जल्द तैयार होगा ये नया 'महा-एक्सप्रेसवे', दिल्ली-UP समेत 6 राज्यों की बढ़ाएगा कनेक्टिविटी
Udaipur Times, Maha-Expressway : उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे (Shamli-Gorakhpur Expressway)परियोजना को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। इस 749 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के निर्माण का रास्ता जल्द साफ हो सकता है। परियोजना का प्रारंभिक सर्वे पूरा हो चुका है और अब जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजा दरें तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दरें तय होते ही किसानों को मुआवजा वितरण और भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से शुरू किया जाएगा।
दो चरणों में बनेगा एक्सप्रेसवे
शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा।
पहला चरण: शामली से शाहजहांपुर के पुवायां तक, जिसकी लंबाई 348.184 किलोमीटर होगी।
दूसरा चरण: पुवायां से गोरखपुर तक 391.77 किलोमीटर का मार्ग बनाया जाएगा।
इस तरह एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 749 किलोमीटर होगी।
12 घंटे का सफर घटकर होगा 7.5 घंटे
फिलहाल शामली से गोरखपुर तक सड़क मार्ग से पहुंचने में करीब 12 घंटे का समय लगता है। छह लेन वाले एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यही दूरी महज 7.5 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
चार बड़े एक्सप्रेसवे का बनेगा महा-संगम
यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत के चार प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़कर एक बड़ा हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार करेगा।
अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे: शामली के पास कनेक्टिविटी मिलने से पंजाब और हरियाणा के वाहन बिना दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश किए सीधे उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जा सकेंगे।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: शामली के पास लिंक बनने से उत्तराखंड और दिल्ली के यात्रियों को भी सीधा फायदा मिलेगा।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: गोरखपुर के पास जुड़ने से बिहार और पश्चिम बंगाल तक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।
गंगा एक्सप्रेसवे: शाहजहांपुर के पास लिंक रोड के जरिए गंगा एक्सप्रेसवे से भी इसे जोड़ा जाएगा।
6 राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ
हालांकि यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह उत्तर प्रदेश में बनाया जाएगा, लेकिन इसके पूरा होने के बाद पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क पहले से कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएगा। इससे माल परिवहन, व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, औद्योगिक इकाइयों, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का तेजी से विकास होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को भी अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।
