₹12000 करोड़ की लागत से तैयार होगा ये नया एक्सप्रेसवे, खनिजों से भरे 2 राज्यों की बढ़ाएगा कनेक्टिविटी

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₹12000 करोड़ की लागत से तैयार होगा ये नया एक्सप्रेसवे, खनिजों से भरे 2 राज्यों की बढ़ाएगा कनेक्टिविटी

Udaipur Times, Raipur-Dhanbad Economic Corridor : देश में कई ऐसे एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर हैं जिनकी चर्चा दिल्ली-मुंबई या गंगा एक्सप्रेसवे जितनी नहीं होती, लेकिन इनका असर बड़े औद्योगिक इलाकों पर पड़ता है। रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर भी ऐसा ही एक बड़ा प्रोजेक्ट है। करीब 627 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और कोयला, स्टील, खनिज और दूसरे औद्योगिक माल की आवाजाही को आसान बनाने में मदद करेगा। इस कॉरिडोर का करीब 384 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ में है। इसका मकसद रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक इलाकों को झारखंड के धनबाद, रांची और जमशेदपुर के कोयला-स्टील बेल्ट से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इससे माल ढुलाई का समय और लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है।

627 किमी लंबे कॉरिडोर से मजबूत होगी कनेक्टिविटी

रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर को छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बेहतर सड़क संपर्क के लिए विकसित किया जा रहा है। यह कॉरिडोर दोनों राज्यों के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को आपस में जोड़ने का काम करेगा। छत्तीसगढ़ में रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे इलाके औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जबकि झारखंड में धनबाद, रांची, बोकारो और जमशेदपुर का क्षेत्र कोयला और स्टील उद्योग के लिए जाना जाता है। इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद इन क्षेत्रों के बीच माल की आवाजाही को बेहतर सड़क नेटवर्क मिल सकेगा। इससे कोयला, खनिज, स्टील और अन्य औद्योगिक उत्पादों के परिवहन में समय कम होने और लॉजिस्टिक्स लागत घटने की उम्मीद है।

कई हिस्सों पर पहले से चल रहा है काम

जनवरी 2026 में लोकसभा में दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक, कॉरिडोर के कई हिस्सों पर पहले से काम चल रहा था। बिलासपुर-उरगा सेक्शन की लंबाई 70.20 किलोमीटर है। इसमें 69.01 किलोमीटर काम पूरा हो चुका था, यानी करीब 1.19 किलोमीटर हिस्सा बाकी था। इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। इसके आगे उरगा-पत्थलगांव सेक्शन की लंबाई 80.585 किलोमीटर है। इसमें 53.57 किलोमीटर काम पूरा हो चुका था, जबकि करीब 27.02 किलोमीटर हिस्सा बाकी था। इसकी संभावित पूरी होने की तारीख अगस्त 2026 बताई गई थी। इससे साफ है कि पूरे कॉरिडोर को अलग-अलग पैकेज में विकसित किया जा रहा है और अलग-अलग हिस्सों में निर्माण की स्थिति भी अलग है।

104 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा है बेहद अहम

कॉरिडोर में पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर तक 104.25 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा शामिल है। जनवरी 2026 तक इस हिस्से में 87 प्रतिशत जमीन का फिजिकल पजेशन मिल चुका था और फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पहला चरण भी मिल गया था।अप्रैल 2026 में एनएचएआई ने इसी हिस्से पर 3,147 करोड़ रुपये के निवेश से निर्माण शुरू होने की जानकारी दी। यह हिस्सा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए छत्तीसगढ़ के जशपुर क्षेत्र से झारखंड की ओर सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। वहीं झारखंड बॉर्डर से गुमला तक 32 किलोमीटर के हिस्से में जनवरी 2026 तक 68 प्रतिशत जमीन का पजेशन मिल चुका था। यहां भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पहला चरण मिल गया था और वर्किंग परमिशन की प्रक्रिया चल रही थी।

झारखंड में कई सेक्शन हो चुके हैं पूरे

झारखंड में गुमला-पलमा के 63 किलोमीटर और पलमा-रांची के 23 किलोमीटर हिस्से पूरे हो चुके थे। वहीं ओरमांझी-गोला के 28 किलोमीटर हिस्से में 87 प्रतिशत और गोला-बोकारो के 32 किलोमीटर हिस्से में 75 प्रतिशत फिजिकल प्रोग्रेस दर्ज की गई थी। इसके अलावा बोकारो-धनबाद का 57 किलोमीटर हिस्सा भी पूरा हो चुका था। यानी कॉरिडोर के कई हिस्सों में निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बाकी हिस्सों में निर्माण, जमीन और जरूरी मंजूरियों से जुड़ी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

