धूप से खुद चार्ज होकर चलती है ये कार, जितनी खपत उससे ज्यादा बनाती है बिजली ?

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धूप से खुद चार्ज होकर चलती है ये कार, जितनी खपत उससे ज्यादा बनाती है बिजली ?

Udaipur Times, Luminetta Solar Car : साउथ कैरोलिना की क्लेम्सन यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्टूडेंट्स की एक टीम ने एक अनोखा इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोटोटाइप बनाया है। यह रोज़ाना की ड्राइविंग के दौरान जितनी बिजली इस्तेमाल करता है, उससे ज़्यादा बिजली पैदा कर सकता है।

इस कार को 'डीप ऑरेंज 17' Luminetta (Deep Orange) नाम दिया गया है। इस सोलर-इंटीग्रेटेड EV को क्लेम्सन यूनिवर्सिटी के 'डीप ऑरेंज' प्रोग्राम के तहत BMW और फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट फॉर सोलर एनर्जी सिस्टम्स ISE के साथ मिलकर बनाया गया था। यह प्रोग्राम ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग के ग्रेजुएट छात्रों को इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ काम करते हुए पूरी तरह से काम करने वाले व्हीकल प्रोटोटाइप डिज़ाइन करने और बनाने का मौका देता है।

कार में 1,700 से ज़्यादा सोलर सेल लगाए गए 

आम EV जो पूरी तरह से बाहरी चार्जिंग पर निर्भर होती हैं लेकिन 'डीप ऑरेंज 17' की बाहरी सतहों पर 1,700 से ज़्यादा सोलर फोटोवोल्टिक सेल लगे हैं। ये सोलर सेल लगातार बिजली पैदा करते हैं और गाड़ी की एनर्जी स्टोरेज को फिर से भरने में मदद करते हैं।

धूप से खुद चार्ज होकर चलती है ये कार

इस गाड़ी को कुल मिलाकर एनर्जी एफिशिएंसी (ऊर्जा दक्षता) को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। इसके एयरोडायनामिक्स, हल्के वज़न वाले कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एनर्जी-मैनेजमेंट सिस्टम को इस तरह से ऑप्टिमाइज़ किया गया है जिससे बिजली की खपत कम हो।

इस प्रोटोटाइप का वज़न सिर्फ़ 550 किलोग्राम है। ये कई प्रोडक्शन गाड़ियों की तुलना में काफ़ी हल्की है।

50 किमी की अतिरिक्त रेंज

अलग-अलग  स्थितियों में गाड़ी की क्षमता को परखने के लिए, छात्रों ने चार शहरों अमेरिका में ग्रीनविले, जर्मनी में फ्रैंकफर्ट, स्पेन में मैड्रिड और भारत में मुंबई में धूप की उपलब्धता और पर्यावरण की स्थितियों का मॉडल तैयार किया।

इस स्टडी में रोज़ाना औसतन लगभग 20 किलोमीटर की यात्रा का अनुमान लगाया गया। इन स्थितियों में, 'डीप ऑरेंज 17' इतनी अतिरिक्त सोलर एनर्जी पैदा करने में सक्षम थी कि चारों जगहों पर औसतन लगभग 50 किलोमीटर की अतिरिक्त ड्राइविंग रेंज मिल सके। परीक्षण में सामने आया कि यह गाड़ी अपने सोलर सिस्टम के ज़रिए उतनी बिजली पैदा कर सकती है, जितनी यह शहर में रोज़ाना की यात्रा के दौरान इस्तेमाल करती है।

हल्का डिज़ाइन एफिशिएंसी बढ़ाने में करेगा मदद

कार का कम वज़न इसकी एनर्जी एफिशिएंसी इसकी बड़ी खासियत है। इसके मल्टी-मटीरियल चेसिस में स्ट्रक्चरल स्टील, एल्युमीनियम, कार्बन फाइबर और 3D-प्रिंटेड मेटल के पुर्ज़े शामिल हैं। स्ट्रक्चरल स्टील का इस्तेमाल वहां किया गया है जहां यात्रियों की सुरक्षा ज़रूरी है, जबकि हल्के मटीरियल गाड़ी का कुल वज़न कम करने में मदद करते हैं।

धूप से खुद चार्ज होकर चलती है ये कार, जितनी खपत उससे ज्यादा बनाती है बिजली ?

ज़्यादा एनर्जी-इंडिपेंडेंट EV की ओर एक कदम

क्लेम्सन प्रोजेक्ट ने दर्शाया  है कि कैसे सोलर टेक्नोलॉजी, हल्के मटीरियल और बहुत ज़्यादा कुशल इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन मिलकर EV की बाहरी चार्जिंग पर निर्भरता को कम कर सकते हैं। हालांकि 'डीप ऑरेंज 17' अभी बड़े पैमाने पर बनने वाली गाड़ी के बजाय एक प्रोटोटाइप है, लेकिन यह प्रोजेक्ट भविष्य की इलेक्ट्रिक कारों के लिए यह संभावना दिखाता है कि वे चलते समय या धूप में खड़ी होने पर अपनी कुछ एनर्जी खुद बना सकेंगी।

टीम का कहना है कि यह प्रोजेक्ट खास तौर पर चुनौतीपूर्ण था क्योंकि उन्हें न सिर्फ़ एक काम करने वाली सोलर EV बनानी थी, बल्कि यह भी दिखाना था कि सोलर इंटीग्रेशन के ज़रिए कोई गाड़ी कैसे ज़्यादा एनर्जी-इंडिपेंडेंट बन सकती है।

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