लेकिन, 2017 में अचानक लकवा (पैरालिसिस) का दौरा पड़ने से सब कुछ बदल गया। उनके पिता की नौकरी चली गई और परिवार को इलाज का खर्च उठाने के लिए अपनी बचत खत्म करनी पड़ी और गांव की जमीन तक बेचनी पड़ी। घर की ज़रूरतें पूरी करना और पिता की दवाइयों का इंतज़ाम करना जिस पर हर महीने ₹5,000–₹6,000 का खर्च आता था। एक संघर्ष बन गया। उनके बड़े भाई, शिवम को अपनी पढ़ाई छोड़कर टेलीकॉलर की नौकरी करनी पड़ी।

परिवार की मदद के लिए, दूसरी बेटी वंदिता ने बच्चों को पढ़ाना और छोटे-मोटे काम करना शुरू किया, लेकिन उससे काम नहीं चला। इसलिए, बहनों ने चाय की दुकान खोलने का फैसला किया। शुरू में, उनकी मां माधुरी को डर था कि समाज क्या कहेगा "लोग क्या सोचेंगे?"इसलिए उन्होंने मना कर दिया। हालांकि, जब उनके हालात नहीं सुधरे, तो तीनों बहनों ने मिलकर ₹8,000 जमा किए और DDU गेट के सामने 'बिलीवर बिस्ट्रो' नाम से चाय का स्टॉल शुरू किया। लोग न सिर्फ उनकी चाय और मैगी की तारीफ करते हैं, बल्कि उनके पक्के इरादे की भी सराहना करते हैं।

दिन में स्टॉल चलाना, रात में IAS/IPS की तैयारी करना

इन बहनों की दिनचर्या वाकई प्रेरणादायक है। सबसे बड़ी बहन वर्तिका (22) ने B.Sc. किया है और वह घर से ही UPSC परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। वह पढ़ाई के लिए सुबह 4 बजे उठती हैं और साथ ही अपने परिवार और छोटी बहनों की ज़रूरतों का भी ध्यान रखती हैं। वह अपनी पढ़ाई के लिए पाँच से छह घंटे देती हैं और एक मशहूर IAS अफ़सर बनने का सपना देखती हैं। वंदिता (21) और सबसे छोटी बहन अवंतिका (19) DDU में B.A. फ़र्स्ट ईयर की छात्राएँ हैं; वे सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक यूनिवर्सिटी गेट के बाहर स्टॉल संभालती हैं।

तीनों बहनों का लक्ष्य सरकारी अफ़सर बनना 

स्टॉल से लौटने और घर के काम निपटाने के बाद, तीनों बहनें देर रात आमतौर पर आधी रात से सुबह 2 या 3 बजे तक YouTube और ऑनलाइन रिसोर्स की मदद से UPSC परीक्षा की पढ़ाई और तैयारी करती हैं। वंदिता का सपना IPS अफसर के तौर पर पुलिस सेवा में शामिल होने का है, जबकि अवंतिका अपनी बड़ी बहन की तरह IAS अफ़सर बनना चाहती हैं। उनके माता-पिता को गर्व है कि उनकी बेटियों ने मुश्किल समय में परिवार को एकजुट रखा। सबसे बड़ी बहन IAS अफसर सृष्टि देशमुख को अपना रोल मॉडल मानती हैं।

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