सरकारी दस्तावेज में 2,192 करोड़ रुपये बताई गई लागत

इस पूरे 627 किलोमीटर कॉरिडोर के लिए एक ही कुल लागत बताने के बजाय अलग-अलग पैकेज की लागत तय की गई है। बिलासपुर-उरगा के 70.20 किलोमीटर सेक्शन की परियोजना लागत पुराने सरकारी दस्तावेज में 2,192 करोड़ रुपये बताई गई थी। उरगा-पत्थलगांव सेक्शन की डीपीआर में कुल परियोजना लागत करीब 2,261 करोड़ रुपये थी। वहीं सबसे नए बड़े हिस्से यानी पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर तक 104.25 किलोमीटर के लिए 3,147 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर से गुमला-भद्रा तक के बड़े पैकेज को पीपीपीएसी ने 4,472.78 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के साथ मंजूरी दी थी। अलग-अलग पैकेज की लागत को देखें तो यह परियोजना कई हजार करोड़ रुपये के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी है।

104 किमी वाले हिस्से में बनेंगे 382 छोटे-बड़े स्ट्रक्चर

पत्थलगांव-कुनकुरी से झारखंड बॉर्डर तक का 104.25 किलोमीटर हिस्सा इस कॉरिडोर के सबसे अहम हिस्सों में शामिल है। इसमें 4 लेन की सड़क के साथ बड़ी संख्या में पुल, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जा रहे हैं। एनएचएआई के मुताबिक, इस रूट पर कुल 382 छोटे-बड़े स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इनमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर और 1 एलिवेटेड वायाडक्ट शामिल हैं। इसके अलावा वाहनों, हल्के वाहनों, पैदल यात्रियों और मवेशियों की आवाजाही के लिए अलग-अलग अंडरपास बनाए जा रहे हैं। इस हिस्से में 278 बॉक्स कलवर्ट भी बनाए जा रहे हैं। इतने बड़े स्तर पर स्ट्रक्चर का निर्माण इस रूट को बेहतर और व्यवस्थित यातायात के लिए तैयार करने की योजना को दिखाता है।

किन शहरों और इलाकों को मिलेगा फायदा?

यह कॉरिडोर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक इलाकों को झारखंड के धनबाद, रांची और जमशेदपुर से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अलावा जशपुर जिले के लिए भी यह प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।पत्थलगांव, कांसाबेल, कुनकुरी, दुलदुला और जशपुर जैसे इलाकों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने की उम्मीद है। इससे इन क्षेत्रों की बड़े शहरों और औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच आसान हो सकती है।

कोयला-खनिज और स्टील की आवाजाही होगी आसान

छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों ही खनिज संपदा से समृद्ध राज्य हैं। यहां कोयला, लौह अयस्क, स्टील और दूसरे खनिज आधारित उद्योगों से जुड़ी गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच बेहतर सड़क संपर्क औद्योगिक माल की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कॉरिडोर के जरिए कोयला, खनिज, स्टील और दूसरे सामान को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने से उद्योगों और कारोबार को भी फायदा मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर परिवहन, व्यापार और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सिर्फ सड़क नहीं, औद्योगिक नेटवर्क को मजबूत करने की तैयारी

रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर इसलिए सिर्फ एक लंबी सड़क परियोजना नहीं है। इसका असली महत्व देश के मध्य हिस्से को पूर्वी भारत के खनिज और औद्योगिक बेल्ट से बेहतर तरीके से जोड़ने में है। एक तरफ छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्र हैं, तो दूसरी तरफ झारखंड का धनबाद, रांची, बोकारो और जमशेदपुर क्षेत्र है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी इन दोनों औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को आसान बनाने में मदद कर सकती है।

छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी को देगा नया आधार

रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के कई हिस्से पूरे हो चुके हैं, जबकि कई हिस्सों में निर्माण कार्य चल रहा है। कुछ सेक्शन में जमीन का पजेशन, फॉरेस्ट क्लीयरेंस और दूसरी जरूरी मंजूरियों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ाई जा रही हैं। कुल मिलाकर करीब 627 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी को नया आधार देने की क्षमता रखता है। खासतौर पर 104 किलोमीटर के हिस्से में बनने वाले 382 छोटे-बड़े स्ट्रक्चर और अलग-अलग पैकेज में हो रहा निर्माण इसे एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में सामने लाता है। इसके पूरा होने के बाद दोनों राज्यों के खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

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