866 करोड़ के बजट से यह भारतीय कंपनी बनाएगी बुलेट ट्रेन, जाने रेलवे का नया प्लान ?

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866 करोड़ के बजट से यह भारतीय कंपनी बनाएगी बुलेट ट्रेन, जाने रेलवे का नया प्लान ?

Udaipur Times, New Delhi : भारतीय रेलवे देश में पहली स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम इस ट्रेन को तैयार करने के लिए रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने BEML Limited को करीब 866.87 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत दो हाई स्पीड ट्रेनसेट के प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। रेलवे का लक्ष्य मार्च 2027 तक पहला प्रोटोटाइप तैयार करने का है, जिसके बाद ट्रेन की टेस्टिंग शुरू की जाएगी।

B-28 कोडनेम से तैयार होगी हाई स्पीड ट्रेन

भारतीय रेलवे की इस स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन परियोजना को B-28 कोडनेम से जोड़ा जा रहा है। इसका डिजाइन और निर्माण देश में ही करने की दिशा में काम किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य ऐसी हाई स्पीड ट्रेन विकसित करना है जो भारत की जरूरतों और रेलवे के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुरूप हो।

इस ट्रेन की प्रस्तावित अधिकतम गति 280 किमी प्रति घंटा होगी। हालांकि, प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद इसकी क्षमता और प्रदर्शन को अलग-अलग परीक्षणों से गुजरना होगा। टेस्टिंग के दौरान ट्रेन की स्पीड, सुरक्षा, ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रैक के साथ तालमेल और दूसरे तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी।

रु 866.87 करोड़ का मिला है कम्पनी को कॉन्ट्रैक्ट

चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने हाई स्पीड ट्रेनसेट तैयार करने का कॉन्ट्रैक्ट BEML Limited को दिया है। इसकी कुल लागत करीब 866.87 करोड़ रुपये बताई गई है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत दो हाई स्पीड ट्रेनसेट के प्रोटोटाइप तैयार किए जाने हैं।

दो ट्रेनसेट तैयार करने का मकसद शुरुआती प्रोटोटाइप के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना और टेस्टिंग के जरिए इसकी तकनीकी क्षमता को परखना है। सफल परीक्षणों के बाद आगे बड़े स्तर पर उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

मार्च 2027 तक पहला प्रोटोटाइप तैयार करने का है लक्ष्य

रेलवे की योजना के मुताबिक मार्च 2027 तक पहला प्रोटोटाइप तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोटोटाइप बनने के बाद इसे विभिन्न परिस्थितियों में टेस्ट किया जाएगा। हाई स्पीड ट्रेन के मामले में सिर्फ अधिकतम रफ्तार हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि ट्रेन की स्थिरता, यात्रियों की सुरक्षा, ब्रेकिंग और हाई स्पीड पर दूसरे सिस्टम के प्रदर्शन की भी जांच जरूरी होती है।

टेस्टिंग के नतीजों के आधार पर ट्रेन के डिजाइन और तकनीकी प्रणालियों में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। इसके बाद ही इसके नियमित संचालन और बड़े पैमाने पर निर्माण से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।

BEML बनाएगी ट्रेनसेट, ICF की अहम भूमिका

इस परियोजना में BEML और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री की महत्वपूर्ण भूमिका है। ICF भारतीय रेलवे की प्रमुख कोच निर्माण इकाइयों में शामिल है, जबकि BEML देश में रेल और परिवहन से जुड़े उपकरणों के निर्माण का अनुभव रखने वाली कंपनी है।

दोनों संस्थाओं की विशेषज्ञता के जरिए हाई स्पीड ट्रेनसेट को देश में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। यह परियोजना भारतीय रेलवे की स्वदेशी तकनीक और हाई स्पीड रेल निर्माण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

280 Kmph की रफ्तार से दौड़ने की क्षमता

इस हाई स्पीड ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 280 किमी प्रति घंटे की प्रस्तावित अधिकतम गति है। इतनी अधिक रफ्तार पर ट्रेन चलाने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ ट्रैक, सिग्नलिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन और सुरक्षा प्रणालियों का भी हाई स्पीड संचालन के अनुरूप होना जरूरी होगा।

यही वजह है कि प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद इसकी व्यापक टेस्टिंग की जाएगी। टेस्टिंग के दौरान ट्रेन को अलग-अलग गति और परिस्थितियों में चलाकर इसकी तकनीकी क्षमता का आकलन किया जाएगा।

भारत में हाई स्पीड रेल नेटवर्क के लिए बड़ा कदम

भारत में हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। देश में हाई स्पीड ट्रेन तकनीक के लिए अब तक विदेशी तकनीक और सहयोग पर काफी निर्भरता रही है। ऐसे में देश में ही 280 किमी प्रति घंटे की क्षमता वाली ट्रेन विकसित करने की कोशिश रेलवे के लिए अहम मानी जा रही है।

अगर B-28 परियोजना के प्रोटोटाइप सफल रहते हैं और परीक्षणों में निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं, तो भविष्य में ऐसी ट्रेनों के बड़े पैमाने पर उत्पादन का रास्ता खुल सकता है। इससे भारत की घरेलू हाई स्पीड ट्रेन निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलने के साथ रेल क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ सकता है।

पहले प्रोटोटाइप की टेस्टिंग के बाद आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट

फिलहाल परियोजना का अगला बड़ा पड़ाव मार्च 2027 तक पहला प्रोटोटाइप तैयार करना है। इसके बाद ट्रेनसेट को व्यापक परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना होगा। टेस्टिंग के दौरान मिलने वाले परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि ट्रेन को आगे किस तरह विकसित और इस्तेमाल किया जाएगा।

यानी अभी इसे नियमित यात्री सेवा में शामिल करने की तारीख तय नहीं है। फिलहाल फोकस दो प्रोटोटाइप तैयार करने और उनकी तकनीकी क्षमता को सफलतापूर्वक साबित करने पर है। अगर परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह भारत के हाई स्पीड रेल क्षेत्र में स्वदेशी ट्रेन निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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