₹2600 करोड़ से तैयार होगा ये फोर-लेन एक्सप्रेसवे, MP से लेकर गुजरात तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी, देखें पूरा रूटमैप

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₹2600 करोड़ से तैयार होगा ये फोर-लेन एक्सप्रेसवे, MP से लेकर गुजरात तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी, देखें पूरा रूटमैप  

Udaipur Times, Ujjain-Garoth Highway : 136.1 किलोमीटर लंबे चार-लेन वाले उज्जैन-गरोठ सेक्शन (NH-752D) का निर्माण 90% पूरा हो चुका है, जिससे अहमदाबाद और उज्जैन के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। लगभग ₹2,600 करोड़ की लागत से बने इस नए एक्सप्रेसवे लिंक से इन दो प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय मौजूदा 9-10 घंटे से घटकर 5.5-6 घंटे रह जाएगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) और निर्माण एजेंसी GHV की देखरेख में चल रहे इस प्रोजेक्ट को 2028 में उज्जैन में होने वाले भव्य सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले तेज़ी से पूरा किया जा रहा है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से रणनीतिक जुड़ाव

अभी, उज्जैन और अहमदाबाद के बीच यात्रा करने वाले लोग पारंपरिक 420 किलोमीटर लंबे झाबुआ-दाहोद रूट का इस्तेमाल करते हैं। पुराने रूट पर शहर का भारी ट्रैफिक और सिंगल-लेन वाले हिस्से यात्रा को धीमा और मुश्किल बना देते हैं।

यह नया चार-लेन सेक्शन उज्जैन को सीधे गरोठ के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ता है। एक्सेस-कंट्रोल्ड अलाइनमेंट पर 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड लिमिट के साथ, यह बेहतर कॉरिडोर यात्रियों और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के लिए यात्रा के समय में 3 से 4 घंटे की बचत करेगा।

नए रूट पर पड़ने वाले मुख्य शहर इस प्रकार हैं:

उज्जैन, घटिया, महिदपुर, बड़ौदा, आलोट, सुवासरा, शामगढ़ और गरोठ

मालवा बेल्ट के लिए क्षेत्रीय आर्थिक बढ़ावा

इस इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड का फायदा उज्जैन और अहमदाबाद से कहीं ज़्यादा है। यह नया कॉरिडोर मध्य प्रदेश के बड़े मालवा क्षेत्र के लिए एक हाई-स्पीड मुख्य लिंक बनाता है, जो प्रमुख कृषि और औद्योगिक केंद्रों को वड़ोदरा जैसे गुजरात के बड़े व्यापारिक केंद्रों से जोड़ता है। इंदौर और देवास से आने वाले यात्री उज्जैन रिंग रोड के ज़रिए आसानी से इस रूट पर आ सकेंगे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और गुजरात की ओर जाने वाले रूट तक पहुँच सकेंगे। इसके अलावा, रतलाम और मंदसौर जैसे ज़िलों को भी बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मिलेगी। 

उज्जैन सिंहस्थ 2028 से पहले, इस कॉरिडोर को अलग-अलग राज्यों के बीच आवाजाही के लिए एक अहम बदलाव लाने वाला (गेम-चेंजर) माना जा रहा है। महाकुंभ के लिए गुजरात और पश्चिमी भारत से आने वाले लाखों श्रद्धालु बिना ज़्यादा देरी के बाबा महाकाल की पवित्र नगरी तक यात्रा कर सकेंगे।

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